US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच द्विपक्षीय समझौते (Deal) को लेकर दुनिया भर में सस्पेंस गहरा गया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान को सोशल मीडिया पर खुली धमकी दे दी है। ट्रंप ने अपने आधिकारिक अकाउंट से एक AI-जेनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित) तस्वीर साझा की है, जिसमें एक अत्याधुनिक फाइटर जेट के नीचे विनाशकारी बम लगा हुआ दिखाई दे रहा है। इस तस्वीर के ऊपर एक कड़ा संदेश भी लिखा है: ‘इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद’ (Thank you for your attention to this matter)।
ट्रंप की यह सैन्य धमकी भरी पोस्ट ऐसे संवेदनशील समय में आई है, जब दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे समझौते को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है।
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“मार्को रुबियो ने दिल्ली में दिया था गुड न्यूज का संकेत, पर ट्रंप अड़े”
इस पोस्ट से कुछ ही समय पहले, भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए संकेत दिया था कि किसी भी वक्त अमेरिका और ईरान के बीच से ‘गुड न्यूज’ (अच्छी खबर) सुनने को मिल सकती है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति की इस ताजा और आक्रामक पोस्ट के बाद अब तक होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) को फिर से व्यापार के लिए खोलने या दोनों देशों के बीच आधिकारिक रूप से किसी समझौते की घोषणा नहीं हो सकी है।
“मैं ओबामा की तरह कोई ‘बुरी डील’ नहीं करता” — ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर आलोचकों को आड़े हाथों लेते हुए साफ किया कि वे किसी भी दबाव में कोई कमजोर समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप ने लिखा, “अगर मैं ईरान के साथ कोई समझौता करता हूँ, तो वह अमेरिका के हित में और बिल्कुल उचित होगा। यह बराक ओबामा के दौर में हुए उस पुराने समझौते जैसा कतई नहीं होगा, जिसने ईरान को भारी मात्रा में नकद राशि सौंप दी थी और उसके लिए परमाणु हथियार बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। हमारा नया समझौता इसके बिल्कुल विपरीत है, लेकिन अभी इसे किसी ने देखा नहीं है और न ही कोई जानता है कि यह क्या है, क्योंकि इस पर अभी पूरी बातचीत खत्म नहीं हुई है।”
ट्रंप ने आगे आक्रामक लहजे में कहा कि लोगों को उन ‘हारे हुए’ विश्लेषकों की बात नहीं सुननी चाहिए जो बिना सच जाने इस संभावित डील की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों ने सालों तक इस समस्या को लटकाए रखा, लेकिन वे कभी भी कोई ‘बैड डील’ (बुरा समझौता) साइन नहीं करते।
डील पर सस्पेंस बरकरार
रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा था कि अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच समझौते को लेकर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और सिर्फ अंतिम रूप देना बाकी है। हालांकि, सोमवार सुबह उनके सुरों में थोड़ी नरमी और सस्पेंस देखा गया, जब उन्होंने कहा कि समझौता अभी पूरी तरह से ‘तय’ (Fix) नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, ईरानी अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है।
आखिर किन मुद्दों पर आकर अटक गई है अमेरिका-ईरान डील?
ईरान की सरकारी मीडिया ‘तसनीम न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते के तहत मध्य पूर्व (Middle East) में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने का एक पूरा रोडमैप शामिल था। शुरुआती चर्चा में अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाने (वेवर देने) के लिए भी राजी हो गया था।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ‘अल जजीरा’ के सूत्रों के मुताबिक, डील के बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंचने के बाद अब अमेरिका दो मुख्य मुद्दों पर पीछे हटता हुआ दिखाई दे रहा है:
ईरानी फंड को डीफ्रीज करना: विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को जारी करने की समयसीमा और प्रक्रिया।
लेबनान में सीजफायर (युद्धविराम): लेबनान और इजरायल के मोर्चे पर सीजफायर की शर्तें।
इसके अलावा, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित खोलना और ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी विवाद के सबसे मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जिसकी वजह से डील पर सस्पेंस बना हुआ है।
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