US-Iran War: यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान की मुख्य मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर लगातार ऑपरेशन किए हैं। CENTCOM के मुताबिक, इन ऑपरेशनों में IRGC के कमांड और कंट्रोल सेंटर, ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों, साथ ही मिलिट्री एयरफील्ड को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।
CENTCOM ने कहा कि F/A-18 के कई स्क्वाड्रन लगातार उड़ान भरकर ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं। U.S. B-1 बॉम्बर्स ने ईरान के भीतर बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को कम करने के लिए हवाई हमले किए। यह बढ़ा हुआ फायरपावर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव के बीच हुआ है।
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ईरान का जवाब: बहरीन में हमला
अल जज़ीरा के अनुसार, ईरान ने बहरीन में अमेरिकी एयर बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले का दावा किया है। IRGC ने कहा कि मंगलवार सुबह 20 ड्रोन और 3 मिसाइलों से शेख ईसा एयर बेस की मेन कमांड बिल्डिंग और फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का जवाब देना था।यूनाइटेड नेशंस में ईरान के एम्बेसडर आमिर सईद इरावानी ने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका और इज़राइल की तरफ से हमले जारी रहेंगे, ईरान पूरी तरह से अपने आप को बचाने के लिए सक्रिय रहेगा।
लेबनान में स्थिति और इज़राइल का हमला

इस संघर्ष का असर लेबनान तक भी फैला है। इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह की इंटेलिजेंस ब्रांच के प्रमुख पर हमला किया। IDF के अनुसार, मकलेड रात भर चले हमले में मारा गया। इज़राइली एयर फ़ोर्स ने लेबनान से आए दो बिना पायलट वाले एरियल व्हीकल को भी इंटरसेप्ट किया। यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का हिस्सा है।
अमेरिकी अधिकारी बयान
US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों और नेवी क्षमताओं से उत्पन्न खतरे को खत्म करना है। उन्होंने बताया कि अमेरिका द्वारा किए जाने वाले सबसे कड़े हमले अभी बाकी हैं। उनका कहना है कि अगला ऑपरेशन ईरान के लिए और अधिक सज़ा देने वाला होगा। रुबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी मिशन का मुख्य फोकस ईरान की मिसाइल और नेवी क्षमताओं को बेअसर करना है, ताकि वैश्विक शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सकें।
गल्फ़ क्षेत्र में बढ़ता तनाव
हालांकि यह संघर्ष फिलहाल अमेरिका, ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं है। गल्फ़ देशों के इसमें शामिल होने से लड़ाई का दायरा बढ़ सकता है। अमेरिकी और ईरानी ऑपरेशन के बीच बढ़ती कार्रवाई से पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।










