Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम पर घमासान! सभी अंतरे गाना है अनिवार्य? शशि थरूर का बड़ा बयान

केरल में वंदे मातरम के गायन को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आधिकारिक कार्यक्रमों में गीत के सभी पांच अंतरे गाने की अनिवार्यता को 'गैर-जरूरी बोझ' बताया है। दूसरी ओर, विधानसभा में इसे पूरा न गाने को लेकर राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच तकरार बढ़ गई है। जानिए क्या है पूरा कानूनी और राजनीतिक विवाद।

Vande Mataram Controversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 2, 2026

Vande Mataram Controversy:  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम’ के सभी पांच अंतरे गाने की अनिवार्यता पर खुलकर असहमति जताई है। केरल में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर गरमाई राजनीति के बीच थरूर ने मीडिया से बातचीत में इस प्रथा को श्रोताओं के लिए बोझिल और तर्कहीन करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मान अपनी जगह है, लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे गाने का नियम जबरन थोपा हुआ प्रतीत होता है।

शशि थरूर का तर्क

बताते चले कि, तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने अपने बयान में कहा कि हम सभी ‘वंदे मातरम’ का दिल से सम्मान करते हैं और इसके सम्मान में उठकर खड़े होना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों को इसके शुरुआती एक या दो अंतरे ही याद होते हैं। थरूर के अनुसार, पारंपरिक रूप से कार्यक्रम की शुरुआत में इसे एक बार गाने की प्रथा रही है और राष्ट्रगान का स्थान अलग होता है, लेकिन वर्तमान में जो सभी अंतरे गाने का दबाव बनाया जा रहा है, वह अनावश्यक है।

हर समारोह में पूरा वंदे मातरम गाना आवश्यक है?

आपको बता दे कि, थरूर ने इसे एक ‘गैर-जरूरी थोपा गया नियम’ बताते हुए कहा कि हर कार्यक्रम की शुरुआत और अंत में पांचों अंतरे गाने की जिद तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि उस प्रक्रिया और नियमों पर आपत्ति है जो बिना किसी व्यावहारिक सोच के लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक और सहज लहजे में कहा कि वे स्वयं भी पूरे गीत को खुशी-खुशी गाने में सक्षम हैं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना गलत है।

क्या है विवाद की जड़?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केरल विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ के पूरे अंतरे नहीं गाए गए और जो हिस्से गाए गए, उन्हें भी केवल बैंड द्वारा बजाया गया। इस घटना से राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। राज्यपाल की इस प्रतिक्रिया के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई और राष्ट्रगीत के प्रोटोकॉल को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

क्या वंदे मातरम को लेकर संसद का कोई स्पष्ट कानून है?

इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीएम वीडी सतीशन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि संसद ने इस संबंध में कोई कड़ा कानून नहीं बनाया है, बल्कि केवल कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सतीशन का कहना है कि नियमों के नाम पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रगीत की गरिमा और उसके गायन को लेकर चल रहा यह विवाद किस दिशा में जाता है।