UP Politics: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में समाजवादी पार्टी के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक धमाका हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए बरेली की पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इस औचक फैसले ने न केवल स्थानीय नेताओं को चौंका दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी खलबली मचा दी है। पार्टी हाईकमान ने यह कदम अनुशासनहीनता और संगठन के भीतर बढ़ती अराजकता को रोकने के लिए उठाया है।
अश्लील वीडियो और गुटबाजी बनी बर्खास्तगी की मुख्य वजह
सूत्रों के अनुसार, बरेली इकाई में पिछले काफी समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। अखिलेश यादव के पास जिले के पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर शिकायतें पहुंच रही थीं। इनमें सबसे प्रमुख कारण एक विवादित अश्लील वीडियो का वायरल होना और नेताओं के बीच बढ़ती गुटबाजी थी। पार्टी के भीतर खेमेबाजी इस कदर बढ़ गई थी कि कार्यकर्ता आपस में ही उलझ रहे थे, जिससे जनता के बीच सपा की छवि धूमिल हो रही थी। इन शिकायतों की गहन समीक्षा के बाद नेतृत्व ने ‘क्लीन स्वीप’ करने का निर्णय लिया।
जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष समेत कई बड़े नेताओं की छुट्टी
प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के बाद बरेली के जिलाध्यक्ष शिव चरन कश्यप को उनके पद से हटा दिया गया है। उनके साथ ही महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी की भी छुट्टी कर दी गई है। यह गाज केवल शीर्ष नेताओं पर ही नहीं, बल्कि उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के अन्य सभी सदस्यों पर भी गिरी है। हाईकमान के इस सख्त संदेश से यह साफ हो गया है कि पार्टी में पद पर रहते हुए अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को कसने की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर की गई है। अखिलेश यादव बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिले में किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते। चुनावी समर में उतरने से पहले वे एक स्वच्छ छवि वाले और एकजुट संगठन की नींव रखना चाहते हैं। लगातार मिल रही शिकायतों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि पुरानी टीम के साथ चुनावी रण जीतना मुश्किल होगा, इसलिए संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जरूरी थी।
नई कार्यकारिणी के गठन की कवायद तेज
पुरानी कार्यकारिणी के भंग होने के साथ ही अब बरेली में नई टीम के गठन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पार्टी अब ऐसे चेहरों की तलाश कर रही है जो न केवल स्थानीय समीकरणों में फिट बैठें, बल्कि गुटबाजी से दूर रहकर संगठन को मजबूती प्रदान कर सकें। बहुत जल्द नए जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के नामों की घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, बरेली में सपा कार्यालय पर सन्नाटा पसरा है, जबकि निष्कासित पदाधिकारी लखनऊ में अपनी सफाई देने की कोशिशों में जुटे हैं।
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