UP Electricity Bills: यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, UPPCL का 10% फ्यूल सरचार्ज पर रोक!

भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ बिजली खपत के बीच उत्तर प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका लगा है। यूपीपीसीएल ने जून के बिलों में 10% फ्यूल सरचार्ज लगाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आखिर बिजली दरों में इस अचानक बढ़ोतरी के पीछे कौन सी बड़ी इनसाइड स्टोरी है?

UP Electricity Bills

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 2, 2026

UP Electricity Bills:  उत्तर प्रदेश के करीब 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा उपभोक्ताओं के व्यापक हित में दाखिल किए गए जनहित एवं लोकमहत्व प्रत्यावेदन पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। नियामक आयोग ने अपनी शुरुआती समीक्षा में साफ तौर पर माना है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा जून 2026 के बिजली बिलों में जबरन लागू किया गया 10 प्रतिशत का ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) पूरी तरह से गैरकानूनी और नियामकीय प्रावधानों के खिलाफ है। आयोग के इस तल्ख रुख के बाद अब पावर कॉरपोरेशन के पास इस फैसले को वापस लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

उपभोक्ता परिषद ने तथ्यों के साथ खोली पावर कॉरपोरेशन के दावों की पोल

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की। उन्होंने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ एक विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया। परिषद ने तथ्यों के जरिए आयोग को अवगत कराया कि फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की नई गणना करते समय यूपीपीसीएल ने चालाकी से मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावों और पिछली अवधि की देनदारियों को भी जोड़ दिया। परिषद ने साफ किया कि यह पूरी प्रक्रिया कानून और मौजूदा नियामकीय व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है।

अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने के बजाय बिजली बिलों में 2% की कटौती होनी थी

उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग के सामने यह बड़ा दावा किया कि यदि यूपीपीसीएल ने तय नियमों के तहत ईमानदारी से गणना की होती, तो जून 2026 में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की नौबत ही नहीं आती। इसके विपरीत, सही गणना के आधार पर प्रदेश के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में लगभग 2 प्रतिशत की कमी लागू की जानी चाहिए थी। परिषद के अनुसार, आयोग द्वारा स्वीकृत बिजली खरीद लागत करीब 4.94 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित थी, लेकिन पावर कॉरपोरेशन ने मार्च 2026 के लिए इसे लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट दर्शा दिया। इस तरह गलत आंकड़ों के दम पर जनता पर 1610 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बोझ डाल दिया गया।

नियामक आयोग की सख्त टिप्पणी

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूपीईआरसी ने अपने आदेश में बेहद सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि विभिन्न न्यायिक आदेशों के तहत देय बकाया राशि, एनटीपीसी के पुराने भुगतानों और केंद्रीय ट्रांसमिशन उपयोगिता की ऐतिहासिक देनदारियों को वर्तमान एफपीपीसीए गणना में शामिल करना पूरी तरह अनुचित है। ऐसा करने से उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर अनुचित वित्तीय दबाव बनता है। इसके अतिरिक्त, पावर कॉरपोरेशन के इस मनमाने रवैये के कारण आयोग को भी उन पुरानी लागतों की प्रकृति, स्वीकार्यता और उनकी वसूली की कानूनी वैधता की जांच करने का जरूरी अवसर नहीं मिल पाता है।

यूपीईआरसी एमवाईटी विनियम-2025 का सीधा उल्लंघन

विद्युत नियामक आयोग ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि पिछली अवधि के बकाये को वर्तमान गणना में शामिल करना यूपीईआरसी एमवाईटी विनियम-2025 के नियम 16.1 के प्रावधानों के साथ असंगत है और यह उपभोक्ता संरक्षण के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। इसी कड़े रुख के आधार पर आयोग ने यूपीपीसीएल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का सख्त निर्देश दिया है। आयोग ने कॉरपोरेशन से संबंधित महीने के एफपीपीएएस की पूरी गणना, उसमें शामिल मदों का ब्यौरा, बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क का अलग विवरण तथा वह कानूनी आधार मांगा है जिसके तहत पिछली देनदारियों को इसमें जोड़ा गया।

फरवरी में भी हुई थी अवैध वसूली,

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि आयोग के इस रुख से साफ है कि पावर कॉरपोरेशन का 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार का आदेश नियामकीय कसौटी पर फेल हो चुका है और उसे इसे संशोधित करना ही होगा। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले फरवरी 2026 में भी उपभोक्ताओं से इसी तरह 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज वसूला गया था, जिस पर आयोग की जांच अभी लंबित है। ऐसे में दोबारा जून में इसे लागू करना जनता के साथ धोखा है। परिषद ने आयोग से मांग की है कि इस 10 प्रतिशत की वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए, पुराने दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो और कॉरपोरेशन के पास उपलब्ध अधिशेष धनराशि का समायोजन कर करोड़ों उपभोक्ताओं को न्याय दिया जाए।

Read More:  Share Market Update: शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में फिसले