UP News: यूपी में कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों की चमकी किस्मत! हाईकोर्ट के आदेश पर जारी हुए नए निर्देश

यूपी के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के लिए राहत की खबर है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पांच साल की सेवा पूरी करने और वास्तव में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभाने वाले पात्र याचिकाकर्ता शिक्षकों को हेडमास्टर के पद का वेतन मिल सकेगा।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 15, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब ऐसे शिक्षक, जो प्रधानाध्यापक का काम संभाल रहे हैं, उन्हें तय शर्तें पूरी करने पर हेडमास्टर के पद का वेतन मिल सकेगा। इसके लिए शिक्षक के पास कम से कम पांच साल की सेवा होनी चाहिए और वह वास्तव में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभा रहा हो। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन पर बेसिक शिक्षा विभाग का नया आदेश

अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को नए निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है। अधिकारियों को यह जांच करनी होगी कि संबंधित याचिकाकर्ता शिक्षक ने पांच साल की सेवा पूरी की है या नहीं और वह स्कूल में वास्तव में प्रधानाध्यापक का काम कर रहा है या नहीं।

कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतन पर बेसिक शिक्षा विभाग का नया आदेश

विभाग ने साफ किया है कि दोनों शर्तें पूरी होने पर ही शिक्षक को प्रधानाध्यापक के पद का वेतन दिया जाएगा। यानी केवल कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का पद संभालने से अपने आप अधिक वेतन का लाभ नहीं मिलेगा। बीएसए को संबंधित शिक्षकों के रिकॉर्ड और उनकी जिम्मेदारियों की जांच करके फैसला लेना होगा।

स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के पद खाली

प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में वर्ष 2016 के बाद से पदोन्नति नहीं होने के कारण प्रधानाध्यापकों के कई पद खाली चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों में व्यवस्था संभालने के लिए वरिष्ठ सहायक अध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी दी गई है। इन शिक्षकों का कहना था कि जब वे प्रधानाध्यापक का काम कर रहे हैं, तो उन्हें उसी पद के हिसाब से वेतन भी मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने उनकी मांग पर राहत देते हुए तय शर्तों के आधार पर प्रधानाध्यापक के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

मई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया था वेतन भुगतान का आदेश

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2025 में अहम आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभाल रहे ऐसे सहायक अध्यापक, जिनके पास कम से कम पांच साल का अनुभव है और जो वास्तव में हेडमास्टर का काम कर रहे हैं, वे उस पद के वेतन के हकदार हैं।

मई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया था वेतन भुगतान का आदेश

कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद को पात्र शिक्षकों को प्रधानाध्यापक के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया था। हालांकि, बकाया एरियर को लेकर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि भुगतान याचिका दाखिल करने की तारीख से पहले के तीन साल तक की अवधि के लिए किया जाएगा।

वरिष्ठ सहायक अध्यापकों को ही सौंपी जाएगी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि स्कूलों में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी वरिष्ठ सहायक अध्यापकों को ही सौंपी जानी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल का प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी अनुभवी शिक्षकों को मिले। अब संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत जिला स्तर पर पात्र शिक्षकों की जांच की जाएगी। जिन याचिकाकर्ता शिक्षकों की पांच साल की सेवा और प्रधानाध्यापक के रूप में काम करने की स्थिति की पुष्टि हो जाएगी, उन्हें आदेश के मुताबिक वेतन का लाभ मिल सकेगा।

किन शिक्षकों को मिलेगा हेडमास्टर के वेतन का लाभ?

इस आदेश का लाभ उन्हीं याचिकाकर्ता शिक्षकों को मिलेगा, जो निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं। इसके लिए पांच साल की सेवा और प्रधानाध्यापक की वास्तविक जिम्मेदारी संभालना जरूरी है। ऐसे में संबंधित शिक्षकों को अपने सेवा रिकॉर्ड और प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने से जुड़े दस्तावेजों की जांच करानी होगी।

बेसिक शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के बाद पात्र शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन का लाभ देने से पहले बीएसए की जांच और पात्रता की पुष्टि जरूरी होगी।