UP News: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की साधारण बसों में दिव्यांग यात्रियों की निशुल्क यात्रा की प्रक्रिया अब डिजिटल होने जा रही है। निगम ने इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन यानी ETIM में ऐसी सुविधा शुरू की है, जिसके तहत परिचालक यात्री के UDID कार्ड पर मौजूद QR कोड स्कैन करेगा। सत्यापन पूरा होते ही पात्र यात्री के लिए शून्य मूल्य का टिकट जारी हो जाएगा। नई व्यवस्था 23 सितंबर से लागू होने की जानकारी सामने आई है।
UDID कार्ड से दिव्यांगता प्रतिशत की होगी डिजिटल जांच

बताते चले कि, नई व्यवस्था में QR कोड स्कैन होने के बाद ETIM पर यात्री की जरूरी जानकारी सामने आएगी। इसमें UDID नंबर, नाम, जन्मतिथि, दिव्यांगता का प्रकार और प्रमाणित दिव्यांगता प्रतिशत जैसी जानकारी शामिल होगी। इसके आधार पर मशीन यह तय करेगी कि यात्री केवल अपने लिए निशुल्क टिकट का पात्र है या उसके साथ यात्रा कर रहे सहायक को भी निशुल्क टिकट दिया जाना है।
40 प्रतिशत दिव्यांगता पर फ्री टिकट
उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत या उससे अधिक प्रमाणित दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्ति को परिवहन निगम की साधारण बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा पहले से उपलब्ध है। वहीं सरकारी योजना के उपलब्ध विवरण के अनुसार 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता अथवा बहुदिव्यांगता की स्थिति में पात्र सहायक को भी निशुल्क यात्रा का लाभ मिल सकता है। यह सुविधा एसी, स्लीपर और वीडियो बसों पर लागू नहीं होती।
बस में चढ़ते ही ऐसे बनेगा शून्य मूल्य का टिकट
यात्री के बस में सवार होने के बाद परिचालक सबसे पहले चढ़ने और उतरने वाले स्थान की जानकारी ETIM में दर्ज करेगा। इसके बाद ‘दिव्यांगजन’ विकल्प चुनकर UDID कार्ड का QR कोड स्कैन किया जाएगा। सत्यापन सफल होने पर मशीन पात्रता के अनुसार शून्य मूल्य का टिकट जारी करेगी। इससे टिकट बनाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित हो जाएगी।
दिव्यांग यात्री के साथ सहायक का टिकट भी डिजिटल तरीके से तय होगा

नई डिजिटल व्यवस्था में टिकटों की संख्या तय करने के लिए परिचालक को अलग से दिव्यांगता प्रतिशत की गणना करने की जरूरत नहीं होगी। मशीन कार्ड में दर्ज प्रमाणित जानकारी के आधार पर पात्रता निर्धारित करेगी। 40 प्रतिशत या उससे अधिक और 80 प्रतिशत से कम दिव्यांगता की पात्र श्रेणी में यात्री के लिए एक निशुल्क टिकट बनेगा। वहीं 80 प्रतिशत या उससे अधिक की पात्रता होने पर उसके साथ यात्रा करने वाले एक सहायक के लिए भी दूसरा शून्य मूल्य टिकट जारी किया जा सकेगा।
एक टिकट दिव्यांग यात्री का, दूसरा पात्र सहायक का
यह स्पष्ट है कि सहायक की सुविधा का मतलब दिव्यांग यात्री को दो टिकट मिलना नहीं है। एक शून्य मूल्य टिकट स्वयं पात्र दिव्यांग यात्री के लिए होगा और पात्रता की स्थिति में दूसरा टिकट उसके साथ यात्रा कर रहे सहायक के लिए जारी किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को ETIM में उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर पूरा किया जाएगा।
निशुल्क टिकट का वास्तविक किराया निगम के रिकॉर्ड में रहेगा

