Vande Mataram: कांग्रेस ने साफ किया रुख, कार्यक्रमों में गाए जाएंगे पहले दो अंतरे

वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि उसके कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस ने यह संदेश किस रणनीति के तहत दिया है।

Vande Mataram

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 19, 2026

Vande Mataram: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने अपने आंतरिक कार्यक्रमों को लेकर अहम निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC की बैठक में तय किया गया कि पार्टी के आंतरिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। इसके साथ ही पार्टी ने 1937 में अपनाए गए अपने पुराने प्रस्ताव और रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया है।

1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव पर फिर जताया भरोसा

कांग्रेस का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर उसका वर्तमान रुख अचानक लिया गया फैसला नहीं है। पार्टी ने अपने ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि आंतरिक कार्यक्रमों में गीत के पहले दो अंतरों के गायन की परंपरा को ही आगे बढ़ाया जाएगा। CWC की बैठक में इस पुराने रुख पर दोबारा मुहर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

15 अगस्त के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

‘वंदे मातरम’ को लेकर ताजा राजनीतिक विवाद 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद तेज हुआ। समारोह के दौरान गीत के गायन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी के बीच बातचीत होती दिखाई दी। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ दिया।

भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को बीच में रोकने का प्रयास किया। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय गीत का अनादर बताते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। इस आरोप के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी की ओर से कहा गया कि सोनिया गांधी गीत को रोकने के उद्देश्य से कुछ नहीं कर रही थीं। कांग्रेस के मुताबिक, वह केवल मल्लिकार्जुन खरगे के बैठने के लिए कुर्सी मंगवाने की बात कर रही थीं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने या उसका अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

खरगे ने भाजपा को दिया करारा जवाब

विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा पर तीखा पलटवार किया। खरगे ने कहा कि उन्होंने वही ‘वंदे मातरम’ गाया है, जिसे महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने भी गाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनके द्वारा इस तरह गीत गाना अपराध माना जा रहा है, तो फिर स्वतंत्रता आंदोलन के इन प्रमुख नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

नए कानून ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब संसद से पारित ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को लेकर भी चर्चा जारी है। इस कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है। जानबूझकर गीत के गायन में बाधा डालने को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया अपना राजनीतिक संदेश

कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने आंतरिक आयोजनों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी का कहना है कि उसके कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। CWC के इस फैसले को कांग्रेस द्वारा अपने पुराने ऐतिहासिक रुख को कायम रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

राष्ट्रगीत को लेकर सियासत और तेज होने के आसार

‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। ऐसे में इसके गायन और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर होने वाली बहस का असर व्यापक राजनीतिक विमर्श पर पड़ता है। कांग्रेस के ताजा फैसले के बाद इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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