US strike Venezuela: बस ड्राइवर से राष्ट्रपति और फिर ‘मोस्ट वांटेड’, मादुरो-अमेरिका दुश्मनी की पूरी कहानी

क्या आपने कभी सोचा है कि एक देश के राष्ट्रपति पर कोई दूसरा देश 450 करोड़ (25 मिलियन डॉलर) का इनाम क्यों रखेगा? निकोलस मादुरो को अमेरिका ने केवल तानाशाह नहीं, बल्कि 'नार्को-टेररिस्ट' घोषित कर दिया था। आखिर कैसे तेल के सबसे बड़े खजाने ने मादुरो को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बना दिया? पढ़िए यह अनकही रिपोर्ट।

US strike Venezuela

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 3, 2026

US strike Venezuela: कैरिबियन सागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया है और उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। वाशिंगटन और काराकास के बीच वर्षों से जारी गतिरोध अब अपने चरम पर पहुँच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो का हश्र भी पनामा के पूर्व तानाशाह मैनुअल नोरिएगा जैसा हो सकता है, जिन्हें अमेरिका ने इसी तरह पकड़कर सजा सुनाई थी। आइए जानते हैं कि एक बस ड्राइवर से राष्ट्रपति बने मादुरो आखिर अमेरिका की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में कैसे शामिल हुए।

US strike Venezuela : सत्ता का संघर्ष: कैसे शुरू हुई अमेरिका से दुश्मनी?

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के दस्तावेजों के अनुसार, मादुरो और अमेरिका के बीच विवाद की जड़ें 2013 में छिपी हैं। ह्यूगो चावेज की मृत्यु के बाद मादुरो सत्ता में आए, लेकिन 2018 के चुनावों ने इस विवाद को हवा दी। अमेरिका और 50 से अधिक देशों का आरोप है कि मादुरो ने चुनाव में धांधली कर अवैध रूप से सत्ता पर कब्जा किया। 2019 में वेनेजुएला की नेशनल असेंबली ने भी उन्हें ‘नाजायज’ राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। 2024 के हालिया चुनावों में भी मादुरो ने खुद को विजयी बताया, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने खारिज कर दिया।

US strike Venezuela: ‘कार्टेल ऑफ द सन्स’ और नार्को-टेररिज्म के गंभीर आरोप

अमेरिका के लिए मादुरो केवल एक राजनीतिक विरोधी नहीं, बल्कि एक ‘नार्को-टेररिस्ट’ (मादक पदार्थ आतंकवादी) बन गए। उन पर आरोप है कि उन्होंने ‘कार्टेल ऑफ द सन्स’ नामक एक ड्रग तस्करी संगठन का नेतृत्व किया। यह गिरोह वेनेजुएला के भ्रष्ट सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर बना था। अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि मादुरो ने कोलंबिया के आतंकी संगठन FARC के साथ मिलकर एक हिंसक नार्को-टेररिज्म साजिश रची, जिसका उद्देश्य अमेरिका की सड़कों को नशीले पदार्थों से भरना था।

कोकीन की तस्करी और अवैध हथियारों की डील

अमेरिकी जांच के अनुसार, मादुरो ने FARC द्वारा निर्मित कई टन कोकीन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के सौदे तय किए। इसके बदले में ‘कार्टेल ऑफ द सन्स’ के जरिए आतंकियों को घातक हथियार मुहैया कराए गए। आरोप है कि उन्होंने होंडुरास और अन्य पड़ोसी देशों के तस्करों के साथ मिलकर ड्रग्स के रास्ते आसान बनाए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी निजी सशस्त्र सेना को ट्रेनिंग दिलाने के लिए आतंकी समूहों की मदद भी ली, जिससे वेनेजुएला एक ‘नार्को-स्टेट’ में तब्दील हो गया।

125 करोड़ से 450 करोड़ तक: इनाम की कहानी

मार्च 2020 में न्यूयॉर्क की एक अदालत ने मादुरो के खिलाफ नार्को-टेररिज्म और हथियार रखने के गंभीर आरोप तय किए। शुरुआत में उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले के लिए 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) का इनाम रखा गया था। लेकिन जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, इनाम की राशि भी बढ़ती गई। 10 जनवरी, 2025 को इसे बढ़ाकर 25 मिलियन डॉलर किया गया और फिर 7 अगस्त, 2025 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसे 50 मिलियन डॉलर कर दिया। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 450 करोड़ रुपये है, जो किसी भी राष्ट्र प्रमुख पर अब तक के सबसे बड़े ईनामों में से एक है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और मुकदमे की तैयारी

अब जब मादुरो अमेरिकी गिरफ्त में हैं, तो वाशिंगटन में उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की तैयारी तेज हो गई है। यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों पर एक नई बहस छेड़ सकती है। अमेरिका का तर्क है कि ड्रग तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में यह कदम अनिवार्य था। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वेनेजुएला की सेना इस पर कोई प्रतिक्रिया देती है या फिर वहां सत्ता का पूरी तरह से तख्तापलट हो जाएगा।

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