शून्य मूल्य का टिकट जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि यात्रा का आर्थिक मूल्य खत्म हो गया। यात्री से किराया नहीं लिया जाएगा, लेकिन यात्रा का वास्तविक किराया निगम के रिकॉर्ड और राजस्व गणना में दर्ज रहेगा। इससे परिवहन निगम को यह जानकारी मिल सकेगी कि कितने दिव्यांग यात्रियों ने निशुल्क यात्रा की और इन यात्राओं का वास्तविक किराया कितना रहा।
डिजिटल रिकॉर्ड से पता चलेगा किस रूट पर कितनी निशुल्क यात्रा हुई
नई व्यवस्था के तहत दिव्यांग यात्रियों के शून्य मूल्य टिकटों की रिपोर्ट डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध रहेगी। इससे निगम को बस, रूट और यात्रा से संबंधित आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी। भविष्य में इन आंकड़ों का इस्तेमाल दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाओं और सेवाओं की जरूरत को समझने में किया जा सकता है।
QR कोड स्कैन नहीं हुआ तो भी नहीं रुकेगी निशुल्क यात्रा
डिजिटल व्यवस्था में तकनीकी समस्या आने की स्थिति में भी पात्र दिव्यांग यात्री को निशुल्क यात्रा से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि UDID कार्ड का QR कोड क्षतिग्रस्त होने, मशीन में तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से स्कैन नहीं हो पाता है, तो पहले से लागू प्रक्रिया के तहत पात्रता की जांच करके निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा सकेगी। यानी QR स्कैन सुविधा सत्यापन का डिजिटल माध्यम है, अधिकार की एकमात्र शर्त नहीं।
साधारण बसों में मिलेगी सुविधा, AC और स्लीपर बसें बाहर
नई व्यवस्था को लेकर एक अहम बात यह है कि दिव्यांग यात्रियों की निशुल्क यात्रा की सुविधा साधारण बसों के लिए है। उपलब्ध सरकारी योजना विवरण के अनुसार वातानुकूलित, स्लीपर और वीडियो बसों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है। इसलिए नई डिजिटल टिकट व्यवस्था को यूपी रोडवेज की सभी बस श्रेणियों में मुफ्त यात्रा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
UDID कार्ड क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
UDID यानी Unique Disability ID केंद्र सरकार की राष्ट्रीय दिव्यांगता पहचान व्यवस्था का हिस्सा है। इसमें प्रमाणित दिव्यांगता से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज रहती है। इसी जानकारी को QR कोड के माध्यम से ETIM पर सत्यापित किया जा सकेगा। इससे परिचालक को अलग-अलग कागजी दस्तावेज देखकर दिव्यांगता प्रतिशत निर्धारित करने की जरूरत कम होगी और टिकट जारी करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।
डिजिटल सत्यापन से फर्जी दस्तावेज की संभावना कम करने की कोशिश
पहले निशुल्क यात्रा के लिए दस्तावेजों की मैनुअल जांच पर अधिक निर्भरता थी। UDID QR कोड स्कैनिंग के बाद प्रमाणित जानकारी सीधे मशीन पर उपलब्ध होने से सत्यापन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इससे गलत या फर्जी दस्तावेज के आधार पर सुविधा लेने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि डिजिटल प्रणाली की प्रभावशीलता डेटा की शुद्धता और तकनीकी व्यवस्था पर भी निर्भर करेगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

कुल मिलाकर यूपी रोडवेज की नई व्यवस्था निशुल्क यात्रा का नया अधिकार नहीं, बल्कि पहले से उपलब्ध सुविधा को डिजिटल बनाने की पहल है। अब पात्र दिव्यांग यात्री के UDID कार्ड का QR कोड स्कैन कर ETIM के जरिए शून्य मूल्य का टिकट जारी किया जा सकेगा। दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर सहायक की पात्रता भी मशीन से तय होगी। वहीं तकनीकी कारणों से QR स्कैन न होने पर पात्र यात्री की निशुल्क यात्रा का अधिकार प्रभावित नहीं होगा।










