Rajya Sabha Election: 3 ब्राह्मण, 3 OBC और 2 SC, राज्यसभा चुनाव में BJP ने क्यों चला जातीय कार्ड?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है। सूची में ओबीसी, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति और राजपूत वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला है। वहीं सपा के दो उम्मीदवार पहले से मैदान में हैं और तीसरी सीट की कोशिश मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती है।

Rajya Sabha Election

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Rajya Sabha Election: भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को अपने 8 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. इस सूची के जारी होने के बाद प्रदेश की सियासत में चर्चा शुरु हो गई है कि, पार्टी ने सिर्फ अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी है. यही नहीं बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद सधे हुए जातीय समीकरण भी साधे है. बीजेपी की इस लिस्ट में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें ओबीसी, सवर्ण (ब्राह्मण), अनुसूचित जाति (SC) और राजपूत वर्ग के चेहरों को शामिल किया गया है. पार्टी का यह कदम राज्य के सियासी समीकरणों को साधने और अपने मजबूत संख्या बल का स्पष्ट संकेत देने के रूप में देखा जा रहा है.

BJP वने किन चेहरों पर खेला दांव ?

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बताते चले कि, बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखें तो भाजपा ने ओबीसी, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति और राजपूत वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करना चाहती है।

ब्राह्मण चेहरों को मौका देकर BJP ने साधा सवर्ण वोट बैंक

आपको बता दे कि, भाजपा की सूची में दो ब्राह्मण चेहरों को जगह दिए जाने को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए पार्टी का यह फैसला आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खास तौर पर कांग्रेस की ओर से आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा के दो ब्राह्मण उम्मीदवारों को मौका देना सियासी संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों की सूची के जरिए भाजपा ने सवर्ण वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।

यूपी राज्यसभा चुनाव में BJP गठबंधन का मजबूत संख्या बल

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दल राज्यसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में हैं। राज्य की 403 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत होगी। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर भाजपा गठबंधन आठ सीटों पर जीत की स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि आठवीं सीट को लेकर मुकाबला पूरी तरह आसान नहीं माना जा रहा है। यदि सभी 10 सीटों पर चुनाव होता है तो 16 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।

समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार घोषित, तीसरी राज्यसभा सीट पर नजर

समाजवादी पार्टी ने पहले पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। सपा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से पार्टी दो सीटों पर जीत की स्थिति में है। हालांकि सपा नेतृत्व तीसरी सीट के लिए भी कोशिश कर सकता है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का मुकाबला महज सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधायकों को अपने पक्ष में बनाए रखने और दूसरे दलों में सेंध लगाने की रणनीति भी अहम हो सकती है।

राज्यसभा चुनाव से पहले BJP-SP में सियासी जोड़तोड़ की बढ़ी संभावना

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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए अहम शक्ति परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों दलों की कोशिश अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की होगी। संख्या बल भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रहा है, लेकिन सपा की तीसरी सीट की कोशिश मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। ऐसे में नामांकन, विधायकों की रणनीति और मतदान के दिन क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

16 अक्टूबर को खुलेगा यूपी राज्यसभा चुनाव का पूरा सियासी गणित

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज होने की संभावना है। भाजपा ने आठ उम्मीदवारों के जरिए जहां अपने संख्या बल और सामाजिक समीकरण का संदेश दिया है, वहीं सपा के सामने अपने दो उम्मीदवारों के साथ तीसरी सीट के लिए रणनीति तैयार करने की चुनौती है। अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने, उम्मीदवारों के अंतिम समीकरण और 16 अक्टूबर के मतदान पर टिकी हैं। यही मतदान तय करेगा कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों का अंतिम गणित किसके पक्ष में जाता है।