UP Panchayat Election 2026: तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने के आदेश पर क्या बोले ओम प्रकाश राजभर ?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार फैसले का अध्ययन करेगी। वहीं, ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। जानिए पंचायत चुनाव की तैयारी, आरक्षण प्रक्रिया और सरकार के सामने मौजूद चुनौतियां।

UP Panchayat Election 2026

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 15, 2026

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UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। अब इस पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करती है। पहले कोर्ट के फैसले की कॉपी लेकर उसका अध्ययन किया जाएगा, इसके बाद आगे का कदम उठाया जाएगा। हालांकि, विधानसभा चुनाव, जनगणना और यूपी बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए सरकार के सामने समय का तालमेल बैठाने की चुनौती भी है।

हाईकोर्ट के फैसले पर क्या बोले राजभर ?

हाईकोर्ट के फैसले पर क्या बोले राजभर ?

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करती है। जल्द ही निर्णय की कॉपी हासिल की जाएगी और उसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय होगी। राजभर ने कहा कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव, जनगणना और यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी होनी हैं। ऐसे में इन सभी कार्यक्रमों के बीच पंचायत चुनाव कराने को लेकर सरकार को उचित कदम उठाना होगा। फिलहाल सरकार की अगली रणनीति कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही साफ होगी।

प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर पहले से ही कई बदलाव हो चुके हैं। बीते 25 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें भी प्रशासक बना दिया गया। इस व्यवस्था के तहत नए चुनाव होने तक पंचायतों का कामकाज चलाने की जिम्मेदारी प्रशासकों के पास है। अब हाईकोर्ट के तीन महीने में चुनाव कराने के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पंचायत चुनाव की तैयारी पूरी

पंचायत चुनाव की तैयारी पूरी

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची जारी कर चुका है। चुनाव की तैयारियां भी काफी आगे बढ़ चुकी हैं। हालांकि, चुनाव की तारीख और सीटों पर आरक्षण तय करने से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया अहम है। राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए 20 मई को राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। आयोग का छह महीने का कार्यकाल नवंबर में पूरा होना है। अभी इसकी रिपोर्ट का इंतजार है।

ओबीसी आरक्षण तय होने के बाद ही पंचायत सीटों पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ होगा। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बीच सरकार की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई की गई। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया।

पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3-A) पर सवाल

कोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को भी सही ठहराया और उन्हें प्रशासक के तौर पर काम जारी रखने की अनुमति दी। राज्य सरकार की ओर से परिसीमन का हवाला देते हुए चुनाव टालने की दलील दी गई थी। अब इस आदेश के बाद सरकार को चुनाव की प्रक्रिया और तय समयसीमा के बीच तालमेल बैठाना होगा।

पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3-A) पर सवाल

इस मामले में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-A) को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के 25 और 26 मई के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। याचिका में वर्ष 2000 के प्रेम लाल पटेल मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच इस प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243E और 243K के उल्लंघन के आधार पर असंवैधानिक ठहरा चुकी है।

अब पंचायत चुनाव को लेकर आगे की स्थिति हाईकोर्ट के आदेश, ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन सभी प्रक्रियाओं के बीच उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव निर्धारित तीन महीने की समयसीमा में कैसे कराए जाएंगे।