UP Weather: अप्रैल में भीषण आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और जालौन सहित कई जिलों में शनिवार शाम अचानक आए भीषण आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। कई जगह सड़कों पर जलभराव हो गया और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम का यह सिलसिला अभी 6 अप्रैल तक जारी रह सकता है।

UP Weather

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 4, 2026

UP Weather: उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में शनिवार शाम अचानक से प्रकृति ने अपना मिजाज बदल लिया। राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव और रायबरेली सहित अन्य कई इलाकों में शाम करीब पांच बजे के आसपास भयंकर अंधड़ और तूफान ने दस्तक दी। आसमान में अचानक घना अंधेरा छा गया और देखते ही देखते तेज बरसात के साथ ओले गिरने शुरू हो गए। इस भीषण जलवृष्टि के चलते सड़कों पर भारी जलभराव हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की रफ्तार थम गई। चिलचिलाती धूप वाले अप्रैल के महीने में इस तरह का अप्रत्याशित मौसमी बदलाव वाकई बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला है।

कानपुर में आंधी-तूफान का कहर

कानपुर में शनिवार शाम को अचानक कुदरत ने ऐसा खतरनाक रुख अख्तियार किया कि पूरा शहर पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गया। शहर में शाम करीब पांच बजे ऐसा भयंकर बवंडर आया कि लोगों के आशियानों के खिड़की-दरवाजे तक उखड़ गए। इसके साथ ही झमाझम बारिश और ओलों की बौछार ने शहर को तरबतर कर दिया। मौसम के जानकारों के मुताबिक, प्री-मानसून सीजन में अक्सर इस तरह की आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिलती है। कानपुर की सड़कों पर वायुवेग का आलम यह था कि दुपहिया और चौपहिया वाहन चालकों को अपनी गाड़ियां बीच रास्ते में ही रोकनी पड़ीं, क्योंकि उस तूफानी वेग में ड्राइविंग करना जान जोखिम में डालने जैसा था।

दिन में ही छा गया रात जैसा अंधेरा

गौरतलब है कि कानपुर शहर में शनिवार दोपहर तक तीखी धूप और गर्मी का प्रकोप बना हुआ था। चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए शहरवासी एसी, पंखे और कूलरों का सहारा ले रहे थे। लेकिन शाम करीब पांच बजते ही एकाएक फिजा बदलने लगी। शुरुआत में लगा कि केवल धूल भरी मामूली आंधी आएगी, लेकिन देखते ही देखते समूचे शहर में गहरा अंधकार छा गया। आलम यह था कि शाम पांच बजे ही रात के सात बजे जैसा नजारा दिखने लगा। इसके तुरंत बाद मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और बर्फीली हवाएं चलने लगीं। इन विनाशकारी हवाओं ने जल्द ही एक बड़े तूफान का रूप ले लिया, जिससे घरों की कुंडियां और खिड़कियों के कांच चकनाचूर हो गए।

क्लाइमेट एक्सपर्ट्स की चेतावनी

थोड़ी ही देर बाद अंधड़ के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने शुरू हो गए। गनीमत यह थी कि बारिश की तीव्रता थोड़ी कम थी, लेकिन हवाएं अपने चरम रौद्र रूप में थीं। टिनशेड और छतों पर ओले गिरने की गड़गड़ाहट हर तरफ गूंज रही थी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सुनील पांडे ने जानकारी दी कि प्री-मानसून गतिविधियों के कारण शाम के वक्त तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और ओलावृष्टि होती है। उन्होंने बताया कि इस अल्पकाल में शहर में 3.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि हवा की गति 37.3 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि छह अप्रैल तक प्रदेश के कई हिस्सों में ऐसे ही हालात बने रह सकते हैं।

किसानों पर टूटा आफत का पहाड़

दूसरी ओर, जालौन जनपद में भी कुदरत के इस बदले मिजाज ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। माधौगढ़ क्षेत्र में दोपहर के बाद बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि हुई, जिससे खेतों में लहलहा रही और कटकर रखी गई फसलों को अपूरणीय क्षति पहुंची है। करीब एक घंटे तक चली इस तबाही ने पूरे ग्रामीण अंचल को अपनी चपेट में ले लिया। भारी बरसात और ओलों की मार से गेहूं, चना और सरसों की पकी फसलें खेतों में ही धराशायी हो गईं। लाचार किसानों का कहना है कि यह उनकी कटाई का समय था और इस आसमानी आफत ने उनकी साल भर की खून-पसीने की मेहनत पर पानी फेर दिया है।