UP News: योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी के इन 25 जिलों में खुलेंगी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां

उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत 51 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनसे 25 जिलों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए 276.80 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। अब तक 65.5501 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। जानें इस योजना से किसानों, युवाओं और ग्रामीण कारोबारियों को कैसे फायदा मिल सकता है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 13, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले लोगों, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 51 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए कुल 276.80 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन इकाइयों की स्थापना उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत की जाएगी।

51 परियोजनाओं को मिली मंजूरी

51 परियोजनाओं को मिली मंजूरी

आपको बता दे कि, प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए 51 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत प्रस्तावों के सापेक्ष अब तक 65.5501 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। इस पहल का मकसद कृषि उत्पादों को प्रसंस्करण के जरिए बाजार के लिए तैयार करना और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है। इससे गांवों में खेती से जुड़े कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

किन जिलों को मिलेगा फायदा ?

सरकार की इस योजना के तहत हाथरस, सीतापुर, आगरा, बरेली, पीलीभीत, गोरखपुर, शाहजहांपुर, लखनऊ, बदायूं, आजमगढ़, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, इटावा, कुशीनगर, एटा, कानपुर नगर, बहराइच, बिजनौर, वाराणसी, बुलंदशहर, अलीगढ़, रामपुर और हरदोई समेत 25 जिलों में इकाइयां स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन इकाइयों के जरिए स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित कारोबार को बढ़ावा देने की योजना है।

खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को किसने दी मंजूरी?

खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को किसने दी मंजूरी?

इन प्रस्तावों को कृषि उत्पादन आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एसएलईसी) ने मंजूरी दी। यह स्वीकृति उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सहमति के बाद दी गई। सरकार का जोर है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हों और लोगों को अपने आसपास ही काम के अवसर मिल सकें।

किसानों को मिलेगा फायदा, कृषि उत्पादों की बर्बादी घटाने पर जोर

खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शुरू होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए बाजार मिल सकते हैं। इन इकाइयों में स्थानीय किसानों से कच्चा माल लेने को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इससे फल, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने तथा उनकी कीमत बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सही व्यवस्था होने पर उपज की बर्बादी घट सकती है और किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य पाने के अवसर मिल सकते हैं।

गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बढ़ने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुलने की उम्मीद है। वहीं, महिलाएं भी छोटे कारोबार और उद्यमिता के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकती हैं। किसानों और छोटे उद्यमियों को भी कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ने का मौका मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक रोजगार के अवसर इस बात पर निर्भर करेंगे कि परियोजनाएं कब शुरू होती हैं और उनमें कितने लोगों को काम मिलता है।

PMFME योजना और यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से मिलेगा प्रोत्साहन

PMFME योजना और यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से मिलेगा प्रोत्साहन

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और प्रदेश की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के जरिए इस क्षेत्र में कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना, छोटे खाद्य उद्योगों को प्रोत्साहित करना और गांवों में आय के नए साधन तैयार करना है।

इकाइयों के लिए अग्नि सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के नियम जरूरी

स्वीकृत परियोजनाओं को शुरू करने के लिए निवेशकों को संबंधित अधिकारियों से अग्नि सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी प्रमाण-पत्र लेने होंगे। साथ ही, इकाइयों में कच्चे माल की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए स्थानीय किसानों के साथ तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।

कुल मिलाकर, 276.80 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब इन योजनाओं का वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि इकाइयां कितनी जल्दी स्थापित होती हैं और किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण कारोबारियों को इनसे कितने अवसर मिलते हैं।