UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी का बड़ा वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश ने ताइपे में 2 से 4 सितंबर तक आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में अपनी निवेश संभावनाओं को दुनिया की प्रमुख ताइवानी टेक कंपनियों के सामने रखा। राज्य सरकार ने कंपनियों को सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
ताइवानी कंपनियों के सामने यूपी की निवेश क्षमता
बताते चले कि, उत्तर प्रदेश निवेश मॉडल की प्रमुख खूबियों को ताइवानी कंपनियों के सामने विस्तार से प्रस्तुत किया गया। सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियां, तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम राज्य की बड़ी ताकत के तौर पर सामने रखे गए। उत्तर प्रदेश ने खासतौर पर चिप निर्माण, सेंसर टेक्नोलॉजी, डाटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण में रणनीतिक साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया। सरकार का प्रयास है कि वैश्विक कंपनियां उत्तर प्रदेश को अपने निवेश और उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखें।
सेमीकॉन 2026 में प्रमुख ताइवानी कंपनियों से बातचीत
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी आलोक कुमार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया-ताइवान सेमीकंडक्टर फोरम में हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीना भी शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने क्रिएटिव सेंसर्स इंक के चेयरमैन यूजीन हुआंग और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान भारत में कंपनी के विस्तार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश में संभावित निवेश को लेकर चर्चा हुई। इसके अलावा मीडियाटेक, एडीएटीए टेक्नोलॉजी और टीआईबीए बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ भी निवेश, संयुक्त उपक्रम और लंबे समय की साझेदारी की संभावनाओं पर बातचीत की गई।
सेमीकंडक्टर हब बनाने पर यूपी का फोकस
आलोक कुमार ने ताइवानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने राज्य के औद्योगिक बुनियादी ढांचे, निवेश प्रोत्साहन नीतियों, कुशल कार्यबल और मजबूत टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को निवेश के लिए अनुकूल बताया। ताइवानी निवेशकों के सामने सेंसर मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, टेस्टिंग और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर भी रखे गए। सरकार की कोशिश है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से राज्य में उत्पादन के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी क्षमताओं का भी विस्तार हो।
राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर योजनाओं के साथ यूपी की रणनीति
उत्तर प्रदेश सरकार अपनी सेमीकंडक्टर रणनीति को केंद्र की राष्ट्रीय योजनाओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ा रही है। राज्य की रणनीति को ISM 2.0, ECMS और MPMS जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 और उत्तर प्रदेश FDI नीति-2023 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इन्वेस्ट यूपी, यीडा और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग निवेशकों को औद्योगिक सुविधाओं, नीतिगत प्रोत्साहनों और आसान अनुमोदन प्रक्रियाओं के जरिए सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं।
NCR की नजदीकी सेमीकंडक्टर निवेश का बड़ा फायदा
ताइवानी कंपनियों के सामने उत्तर प्रदेश की NCR से नजदीकी, बड़ा लैंड बैंक, कुशल कार्यबल, मजबूत सप्लायर नेटवर्क और तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम भी प्रमुख निवेश लाभ के रूप में पेश किया गया। सरकार का लक्ष्य सिर्फ निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर और एडवांस टेक्नोलॉजी के प्रमुख राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश केंद्र के तौर पर स्थापित करना है। सेमिकॉन 2026 में हुई चर्चाओं को इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।










