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दमदार विपक्ष का नया नाम -- प्रियंका गाँधी

दमदार विपक्ष का नया नाम -- प्रियंका गाँधी

दमदार विपक्ष का नया नाम -- प्रियंका गाँधी

 

आपको बता दे जब से लखीमपुर काण्ड हुआ है तब से सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष के निशाने पर है बात चाहे कांग्रेस की करें या सपा बसपा की या फिर अभी कुछ समय पहले ही चर्चा में आयी आम आदमी पार्टी की।  सारे दल इस काण्ड को लेकर सरकार पर हमलावर है और होना भी चाहिए क्योंकि विपक्ष को इस समय ऐसे मौकों की ही तलाश है विधानसभा चुनाव जो सर पर हैं।  

 

अब बात करते हैं कांग्रेस की। जब से उनकी राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी ने उत्तरप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते अपनी भूमिका मजबूत की  है तब से कांग्रेसी कार्यकर्ताओ में नयी ऊर्जा का संचार भी हो गया है। अभी हाल के लखीमपुर कांड में जिस तरह से प्रियंका गाँधी ने आगे बढ़ते हुए विपक्ष में सिरमौर बनकर सरकार और प्रशासन को नाको तले चने चबबा दिए वो किसी से छुपा भी नहीं है क्योंकि जिस तरह से आधी रात में प्रियंका लखीमपुर के लिए निकली सीतापुर में गिरफ्तार हुई उसके बाद से ही पूरी तरह से विपक्ष का नाम प्रियंका गाँधी के इर्दगिर्द ही घूमने लगा और हो भी क्यों न। न तो बसपा के सतीश मिश्रा लखीमपुर पहुंचने के लिए जीवटता दिखाते नज़र आये और बहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश और प्रसपा प्रमुख शिवपाल सुबह के इंतज़ार में रहे। तो वहीं आम आदमी के प्रभारी संजय सिंह भी सीतापुर पहुंचकर लखीमपुर पहुंचने की कवायद में लगे रहे।   

वहीं जिस तरह से राहुल गाँधी लखनऊ पहुंचे और अपनी बहन प्रियंका के साथ लखीमपुर काण्ड के पीड़ितों से मिलकर सांत्वना दी उससे आम जनता के बीच  कांग्रेस को लेकर एक बेहतर सन्देश भी चला गया। क्योंकि अन्य विपक्ष को लखीमपुर जाने की अनुमति कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी के वहाँ पहुँचने के बाद ही मिल सकी और उससे साफ़ हो गया कि लखीमपुर काण्ड को लेकर विपक्ष द्वारा जोर आजमाइश के दौर में कांग्रेस ने बाजी मार दी और इसका श्रेय मिलना चाहिए उनकी महासचिव प्रियंका गाँधी को।  जिस तरह से उन्होंने खुलकर संघर्ष किया वो काबिलेतारीफ है।      

 


 जिस तरह से उन्होंने खुलकर संघर्ष किया वो काबिलेतारीफ है। खैर लखीमपुर काण्ड में सरकार द्वारा मुआवजा और उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति कर मामला बहुत हद तक सुलझा भी लिया है। पर इस काण्ड ने    उत्तरप्रदेश में लम्बे समय से अपनी खोई जमीन तलाशती कांग्रेस को संजीवनी जरूर दे दी है जो आगामी 2022 के चुनाव में उसके लिए बहुत काम आएगी और जिस तरह से जगह जगह कांग्रेसी कार्यकर्ता अपनी नेता के लिए लड़ते नज़र आये उससे एक बात तो साफ हो गयी कि 2022 के चुनाव के लिए कांग्रेस कार्यकर्त्ता पूरी तरह से मुस्तैद हो गए है और ये चुनाव उत्तरप्रदेश के अब तक के हुए विधानसभा चुनावो में सबसे दिलचस्प नज़र आयेगा।   

 


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