US Iran Deal: अमेरिका के साथ हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस समझौते के बाद ईरान ने तुर्की, इराक और मिस्र जैसे देशों से संपर्क साधा है और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की है। इस बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने रखी गई अपनी प्रमुख शर्तों की जानकारी भी साझा की है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ाना है।
US Iran Peace Deal: पीएम मोदी ने किया अमेरिका-ईरान शांति डील का स्वागत, बोले- ऐतिहासिक कदम
ईरान की प्रमुख शर्तें और क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत में कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग यह है कि लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोका जाए। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए बनाए गए किसी भी फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने की जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। ईरान का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ समझौतों का पालन करें। अराघची ने अपने टेलीग्राम संदेश में तुर्की, इराक और मिस्र का धन्यवाद करते हुए कहा कि इन देशों ने समझौते को आगे बढ़ाने में सहयोगात्मक भूमिका निभाई है।
भारत ने भी समझौते का किया स्वागत
इस घटनाक्रम पर भारत ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच बने समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता और मानव जीवन को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद करेगा।
वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों पर प्रभाव की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि यदि इस समझौते को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखेंगे और शेष विवादित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करते हुए एक व्यापक और स्थायी समझौते तक पहुंचेंगे।
नेतन्याहू और ट्रंप की संभावित मुलाकात की चर्चा
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर चर्चा के लिए सक्रिय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस समझौते के प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके असर पर चर्चा की जा सके। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि नेतन्याहू G7 समिट के बाद ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं। इस संभावित बैठक को पश्चिम एशिया की राजनीतिक दिशा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के बाद क्षेत्रीय देशों की सक्रियता बढ़ गई है। कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं और सभी पक्षों के सहयोग से ही स्थिति स्थिर हो सकती है।










