Uttarakhand News: उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को देहरादून में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल के जीवन, राष्ट्रसेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया।
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अशोक सिंघल का जीवन राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रहित, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित किया। उनका जीवन सादगी, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है। मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी व्यक्ति की पहचान उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्व निभाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
राम जन्मभूमि आंदोलन में योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में अशोक सिंघल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने तक सिंघल ने अहम योगदान दिया। उन्होंने संतों, धर्माचार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों को साझा उद्देश्य से जोड़ने का काम किया।
धामी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण को देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने पर जोर देते थे। मर्यादा, त्याग, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों से समाज को मजबूत बनाया जा सकता है।
समान नागरिक संहिता और कानून-व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक समरसता, समान अधिकार और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समान कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी और दंगा रोधी कानूनों का भी जिक्र किया। साथ ही सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश संरक्षण और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की पहल
धामी ने कहा कि युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी परंपराओं, संस्कारों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। सरकार शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहन मिलेगा।
धार्मिक स्थलों के विकास और कुंभ की तैयारियों पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं और प्राचीन मंदिरों से जुड़ी है। केदारखंड और मानसखंड मंदिर माला मिशन के साथ हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने हरिपुर-कालसी में यमुना स्नान घाट और 21 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगामी हरिद्वार कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज, संत-महात्मा, परिषद के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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