
UP News: उत्तर प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का जोर इस बात पर है कि दिव्यांगता किसी बच्चे की पढ़ाई और आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट न बने। इसी सोच के साथ प्रदेश में विशेष विद्यालय चलाए जा रहे हैं, जहां बच्चों की जरूरत और उनकी क्षमता को ध्यान में रखकर पढ़ाई के साथ जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन स्कूलों के जरिए दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
यूपी के 21 विशेष विद्यालयों में 1464 दिव्यांग बच्चे कर रहे पढ़ाई
प्रदेश में इस समय दिव्यांगजन के लिए कुल 21 विशेष विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 1464 छात्र-छात्राएं शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों को सामान्य स्कूलों की तरह एक ही तरीके से पढ़ाने के बजाय उनकी दिव्यांगता और जरूरत के हिसाब से शिक्षण व्यवस्था तैयार की गई है। इसका मकसद बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए जरूरी कौशल भी सिखाना है।

सरकार का मानना है कि हर बच्चे में कोई न कोई खास क्षमता होती है। जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और सही माहौल देने की है। इसी उद्देश्य से विशेष विद्यालयों में पढ़ाई, प्रशिक्षण और दूसरी शैक्षिक सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
प्रयास, संकेत, ममता और स्पर्श स्कूलों में मिल रही खास शिक्षा
दिव्यांग बच्चों की अलग-अलग जरूरतों को देखते हुए प्रदेश में चार तरह के विशेष विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें शारीरिक रूप से दिव्यांग बालकों के लिए राजकीय विद्यालय ‘प्रयास’ चलाया जा रहा है। वहीं, मूक-बधिर बच्चों की पढ़ाई के लिए राजकीय विद्यालय ‘संकेत’ की व्यवस्था है।
इसी तरह मानसिक रूप से दिव्यांग बालक-बालिकाओं के लिए राजकीय विद्यालय ‘ममता’ और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए राजकीय विद्यालय ‘स्पर्श’ संचालित किया जा रहा है। इन सभी विद्यालयों में बच्चों की जरूरत और उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार पढ़ाई कराई जाती है। इसके साथ ही उन्हें जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि वे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन सकें।
21 में से 16 विशेष विद्यालयों को मिला आईएसओ प्रमाणन

दिव्यांग बच्चों के लिए चलाए जा रहे इन स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग के 21 विशेष विद्यालयों में से 16 को आईएसओ प्रमाणन मिल चुका है। यह प्रमाणन इन स्कूलों की शिक्षण और प्रशिक्षण व्यवस्था के साथ बेहतर कैंपस प्रबंधन प्रणाली के लिए मिला है। इन विद्यालयों में बच्चों को उनकी कक्षा और शैक्षिक स्तर के हिसाब से पढ़ाया जा रहा है। कुछ स्कूलों में उच्च प्राथमिक स्तर तक, जबकि कुछ में माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा की व्यवस्था है। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल रहा है।
स्मार्ट क्लासेज से आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे दिव्यांग विद्यार्थी
समय के साथ पढ़ाई के तरीकों में भी बदलाव हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेष विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज की सुविधा शुरू की गई है। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को आधुनिक तकनीक के जरिए पढ़ाई से जोड़ना है। स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से बच्चों को सीखने के नए तरीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि दिव्यांग विद्यार्थी भी आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का लाभ उठा सकें। विशेष शिक्षण व्यवस्था, बेहतर कैंपस प्रबंधन और तकनीक के इस्तेमाल से उनके लिए पढ़ाई का माहौल आसान और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर देने पर जोर
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशक राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, प्रदेश सरकार दिव्यांग बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 21 विशेष विद्यालयों में 1464 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की दिव्यांगता और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रयास, संकेत, ममता और स्पर्श विद्यालयों में अलग-अलग तरह की शिक्षण व्यवस्था की गई है। स्मार्ट क्लासेज के जरिए उन्हें आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।
कुल मिलाकर, प्रदेश सरकार की इन पहलों का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को सिर्फ किताबी शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करना है।











