UP Politics: राजनीति में परिवारवाद को अक्सर नेता पुत्रों से जोड़ कर देखा जाता है लेकिन परिवारवाद की परम्परा को आगे बढ़ाने में महिलाएं भी पीछे नहीं है। यूपी की राजनीति में महिला वारिसों की भूमिका तेजी से उभर रही है। इनका सामाजिक आधार, राजनीतिक शैली और चुनावी चुनौती अलग-अलग है, लेकिन एक बात समान है, इनमें से कई अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को नई भाषा में आगे बढ़ा रही हैं।
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू डिम्पल यादव की सक्रियता

यूपी के राजनीतिक घरानों से आने वाली महिलाओं की बात करे तो सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू डिम्पल यादव सक्रिय राजनीति में है। वह कन्नौज से सांसद होने के साथ-साथ अपने पति व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का राजनीति में बराबर से हाथ बटांती है। वह संसद में भी अखिलेश की बगलगीर रहती है तो आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटती है।
डॉ. सोनेलाल पटेल की विरासत के लिए पल्लवी और अनुप्रिया पटेल के बीच सियासी रंजिश

इसी तरह यूपी में कुर्मी मतदाताओं की पार्टी के तौर पर स्थापित डा. सोनेलाल पटेल की अपना दल पर पारिवारिक सियासी विरासत के लिए उनकी दोनों पुत्रियों पल्लवी पटेल और अनुप्रिया पटेल के बीच सियासी रंजिश किसी से छुपी नहीं है। अनुप्रिया ने पिता की बनायी मूल पार्टी पर कब्जा कर लिया तो पल्लवी ने मां का साथ लेकर नई पार्टी बना ली। दोनो ही अपने राजनीतिक सफर को मुकाम दिलाने में जुटी हुई है।
कैराना में इकरा हसन और जौनपुर में प्रिया सरोज की चुनावी सफलता

शामली और मुजफ्फरनगर में हसन परिवार का प्रभाव अलग तरह का है। अख्तर हसन से शुरू हुई विरासत मुनव्वर हसन, तबस्सुम हसन, नाहिद हसन और इकरा हसन तक पहुंची। कैराना लोकसभा सीट पर इकरा हसन की जीत ने यह दिखाया कि परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने में बेटियां भी बेटों से कमतर नहीं है। कुछ ऐसा ही कारनामा किया जौनपुर से सपा से कई बार सांसद व विधायक रहे तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज ने भी किया। प्रिया सरोज ने 2024 का लोकसभा चुनाव मछलीशहर सीट से जीता और सांसद बन कर परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को कायम रखा।
श्रेया वर्मा, आराधना मिश्रा और अदिति सिंह के जरिए आगे बढ़ती राजनीतिक विरासत

बाराबंकी में अपना वर्चस्व रखने वाले बेनी प्रसाद वर्मा समाजवादी आंदोलन के बड़े चेहरे रहे। बाद में उनके पुत्र राकेश वर्मा राजनीति में सक्रिय हुए और अब राकेश की पुत्री श्रेया वर्मा ने परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाने का बीडा उठाया है। मौजूदा समय में श्रेया समाजवादी पार्टी की महिला शाखा की उपाध्यक्ष है और आगामी विधानसभा चुनाव में उनके सपा प्रत्याशी बनाये जाने की पूरी संभावना है।
इसी तरह दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा, रायबरेली के बाहुबली राजनीतिज्ञ अखिलेश सिंह की पुत्री अदिति सिंह जैसे कई नाम जो अलग-अलग दलों और क्षेत्रों से आते हैं लेकिन राजनीति की पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे है। महिला नेताओं की यह मौजूदगी सजावटी नहीं है। कई सीटों पर वे मुख्य उम्मीदवार हैं, कई जगह संगठन की धुरी हैं और कई परिवारों में अगली पीढ़ी की सबसे सक्रिय राजनीतिक आवाज बन चुकी हैं। इसके साथ ही यह सभी उच्च शिक्षित है और शुरू से राजनीति के दांवपेंच देखती आ रही है। यूपी की राजनीति में आ रहा यह बदलाव 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में और अधिक स्पष्ट तौर पर दिखेगा।










