
Uttarakhand Dussehra 2026: उत्तराखंड में विजयादशमी का पर्व इस बार भव्य आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित 79वें दशहरा महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई पिछले साल के मुकाबले बढ़ाई गई है। आयोजकों के मुताबिक, पुतलों के निर्माण और आतिशबाजी सहित आयोजन पर करीब 21 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
रिमोट से होगा रावण दहन
देहरादून के परेड ग्राउंड में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी तैयार किए गए हैं। इनके अलावा लंका दहन भी किया जाएगा। इस बार रावण के पुतले को रिमोट के जरिए जलाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए पुतले में विशेष आतिशबाजी की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान पहले लंका दहन, फिर मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन और अंत में रावण दहन किया जाएगा। विशाल पुतले और आतिशबाजी दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेंगे।
शोभायात्रा से शुरू होगा देहरादून का दशहरा महोत्सव
बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से दशहरे के अवसर पर शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा श्री गोपीनाथ मंदिर से शुरू होकर शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए परेड ग्राउंड पहुंचेगी। आयोजकों ने कार्यक्रम के लिए प्रवेश और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी तय की हैं। आयोजन के मद्देनजर यातायात में बदलाव किए गए हैं और परेड ग्राउंड के आसपास कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी। लोगों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले यातायात संबंधी निर्देशों की जानकारी ले लें।
अल्मोड़ा में रावण परिवार के 23 पुतलों का निकलेगा जुलूस

कुमाऊं की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में दशहरे की परंपरा अलग पहचान रखती है। यहां केवल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद ही नहीं, बल्कि रावण परिवार से जुड़े कई अन्य पात्रों के पुतले भी बनाए जाते हैं। इस बार कुल 23 पुतले तैयार किए गए हैं। स्थानीय कलाकारों ने कई दिनों की मेहनत से इन पुतलों को कलात्मक रूप दिया है। दशहरा महोत्सव के दौरान पुतलों का जुलूस शहर के प्रमुख बाजारों से निकलेगा और इसके बाद एसएसजे परिसर के जूलॉजी मैदान में उनका दहन किया जाएगा।
166 साल पुरानी परंपरा में शामिल हुए नए पात्र
अल्मोड़ा में दशहरा महोत्सव की परंपरा करीब 166 साल पुरानी मानी जाती है। समय के साथ इस आयोजन में पुतलों की संख्या और विविधता बढ़ती गई है। इस वर्ष रावण परिवार के कुनबे में अहिरावण समेत कुछ नए पात्रों को भी शामिल किया गया है। अलग-अलग मोहल्लों की समितियां इन पुतलों को तैयार करने में भागीदारी करती हैं। यही वजह है कि अल्मोड़ा का दशहरा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ स्थानीय कला, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक भी माना जाता है।
देहरादून और अल्मोड़ा में सुरक्षा के साथ उत्सव की तैयारी
दोनों शहरों में दशहरा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। प्रशासन और आयोजन समितियों ने भीड़ प्रबंधन, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया है। देहरादून में विशाल रावण दहन और अल्मोड़ा में 23 पुतलों का जुलूस इस बार के प्रमुख आकर्षण हैं। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है और उत्तराखंड के ये आयोजन धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को भी सामने लाते हैं।
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