US Venezuela Relations: डोनाल्ड ट्रंप के बदले सुर, वेनेजुएला से सुधरेंगे रिश्ते और तेल क्षेत्र में होगा बड़ा निवेश

क्या डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को अमेरिकी ऊर्जा का नया केंद्र बनाने की तैयारी कर ली है? निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को $100 बिलियन के निवेश का न्योता दिया है। इस "ऐतिहासिक एनर्जी डील" से न केवल अमेरिका बल्कि भारत जैसे देशों को भी सस्ता तेल मिल सकता है।

US Venezuela Relations

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 21, 2026

US Venezuela Relations : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के प्रति अपनी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव आने के संकेत दिए हैं। हाल ही में एक संबोधन के दौरान ट्रंप ने स्वीकार किया कि एक समय वह वेनेजुएला के खिलाफ काफी सख्त थे, जिसका मुख्य कारण वहां की जेलों का अमेरिका के लिए खुल जाना और प्रवासियों का मुद्दा था। हालांकि, अब परिदृश्य बदल चुका है। ट्रंप ने कहा कि अब वह वेनेजुएला को पसंद करने लगे हैं क्योंकि वहां की वर्तमान सरकार अमेरिका के साथ सहयोग करने और द्विपक्षीय मसलों पर मिलकर काम करने के लिए सकारात्मक रुख अपना रही है। ट्रंप का यह बदला हुआ अंदाज दक्षिण अमेरिका में नए कूटनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।

तेल भंडार और आर्थिक निवेश: सऊदी अरब से भी आगे निकलने की तैयारी

ट्रंप ने वेनेजुएला की आर्थिक क्षमता, विशेष रूप से उसके ऊर्जा संसाधनों पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के पास सऊदी अरब से भी अधिक तेल भंडार मौजूद हैं, जो उसे दुनिया का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र बनाते हैं। ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग के चलते बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियां अब वेनेजुएला में भारी निवेश करने की योजना बना रही हैं। यदि यह निवेश हकीकत में बदलता है, तो यह न केवल वेनेजुएला की जर्जर अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी बड़ी हलचल पैदा करेगा। ट्रंप का मानना है कि व्यापारिक साझेदारी के जरिए दोनों देश साझा विकास की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।

मारिया कोरिना माचाडो की तारीफ और कूटनीतिक भूमिका

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को लेकर भी ट्रंप ने अपनी राय स्पष्ट की। माचाडो ने हाल ही में वेनेजुएला की आजादी के प्रति ट्रंप के समर्थन को देखते हुए अपना ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ उन्हें भेंट करने की पेशकश की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने माचाडो की जमकर तारीफ की और उन्हें एक ‘शानदार महिला’ बताया। ट्रंप ने इच्छा जताई कि वे माचाडो को वेनेजुएला से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों में शामिल करना चाहेंगे। ट्रंप ने कहा, “मारिया ने जो किया वह अद्भुत है, और मैं भविष्य में उन्हें इन चर्चाओं का हिस्सा बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहा हूँ।”

नोबेल फाउंडेशन का स्पष्टीकरण: पुरस्कार हस्तांतरण पर रोक

हालांकि, माचाडो द्वारा अपना नोबेल पुरस्कार ट्रंप को दिए जाने की पेशकश पर कानूनी अड़चनें सामने आई हैं। नोबेल फाउंडेशन और नोबेल संस्थान ने इस पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि नोबेल पुरस्कार के नियमों के अनुसार, इसे किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित (Transfer) या साझा नहीं किया जा सकता है। फाउंडेशन ने कहा कि एक बार पुरस्कार घोषित होने के बाद वह केवल मूल विजेता का ही रहता है और इसे किसी भी परिस्थिति में किसी और को नहीं सौंपा जा सकता। इस स्पष्टीकरण ने माचाडो की प्रतीकात्मक भेंट को केवल एक कूटनीतिक संदेश तक सीमित कर दिया है।

भविष्य की संभावनाएं और क्षेत्रीय स्थिरता

वेनेजुएला को लेकर ट्रंप का यह नया रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। लंबे समय तक प्रतिबंधों और तनाव का सामना करने वाले इन दोनों देशों के बीच यदि संबंध सामान्य होते हैं, तो इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका पर पड़ेगा। ट्रंप की नजरें स्पष्ट रूप से वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर हैं, जबकि वेनेजुएला अपने आर्थिक अलगाव को खत्म करना चाहता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘पसंद’ और ‘सहयोग’ वास्तव में जमीन पर किसी बड़े समझौते का रूप ले पाती है या यह केवल एक तात्कालिक कूटनीतिक पैंतरा है।

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