US Iran Tensions: ईरान ने अमेरिका की शर्तें ठुकराईं, डील पर अटका मामला

US Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली एक अहम कूटनीतिक बैठक, जो स्विट्जरलैंड के बुरगेनस्टॉक में प्रस्तावित थी, फिलहाल टल गई है। यह उच्च स्तरीय वार्ता 19 जून को होनी थी, लेकिन अचानक इसे स्थगित कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव, खासकर लेबनान में सीजफायर से जुड़ी परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण ईरान ने इस बैठक से दूरी बना ली। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे डील साइन होने की प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। Rahul Gandhi Birthday: CM

ईरान ने अमेरिका की शर्तें ठुकराईं

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 19, 2026

US Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली एक अहम कूटनीतिक बैठक, जो स्विट्जरलैंड के बुरगेनस्टॉक में प्रस्तावित थी, फिलहाल टल गई है। यह उच्च स्तरीय वार्ता 19 जून को होनी थी, लेकिन अचानक इसे स्थगित कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव, खासकर लेबनान में सीजफायर से जुड़ी परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण ईरान ने इस बैठक से दूरी बना ली। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे डील साइन होने की प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान—“60 दिन का इंतजार”

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है। अपने हालिया बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने किसी मजबूरी में बातचीत नहीं की, बल्कि यह पहल ईरान की ओर से आई थी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का “खेल लगभग खत्म हो चुका है” और अब अमेरिका उनकी स्थिति को देखते हुए केवल 60 दिनों तक इंतजार करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या फंडिंग नहीं दी जाएगी। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है और कूटनीतिक हलकों में इसे एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान की सैन्य स्थिति पर ट्रंप के दावे

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि हालिया संघर्षों और दबाव की वजह से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है। उनके अनुसार ईरान के पास अब पहले जैसी ताकत नहीं बची है, जैसे एयरफोर्स, नेवी, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार क्षमता। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए। इसके बावजूद, उन्होंने यह दावा दोहराया कि विपक्षी डेमोक्रेट्स द्वारा ईरान की स्थिति को बेहतर बताना गलत है और वास्तविकता इससे अलग है।

स्विट्जरलैंड बैठक रद्द होने के पीछे कारण

19 जून को होने वाली यह महत्वपूर्ण बैठक स्विट्जरलैंड के बुरगेनस्टॉक में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे अचानक रद्द कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, लेबनान में बढ़ते तनाव और सीजफायर को लेकर अनिश्चित हालात ने इस वार्ता को प्रभावित किया। ईरान की ओर से भी इस बैठक में शामिल न होने का निर्णय लिया गया, जिससे साफ है कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।

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ईरान का जवाब और सख्त रुख

ईरान की ओर से भी कड़ा संदेश सामने आया है। ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका किसी भी प्रकार की अनुचित या एकतरफा शर्तें रखता है, तो उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। ईरान का कहना है कि वह किसी भी समझौते में अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। यही कारण है कि मौजूदा डील को लेकर ईरान बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।