US-Iran War: अमेरिका-ईरान सीजफायर पर कांग्रेस का तीखा हमला! जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कूटनीति को घेरा

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 15 दिवसीय सीजफायर पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समझौते में पाकिस्तान की भूमिका भारत की कूटनीतिक हार है। वहीं, प्रियंका गांधी ने पश्चिमी देशों की 'दोहरी नैतिकता' की आलोचना करते हुए ईरानी जनता के साहस को सलाम किया है।

US-Iran War

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 8, 2026

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम (सीजफायर) के समझौते ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अपनी पहली और कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए भारत की कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मोदी सरकार की इजरायल नीति की आलोचना

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के इस युद्धविराम का दुनिया सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी। हालांकि, उन्होंने इस संघर्ष की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला। रमेश के अनुसार, यह तनाव तब शुरू हुआ था जब ईरान के शीर्ष नेताओं की लक्षित हत्याएं की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये घटनाएं पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के ठीक दो दिन बाद हुईं, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। कांग्रेस सांसद ने कहा कि गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई और वेस्ट बैंक में विस्तारवादी नीतियों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी चिंताजनक है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और भारत की विदेश नीति पर कूटनीतिक प्रहार

कांग्रेस ने युद्धविराम में पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए मोदी सरकार की ‘व्यक्तिगत कूटनीति’ को विफल बताया। जयराम रमेश ने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देने के कारण पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की नीति सफल नहीं हुई है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार विश्व को यह समझाने में नाकाम रही है कि पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है। पाकिस्तान का इस समझौते में दलाल के बजाय मध्यस्थ के रूप में उभरना मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर का रहस्य और ‘विश्वगुरु’ की छवि पर तीखे सवाल

सांसद जयराम रमेश ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि 10 मई 2025 को इस ऑपरेशन को अचानक क्यों रोक दिया गया? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस ऑपरेशन का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार ले रहे हैं, उस पर भारत सरकार की चुप्पी रहस्यमयी है। रमेश ने ‘विश्वगुरु’ के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विदेश मंत्री ने जिस पाकिस्तान को खारिज कर दिया था, वह आज समझौते की मेज पर है, जिससे सरकार के ’56 इंच के सीने’ और वैश्विक रुतबे पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रियंका गांधी द्वारा पश्चिमी शक्तियों पर कटाक्ष

इसी मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से ईरानी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और पुरुषों के साहस की सराहना की। प्रियंका ने ‘एक्स’ पर लिखा कि ईरानी जनता ने अपने संसाधनों की रक्षा के लिए जो मानव श्रृंखला बनाई, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी नैतिकता का नकाब अब उतर चुका है। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि हिंसा और अन्याय के खिलाफ हमेशा साहस की जीत होती है, और दुनिया देख रही है कि कैसे पश्चिमी ताकतों ने एक प्राचीन सभ्यता को कमतर आंकने की कोशिश की।