Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के घोषित राज्यसभा उम्मीदवारों और उसके PDA सामाजिक समीकरण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनाव के दौरान पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के नाम पर समर्थन मांगती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में परिवारवाद और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता देती है।
मायावती ने सपा के PDA फॉर्मूले पर साधा निशाना
बताते चले कि, मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बसपा अपने उम्मीदवारों के चयन में परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ-साथ बड़े पूंजीपतियों को टिकट देने से बचती है। उनके मुताबिक पार्टी में लंबे समय से काम करने वाले और सर्वसमाज का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतारा जाता है।

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को चुनाव के दौरान PDA वर्गों के वोट की जरूरत होती है, लेकिन सांसद और विधायक बनाने की बारी आने पर परिवार तथा प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जाती है।
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों…
— Mayawati (@Mayawati) October 2, 2026
रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी की उम्मीदवारी पर मायावती का हमला
आपको बता दे कि, मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी का नाम लेते हुए अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने रामगोपाल यादव को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का करीबी रिश्तेदार बताया और धनराज नथवानी की उम्मीदवारी को बड़े कारोबारी समूह से जुड़े व्यक्ति के तौर पर पेश करते हुए सपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए।

सपा ने 30 सितंबर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। दोनों उम्मीदवारों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है।
PDA राजनीति और उम्मीदवार चयन पर मायावती ने उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनावी राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सपा का दावा और उम्मीदवार चयन के बीच अंतर दिखाई देता है। मायावती ने दलित, आदिवासी, अति-पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े लोगों का जिक्र करते हुए उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
मायावती के इस बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन और अपने-अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का एक अहम अवसर बन गया है।
यूपी की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बीच बढ़ी बयानबाजी
रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी को लेकर सपा के भीतर किसी आधिकारिक विवाद की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं धनराज नथवानी के नाम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कॉरपोरेट कार्यकारी और खेल प्रशासन से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। मायावती का ताजा हमला ऐसे समय आया है जब यूपी में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर भाजपा, सपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। 10 सीटों के चुनाव में संख्या बल के साथ-साथ क्रॉस वोटिंग और सामाजिक समीकरण भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा-BSP के बीच बढ़ सकती है सियासी तल्खी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी का यह नया दौर दोनों दलों की रणनीतियों को लेकर बहस को आगे बढ़ा सकता है। मायावती लगातार बसपा के स्वतंत्र राजनीतिक रास्ते और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर जोर देती रही हैं, जबकि सपा अपनी PDA रणनीति के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने की कोशिश करती रही है।

अब राज्यसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप किस दिशा में जाता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल मायावती के बयान के बाद सपा के राज्यसभा उम्मीदवार, PDA फॉर्मूला और उम्मीदवार चयन यूपी की सियासत में चर्चा के प्रमुख मुद्दे बन गए हैं।










