Uttarakhand News: उत्तराखंड में बनेगी देश की पांचवीं साइंस सिटी, 173 करोड़ रुपये होंगे खर्च

देहरादून में करीब 173 करोड़ रुपये की लागत से देश की पांचवीं साइंस सिटी बनाने की योजना प्रस्तावित है। 25 एकड़ में विकसित होने वाले इस केंद्र में स्पेस थिएटर और साइंस ऑन स्फीयर आकर्षण होंगे। लेकिन परियोजना की फंडिंग कैसे होगी और विद्यार्थियों को क्या खास मिलेगा? जानिए पूरी जानकारी।

उत्तराखंड में बनेगी देश की पांचवीं साइंस सिटी

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 17, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधामी देहरादून और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए साइंस सिटी बनाने और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए साइंस सिटी बनाने की योजना प्रस्तावित है। इस परियोजना पर करीब 173 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली यह साइंस सिटी विद्यार्थियों, युवाओं और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आधुनिक ज्ञान का केंद्र बन सकती है। यहां विज्ञान के सिद्धांतों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय मॉडल, प्रदर्शन और तकनीकी माध्यमों से समझाने की योजना है।

क्या होती है साइंस सिटी?

साइंस सिटी ऐसा विज्ञान केंद्र होता है, जहां विज्ञान और तकनीक से जुड़ी जानकारियां रोचक और व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत की जाती हैं। यहां वैज्ञानिक सिद्धांतों को मॉडल, इंटरैक्टिव प्रदर्शन और विभिन्न गतिविधियों के जरिए समझने का अवसर मिलता है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना तथा रोजमर्रा की घटनाओं के पीछे छिपे विज्ञान को आसान भाषा में समझाना है। देहरादून में प्रस्तावित साइंस सिटी भी इसी तरह विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

स्पेस थिएटर और साइंस ऑन स्फीयर होंगे खास आकर्षण

स्पेस थिएटर और साइंस ऑन स्फीयर होंगे खास आकर्षण
स्पेस थिएटर और साइंस ऑन स्फीयर होंगे खास आकर्षण

प्रस्तावित साइंस सिटी में स्पेस थिएटर और ‘साइंस ऑन स्फीयर’ जैसे आकर्षण खास माने जा रहे हैं। स्पेस थिएटर के जरिए अंतरिक्ष, ग्रहों और ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारियों को दृश्य माध्यम से समझने का अवसर मिल सकता है। वहीं, साइंस ऑन स्फीयर तकनीक के माध्यम से पृथ्वी, मौसम, पर्यावरण और भौगोलिक घटनाओं को प्रदर्शित किया जा सकता है। इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को जटिल वैज्ञानिक विषयों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विज्ञान के मॉडल से समझाई जाएंगी प्राकृतिक घटनाएं

साइंस सिटी में विज्ञान के विभिन्न मॉडल के माध्यम से पर्यावरण और भूगोल से जुड़ी घटनाओं को समझाने की योजना है। इसके अलावा रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली घटनाओं के वैज्ञानिक पहलुओं को भी आसान तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का मौका मिलेगा। विज्ञान और नवाचार में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है।

उत्तराखंड की संस्कृति और विज्ञान का होगा मेल

उत्तराखंड की संस्कृति और विज्ञान का होगा मेल
उत्तराखंड की संस्कृति और विज्ञान का होगा मेल

इस परियोजना में उत्तराखंड की संस्कृति और उससे जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं को भी प्रदर्शित करने की योजना बताई गई है। राज्य की प्राकृतिक विविधता, भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक ज्ञान को विज्ञान के नजरिए से समझाने का अवसर मिल सकता है। इससे स्थानीय विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की विशेषताओं को नए दृष्टिकोण से जानने में मदद मिलेगी।

परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार देंगी धनराशि

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, साइंस सिटी परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में प्रस्तावित है। इसके अलावा परियोजना की गैप फंडिंग के तहत केंद्र सरकार, संस्कृति मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद यानी यूकास्ट की भूमिका बताई गई है। हालांकि, परियोजना की कुल लागत और फंडिंग के अलग-अलग आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए अंतिम बजट और हिस्सेदारी की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से करना जरूरी है।

देश में कहां-कहां हैं साइंस सिटी?

दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में साइंस सिटी कोलकाता, गुवाहाटी, अहमदाबाद और कपूरथला में मौजूद हैं। देहरादून में प्रस्तावित परियोजना पूरी होने पर उत्तराखंड में भी विज्ञान शिक्षा और वैज्ञानिक जागरूकता के लिए एक नया केंद्र उपलब्ध हो सकता है। इससे विद्यार्थियों और आम लोगों को विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

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