US Italy Trade Deal: यूरोप को बड़ी राहत,ट्रंप ने वापस लिए व्यापारिक टैरिफ, इटली की पीएम मेलोनी ने जताया आभार

ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक: क्या मेलोनी ने बचा लिया यूरोप को सबसे बड़े आर्थिक संकट से? दावोस में नाटकीय मोड़ पर ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले 25% टैरिफ को टाल दिया है। इटली की पीएम मेलोनी ने इसे संवाद की जीत बताया है। क्या यह 'ग्रीनलैंड डील' का हिस्सा है या ट्रंप ने कोई नई चाल चली है?

US Italy Trade Deal

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 22, 2026

US Italy Trade Deal: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के मंच से एक बड़ी वैश्विक खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन विवादास्पद टैरिफ को रद्द करने की घोषणा की है, जिन्हें वे फ्रांस, जर्मनी और डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों पर लगाने की योजना बना रहे थे। ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों और राजनीतिक गलियारों में छाई अनिश्चितता को खत्म कर दिया है। यूरोपीय नेताओं ने इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है, क्योंकि इससे अमेरिका और यूरोप के बीच एक संभावित व्यापारिक युद्ध (Trade War) टल गया है।

जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया: “संवाद ही एकमात्र रास्ता”

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप के इस फैसले पर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक संदेश में कहा, “मैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ को वापस लेने के साहसिक निर्णय का स्वागत करती हूं।” मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि इटली हमेशा से यह मानता रहा है कि मित्र और सहयोगी देशों के बीच किसी भी विवाद का समाधान केवल सार्थक संवाद और आपसी बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए, न कि प्रतिबंधों के माध्यम से।

ग्रीनलैंड विवाद और 10% टैरिफ का गणित

हाल के दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाने की धमकी देकर नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच खलबली मचा दी थी। ट्रंप की इस नाराजगी का मुख्य कारण ग्रीनलैंड का मुद्दा था। ट्रंप का मानना था कि यूरोपीय देश ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की चिंताओं और प्रस्तावों पर गंभीरता से बात नहीं कर रहे हैं। इन टैरिफ को एक ‘दबाव तंत्र’ के रूप में देखा जा रहा था, ताकि यूरोप को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। 1 फरवरी की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही थी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके नकारात्मक प्रभाव का डर बढ़ता जा रहा था।

नाटो महासचिव मार्क रुट्टे की मध्यस्थता ने पलटी बाजी

इस पूरे विवाद को सुलझाने में नाटो के नए महासचिव मार्क रुट्टे ने एक महत्वपूर्ण ‘पीसमेकर’ की भूमिका निभाई। दावोस में ट्रंप और रुट्टे के बीच हुई गहन चर्चा के बाद बर्फ पिघलती नजर आई। रुट्टे ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रणनीतिक रुख और उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताएं तर्कसंगत हैं। नाटो प्रमुख के इस समर्थन से ट्रंप संतुष्ट नजर आए। उन्होंने न केवल रुट्टे की प्रशंसा की, बल्कि यह भी माना कि अब बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसके चलते टैरिफ लगाने की अब कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।

इटली का रुख: कूटनीति पर अटूट विश्वास

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुरू से ही इस संकट को टालने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी। अपनी हालिया जापान यात्रा के दौरान भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि ग्रीनलैंड जैसे संवेदनशील मुद्दे को केवल आपसी विश्वास और कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। मेलोनी का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अमेरिका और यूरोप का एकजुट रहना अनिवार्य है। टैरिफ हटने से अब नाटो सहयोगियों के बीच दरार भरने की उम्मीद जगी है।

वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए नई शुरुआत

ट्रंप के इस फैसले को उनकी “सौदा करने की कला” (Art of the Deal) के एक और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। दबाव बनाकर सहयोगियों को अपनी बात मनवाना और फिर नरमी दिखाना ट्रंप की चिरपरिचित शैली रही है। फिलहाल, यूरोप के लिए यह एक बड़ी जीत है और इटली जैसे प्रमुख देशों के लिए अमेरिका के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और ग्रीनलैंड को लेकर भविष्य में होने वाले समझौते क्या मोड़ लेते हैं।

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