UP News: यूपी की बेटियों के लिए योगी सरकार की पहल, डिजिटल पढ़ाई में 96% स्कूल जुड़े

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ रही है। खान एकेडमी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 96 प्रतिशत विद्यालय पंजीकृत हैं और 80,078 छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। सहारनपुर, गाजियाबाद और खीरी की छात्राओं ने मासिक शिक्षण लक्ष्य हासिल करने में बेहतर प्रदर्शन किया है।

UP News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 21, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बालिकाओं की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में पढ़ने वाली छात्राओं को खान एकेडमी के जरिए गणित और विज्ञान की पढ़ाई का मौका मिल रहा है। इस डिजिटल मंच पर छात्राएं सवालों का अभ्यास कर सकती हैं और अलग-अलग विषयों में अपनी समझ को मजबूत कर सकती हैं। इसका उद्देश्य पढ़ाई को आसान बनाने के साथ छात्राओं को नियमित अभ्यास की आदत डालना और उनकी शैक्षिक दक्षता बढ़ाना है।

खान एकेडमी पर यूपी के 96 प्रतिशत कस्तूरबा गांधी विद्यालय पंजीकृत

बताते चले कि, खान एकेडमी की 1 से 15 अक्टूबर तक की मध्य-माह प्रदर्शन रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के 96 प्रतिशत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय इस डिजिटल मंच पर पंजीकृत हो चुके हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 80,078 छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 66,996 छात्राओं के खाते सक्रिय हो चुके हैं। वहीं, 30,503 छात्राओं ने अपने निर्धारित मासिक लक्ष्य का कम से कम 50 प्रतिशत पूरा कर लिया है।

खान एकेडमी पर यूपी के 96 प्रतिशत कस्तूरबा गांधी विद्यालय पंजीकृत

ये आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में छात्राएं डिजिटल पढ़ाई से जुड़ रही हैं। हालांकि, छात्राओं को इस मंच का नियमित इस्तेमाल करने और तय लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रोत्साहित करने की भी जरूरत है।

सहारनपुर, गाजियाबाद और खीरी की छात्राओं ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन

जिलावार आंकड़ों में सहारनपुर, गाजियाबाद और खीरी की छात्राओं का प्रदर्शन खास रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर में 92 प्रतिशत छात्राओं ने मासिक लक्ष्य का कम से कम 50 प्रतिशत हासिल किया। गाजियाबाद में यह आंकड़ा 89 प्रतिशत और खीरी में 81 प्रतिशत रहा। इन जिलों के प्रदर्शन से पता चलता है कि डिजिटल शिक्षण के जरिए छात्राओं को नियमित अभ्यास से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे जिलों में भी इसी तरह छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा सकता है।

गणित और विज्ञान में दक्षता बढ़ाने के लिए तय किए गए लक्ष्य

खान एकेडमी कार्यक्रम के तहत छात्राओं को गणित और विज्ञान में अपनी पकड़ मजबूत करनी है। निर्धारित मासिक लक्ष्य के अनुसार, प्रत्येक छात्रा को दोनों विषयों में कम से कम चार-चार कौशलों में दक्षता हासिल करनी है। इसके लिए उन्हें ‘प्रोफिशिएंट’ या ‘मास्टर्ड’ स्तर तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है। डिजिटल मंच पर अभ्यास के जरिए छात्राएं अपनी कमजोरियों को समझ सकती हैं और सवालों को हल करके अपने कौशल में सुधार कर सकती हैं। नियमित अभ्यास और शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है।

योगी सरकार का बालिका शिक्षा और सशक्तीकरण पर जोर

योगी सरकार का बालिका शिक्षा और सशक्तीकरण पर जोर

प्रदेश सरकार का कहना है कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। खान एकेडमी जैसी पहल के जरिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को तकनीक की मदद से सीखने का अवसर मिल रहा है। स्कूलों में इस मंच का प्रभावी इस्तेमाल और नियमित निगरानी छात्राओं को उनके शैक्षिक लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकती है।

संदीप सिंह और मोनिका रानी ने डिजिटल शिक्षा को बताया अहम

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को बेहतर शिक्षा और आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना है। उनके मुताबिक, खान एकेडमी के माध्यम से गणित और विज्ञान में दक्षता बढ़ाने की पहल बालिका सशक्तीकरण को नई दिशा दे रही है।

वहीं, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि इस डिजिटल मंच के जरिए छात्राओं को गणित और विज्ञान के कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि विद्यालयों में खान एकेडमी का प्रभावी इस्तेमाल हो और अधिक से अधिक छात्राएं अपने निर्धारित शिक्षण लक्ष्यों को पूरा कर सकें।

कुल मिलाकर, खान एकेडमी के जरिए डिजिटल अभ्यास को बढ़ावा देना यूपी में बालिका शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कितनी छात्राएं नियमित अभ्यास जारी रखती हैं और तय शैक्षिक लक्ष्यों को हासिल कर पाती हैं।