Uttarakhand News: उत्तराखंड में महिलाओं को मिलेगी नई पहचान! विधवा पेंशन का नाम बदलने का प्रस्ताव

उत्तराखंड में विधवा पेंशन योजना को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। धामी सरकार इसका नाम बदलकर मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना रखने की तैयारी कर रही है। राजस्थान मॉडल पर आधारित इस प्रस्ताव का उद्देश्य महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देना है। अब सबकी नजरें आगामी कैबिनेट बैठक के फैसले पर टिकी हैं।

उत्तराखंड में महिलाओं को मिलेगी नई पहचान!

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 12, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार विधवा पेंशन योजना को नया नाम देने की तैयारी कर रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का उद्देश्य विधवा महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने के साथ सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना है। इस संबंध में राजस्थान में लागू पेंशन मॉडल का अध्ययन करने के बाद उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने पर विचार किया जा रहा है।

राजस्थान मॉडल से प्रेरित है योजना का नया नाम

उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार, राजस्थान के अध्ययन दौरे के दौरान वहां संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली गई थी। इस दौरान महिलाओं को पेंशन देने के लिए अपनाए गए मॉडल का भी अध्ययन किया गया। राजस्थान में पेंशन योजना के लिए एकल नारी नाम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे महिलाओं को अधिक व्यापक और सम्मानजनक पहचान मिलती है।

मंत्री के मुताबिक, विधवा शब्द के स्थान पर एकल नारी शब्द का उपयोग करने से महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है। इसी विचार के तहत उत्तराखंड में भी योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रस्ताव पर जताई सहमति

मुख्यमंत्री धामी ने प्रस्ताव पर जताई सहमति
मुख्यमंत्री धामी ने प्रस्ताव पर जताई सहमति

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत चम्पावत जिला मुख्यालय पहुंचे समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने योजना से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राजस्थान से लौटने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई थी। बैठक के दौरान योजना का नाम बदलने का अनुरोध किया गया, जिस पर मुख्यमंत्री की ओर से सहमति मिलने की बात कही गई है।

प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किए जाने और मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। हालांकि, योजना के नए नाम को लेकर अंतिम निर्णय कैबिनेट की स्वीकृति और शासन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा।

किन महिलाओं को मिलता है पेंशन का लाभ?

वर्तमान व्यवस्था के तहत पात्र विधवा महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदिका का उत्तराखंड का निवासी होना और विधवा होना आवश्यक है। न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित बताई गई है। इसके अलावा, परिवार की मासिक आय 4,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए या आवेदिका के पास वैध बीपीएल प्रमाणपत्र होना चाहिए। अन्य पेंशन योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं के लिए पात्रता संबंधी नियम भी लागू होते हैं।

योजना का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।

चम्पावत में 7,846 महिलाओं को मिल रहा लाभ

चम्पावत जिले में समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 7,846 विधवा महिलाएं सामाजिक पेंशन योजना का लाभ उठा रही हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद योजना को नए नाम से संचालित करने की तैयारी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत के अनुसार, जिले में वृद्धावस्था, दिव्यांगजन, किसान, बौना और तीलू रौतेली सहित विभिन्न सामाजिक पेंशन योजनाओं के माध्यम से 30 हजार से अधिक लाभार्थियों को सहायता दी जा रही है।

महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का जोर

योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने की दिशा में एक पहल माना जा रहा है। सरकार का जोर पेंशन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर है। अब इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी और शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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