UP Politics: समाजवादी पार्टी के चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। पहले उन्होंने भगवान श्रीराम को ‘समाजवादी’ बताया था और अब उन्होंने भगवान हनुमान को भी ‘PDA भाई’ कह दिया है। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि हनुमान जी और समाजवादी पार्टी की PDA विचारधारा एक ही दिशा में सोचती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
श्रीराम वाले बयान पर अब भी कायम हैं वीरेंद्र सिंह
वीरेंद्र सिंह ने साफ कहा कि वह अपने पहले बयान पर पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति मनाने वालों में भी विचारधाराओं का फर्क है। उनके अनुसार, जो लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते हैं, वे PDA विचारधारा के समर्थक हैं, जबकि 15 जनवरी को पर्व मनाने वाले लोग मनुवादी सोच से जुड़े हुए हैं।वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में भगवान हनुमान को भी समाजवादी खेमे से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी भी हमारे PDA भाई हैं और हमारी ही विचारधारा के प्रतिनिधि हैं। उनके अनुसार, हनुमान जी का जीवन सेवा, समर्पण और वंचितों के साथ खड़े होने का प्रतीक है, जो PDA की सोच से मेल खाता है।
मकर संक्रांति पर उड़ाई PDA वाली पतंग
मकर संक्रांति के मौके पर वाराणसी और आसपास के जिलों में पतंगबाजी का खास महत्व होता है। इसी अवसर पर वीरेंद्र सिंह ने राजनीतिक संदेश देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने PDA लिखी पतंग उड़ाकर लोगों को संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी की नीतियों का प्रचार भी किया।
BMC चुनाव को लेकर भी किया बड़ा दावा
पतंगबाजी के दौरान वीरेंद्र सिंह ने महाराष्ट्र के आगामी बीएमसी चुनाव को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी वहां मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और अच्छा प्रदर्शन करेगी। उनके इस बयान को पार्टी के विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।भगवान राम से जुड़े अपने बयान को दोहराते हुए वीरेंद्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल राजा राम की उपासक है, जबकि समाजवादी पार्टी गरीब, शोषित और वंचित यानी PDA वर्ग की उपासक है। उनके मुताबिक, भगवान राम ने वनवास के दौरान इन्हीं लोगों के सहयोग से रावण पर विजय प्राप्त की थी।
बयान के बाद तेज हुई सियासी सरगर्मी
सपा सांसद के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कई नेताओं और धार्मिक हस्तियों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। कथावाचक रामभद्राचार्य ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए सवाल किया कि अगर श्रीराम समाजवादी थे, तो मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां क्यों चलवाई गईं।रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि अखिलेश यादव और भगवान श्रीराम की कोई तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव इस जन्म में राम बन जाएं, यह संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गलतबयानी ही सही, लेकिन कम से कम सपा नेताओं ने श्रीराम का नाम तो लिया।
बयानबाजी से और तेज होगी सियासत
वीरेंद्र सिंह के हनुमान और राम को लेकर दिए गए बयानों से साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा। धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने पर सियासी घमासान और तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं।
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