Uttarakhand News: उत्तराखंड में अब नहीं बिकेगा गुटखा-पान मसाला? सरकार ने एक साल के लिए बढ़ाई रोक

उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाले की बिक्री पर एक साल की रोक बढ़ा दी गई है। धामी सरकार के इस फैसले के तहत किन उत्पादों पर प्रतिबंध लागू होगा, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी और त्योहारों से पहले मिलावट रोकने के लिए विभाग ने क्या तैयारी की है? जानिए पूरी खबर।

उत्तराखंड में अब नहीं बिकेगा गुटखा-पान मसाला?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 14, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार ने प्रतिबध की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तंबाकू, गुटखा, पान मसाला और इनका इस्तेमाल करके तैयार किए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर अगले एक साल तक रोक लगा दी है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए भी विभाग ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।

उत्तराखंड में किन उत्पादों पर लगाया गया प्रतिबंध?

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा इन पदार्थों का इस्तेमाल करके बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। यह रोक किसी एक ब्रांड या नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में अलग-अलग नामों से बेचे जाने वाले संबंधित उत्पादों पर भी लागू होगी।

विभाग के आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध के दायरे में इन उत्पादों का निर्माण करने के साथ-साथ उनका भंडारण, वितरण और बिक्री भी शामिल है। आदेश का उद्देश्य ऐसे पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को रोकना और आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।

एक साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध

सरकार का यह निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बन्धन) विनियम, 2011 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है। आदेश के अनुसार, प्रतिबंध जारी होने की तारीख से अगले एक साल तक प्रभावी रहेगा।

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कहा है कि संबंधित उत्पादों पर रोक की अवधि को आगे बढ़ाया गया है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को राज्यभर में निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर रहेगी नजर

प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण, भंडारण और बिक्री नियमों के विरुद्ध न हो।

अधिकारियों को बाजारों और संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग की कार्रवाई से राज्य में प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता पर निगरानी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर भी शिकंजा

त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर भी शिकंजा
त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर भी शिकंजा

तंबाकू और पान मसाले पर प्रतिबंध के साथ खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए भी विभाग ने कदम उठाया है। एफडीए आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय ने सभी जिलों में क्विक रिस्पांस टीम (त्वरित कार्रवाई दल) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। त्योहारों के दौरान पनीर, मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतें सामने आने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए जिलों में विशेष टीमें बनाकर जांच और छापेमारी अभियान चलाने पर जोर दिया गया है।

सभी जिलों में जांच अभियान चलाने के निर्देश

विभाग ने अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और मिलावट की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। क्विक रिस्पांस टीमों का उद्देश्य शिकायतों पर तेजी से प्रतिक्रिया देना और संदिग्ध खाद्य उत्पादों की जांच करना है।

इस तरह उत्तराखंड में एक ओर तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर एक साल की रोक लागू की गई है, वहीं दूसरी ओर त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। अब प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई संबंधित विभागों की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।

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