Venezuela Crisis: वेनेजुएला की राजधानी काराकास एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों की आवाजों से दहल उठी है। यह हिंसक हलचल राष्ट्रपति भवन ‘पालासिओ डी मिराफ्लोरेस’ के बिल्कुल समीप हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि हिंसा की यह घटना ठीक उस समय हुई, जब डेल्सी रोड्रिगेज ने देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला है। शनिवार को हुए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के बाद से ही पूरा शहर किसी छावनी में तब्दील नजर आ रहा है, और इस ताज़ा गोलीबारी ने नागरिकों के बीच दहशत को और गहरा कर दिया है।
Venezuela Crisis: ड्रोन हमले की आशंका और सुरक्षाबलों की कार्रवाई
शुरुआती अपुष्ट खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति भवन और प्रमुख सरकारी इमारतों के ऊपर कुछ संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखे गए थे। संभावित खतरे को देखते हुए वेनेजुएला के सुरक्षाबलों ने तत्काल मोर्चा संभाला और उन ड्रोनों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। एहतियात के तौर पर शहर के महत्वपूर्ण मंत्रालयों को खाली करा लिया गया है। हालांकि, बाद में सरकारी अधिकारियों ने बयान जारी कर इसे सेना की एक ‘संचार त्रुटि’ (Communication Error) करार दिया और दावा किया कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।
Venezuela Crisis: निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और नई राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण
वेनेजुएला में यह अस्थिरता शनिवार को शुरू हुई जब अमेरिकी सेना ने एक साहसिक हमले के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। मादुरो के पकड़े जाने के बाद, उनकी उपराष्ट्रपति रहीं डेल्सी रोड्रिगेज ने रविवार को नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। लेकिन शपथ ग्रहण के महज 24 घंटे के भीतर हुई इस गोलीबारी ने नई सरकार की स्थिरता और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती: खौफ में डूबे स्थानीय निवासी
राष्ट्रपति भवन से महज पांच ब्लॉक दूर रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने मीडिया को बताया कि सोमवार रात अचानक गोलियों की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। उन्होंने बताया, “यह सिलसिला कुछ मिनटों तक चला, जिसने शनिवार के अमेरिकी हमले की यादें ताज़ा कर दीं। लोग डर के मारे घरों में दुबक गए।” एक अन्य निवासी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि गोलियों की आवाज सुनकर हर कोई अपनी खिड़कियों से आसमान की ओर देख रहा था कि कहीं कोई नया हवाई हमला तो नहीं हो रहा है। गनीमत यह रही कि यह शोर जल्द ही थम गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।
वेनेजुएला का गहराता संकट और अमेरिकी हस्तक्षेप
वेनेजुएला इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी सेना के हमले ने देश की संप्रभुता और राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अमेरिकी आर्मी द्वारा मादुरो को पकड़ने और उन्हें अमेरिका ले जाने के बाद से ही काराकास की सड़कों पर सन्नाटा और तनाव पसरा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मादुरो शासन के अंत के बाद अब वेनेजुएला में सत्ता के लिए संघर्ष तेज हो सकता है, जिससे गृहयुद्ध जैसी स्थितियां पैदा होने का डर है।
सुरक्षाबलों का दावा और भविष्य की अनिश्चितता
हालाँकि वेनेजुएला के रक्षा विभाग ने जनता को आश्वस्त किया है कि स्थिति उनके काबू में है, लेकिन राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के बावजूद संदिग्ध ड्रोनों का दिखना और फायरिंग होना कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। क्या यह वास्तव में सेना की एक गलती थी या नई सरकार को अस्थिर करने की कोई गहरी साजिश, यह अभी जांच का विषय है। आने वाले कुछ दिन वेनेजुएला के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि पूरा विश्व समुदाय इस लैटिन अमेरिकी देश के घटनाक्रम पर नजरें गड़ाए हुए है।










