Uttarakhand News: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में शिक्षा विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 10 शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने सभी 10 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। ये शिक्षक जिले के अलग-अलग प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत थे। जांच के दौरान इनके उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी यूटीईटी-2024 के प्रमाण पत्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान दर्ज विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने पर विभाग ने कार्रवाई आगे बढ़ाई।
रोल नंबर और अंकों का रिकॉर्ड से नहीं हुआ मिलान
मामला उस समय सामने आया जब शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के मूल अभिलेखों से सत्यापन कराया गया। जांच में प्रमाण पत्रों पर दर्ज रोल नंबर और प्राप्त अंकों में अंतर पाया गया। बोर्ड के रिकॉर्ड में इन शिक्षकों से संबंधित जानकारी प्रमाण पत्रों पर दर्ज विवरण से अलग थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की और परिषद से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट को कार्रवाई का आधार बनाया।
बताया गया कि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की ओर से 10 अगस्त को जारी रिपोर्ट में संबंधित प्रमाण पत्रों के सत्यापन को लेकर जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट में प्रमाण पत्रों और बोर्ड के मूल रिकॉर्ड के बीच विसंगतियां सामने आने की पुष्टि हुई। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया शुरू की।
अपना पक्ष रखने के लिए शिक्षकों को दिए गए मौके

शिक्षा विभाग ने कार्रवाई से पहले संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया। बागेश्वर के मुख्य शिक्षा अधिकारी आसाराम चौधरी के अनुसार, विभागीय कार्यवाही के दौरान शिक्षकों को अपना पक्ष रखने के लिए कुल तीन अवसर दिए गए। शुरुआती दो सुनवाई में अधिकांश शिक्षक उपस्थित हुए और उन्होंने अपना पक्ष रखने की कोशिश की। हालांकि, तीसरी सुनवाई में आधे से अधिक शिक्षक उपस्थित नहीं हुए। इसके अलावा वे अपने प्रमाण पत्रों को सही साबित करने के लिए मूल दस्तावेज भी विभाग के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके। उपलब्ध रिकॉर्ड और बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान होने वाले दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिन दस्तावेजों के आधार पर इन शिक्षकों को सरकारी नौकरी मिली, उनका शुरुआती स्तर पर सत्यापन कैसे हुआ, यह भी जांच का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोपों को लेकर अब विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।
सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेज पर सख्त रुख

बागेश्वर में हुई यह कार्रवाई सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर विभाग के सख्त रुख को दर्शाती है। विभागीय जांच में प्रमाण पत्रों और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आने के बाद 10 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। अब मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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