UP News: यूपी का आबकारी निर्यात हुआ बूम, 163% बढ़ी मात्रा; देश में मिला तीसरा स्थान

उत्तर प्रदेश के आबकारी निर्यात में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 45.4 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। निर्यात की मात्रा 163 प्रतिशत बढ़ी, जबकि प्रदेश का राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सा 12.6 प्रतिशत पहुंच गया। बस्ती के शीरे से विदेशी कमाई और नए निवेश ने यूपी को एक्सपोर्ट हब बनाने की रफ्तार तेज कर दी।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 2, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश अब सिर्फ देश के भीतर आबकारी उत्पादों का बड़ा बाजार नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। योगी सरकार की ‘त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29’ के बाद प्रदेश के आबकारी और कृषि क्षेत्र में तेजी देखने को मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान यूपी के आबकारी निर्यात में 45.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह राष्ट्रीय औसत 18.3 प्रतिशत से दोगुने से भी ज्यादा है।

मात्रा के हिसाब से यूपी का आबकारी निर्यात 163% बढ़ा

बताते चले कि, मूल्य के साथ-साथ निर्यात की मात्रा में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वॉल्यूम के लिहाज से प्रदेश का आबकारी निर्यात 163 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसे यूपी को देश के प्रमुख एक्सपोर्ट हब के तौर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार की नई नीति से उत्पादन, निर्यात और निवेश—तीनों मोर्चों पर गतिविधियां बढ़ी हैं।

बस्ती के शीरे से विदेश तक पहुंचा यूपी का कृषि कारोबार

यूपी के बढ़ते आबकारी निर्यात का सीधा फायदा कृषि क्षेत्र को भी मिल रहा है। बस्ती जिले से 25 हजार कुंतल शीरे का सीधे विदेशी बाजारों में निर्यात किया गया। इससे करीब 5 लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। यानी गन्ने से निकलने वाला शीरा अब केवल स्थानीय उद्योगों का कच्चा माल नहीं रह गया, बल्कि प्रदेश के लिए विदेशी कमाई का जरिया भी बन रहा है।

यूपी से दूसरे राज्यों को भी बढ़ी बोतलों की सप्लाई

घरेलू बाजार में भी उत्तर प्रदेश की इकाइयों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच यूपी की इकाइयों ने दूसरे राज्यों को 1.64 करोड़ अतिरिक्त बोतलें भेजीं। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में यह आंकड़ा करीब 45.7 प्रतिशत अधिक है। इससे पता चलता है कि प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ दूसरे राज्यों में यूपी निर्मित उत्पादों की मांग भी बढ़ी है।

यूपी में आबकारी सेक्टर में नए निवेश की बढ़ी रफ्तार

निर्यात की बढ़ती संभावनाओं ने उत्तर प्रदेश में नए निवेश के रास्ते भी खोल दिए हैं। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री ने भी नई इकाई लगाई है। नए प्लांट आने से उत्पादन बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

बंद पड़ी फैक्ट्रियों में फिर लौटी रौनक

निवेश की इस तस्वीर का एक अहम पहलू पुरानी इकाइयों का दोबारा सक्रिय होना भी है। मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने वर्षों से बंद पड़ी अपनी इकाई को फिर से शुरू कर दिया है। वहीं गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी एथेनॉल और पेय उत्पादन के क्षेत्र में उतर रही है। रैडिको खेतान भी अपने एक्सपोर्ट प्रोडक्शन को दूसरे राज्यों से यूपी के सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में स्थानांतरित कर रही है।

आबकारी निर्यात में यूपी देश में तीसरे नंबर पर पहुंचा

अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में भारत का कुल आबकारी निर्यात करीब 10.17 करोड़ डॉलर रहा। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर 1.278 करोड़ डॉलर हो गई। पिछले साल इसी अवधि में प्रदेश का निर्यात करीब 87.9 लाख डॉलर था। यानी एक साल में यूपी ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की है।

राष्ट्रीय आबकारी निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 12.6 प्रतिशत

यूपी की राष्ट्रीय हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है। पिछले साल जहां राष्ट्रीय आबकारी निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 10.2 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई है। इस प्रदर्शन के साथ उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह बढ़त प्रदेश की निर्यात क्षमता में हो रहे बदलाव को दर्शाती है।

यूपी आबकारी निर्यात से किसानों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक फायदा

आबकारी निर्यात में तेजी का असर केवल डिस्टिलरी और ब्रुअरीज तक सीमित नहीं है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह के मुताबिक, यह एक पूरी आर्थिक चेन है, जिसकी शुरुआत किसानों से होती है। निर्यात बढ़ने पर गन्ने, शीरे और अनाज की मांग बढ़ती है। इसके बाद कांच की बोतल, ढक्कन, लेबलिंग, पैकेजिंग और वेयरहाउसिंग जैसे कई उद्योग इससे जुड़ते हैं।

पैकेजिंग और परिवहन में भी बढ़ रहे रोजगार के अवसर

एक उत्पाद को खेत से विदेशी बाजार तक पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर सेवाओं की जरूरत होती है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन की मांग बढ़ती है। ऐसे में यूपी के बढ़ते आबकारी निर्यात को सिर्फ विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया नहीं, बल्कि किसानों, उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को जोड़ने वाली आर्थिक चेन के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की निर्यात नीति से यह चेन आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है।