UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच प्रधानमंत्री आवास पर करीब एक घंटे तक बैठक होने की जानकारी सामने आई है। इस मुलाकात के बीच उत्तर प्रदेश में बीजेपी की संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी आगामी चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
बीजेपी की बूथ कमेटियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर जोर
बताते चले कि, बीजेपी की रणनीति में इस बार बूथ कमेटियों को सामाजिक संपर्क के महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बताई जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि जिस बूथ पर जिन-जिन सामाजिक समूहों की मौजूदगी है, वहां बूथ कमेटी में उन समुदायों के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर अलग-अलग वर्गों के साथ संवाद स्थापित करने और संगठन की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

पार्टी की योजना के मुताबिक, जिस सामाजिक समूह से संपर्क मजबूत करना है, उसी समाज के स्थानीय लोगों को संगठन में जिम्मेदारी देने पर जोर रहेगा। बीजेपी का मानना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए समुदायों तक पहुंच बनाना और उनकी स्थानीय समस्याओं व मुद्दों को समझना आसान हो सकता है। इस रणनीति के तहत बूथवार सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय करने की तैयारी है।
विनोद तावड़े की बैठक के बाद यूपी बीजेपी का नया प्लान
उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 6 सितंबर को प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में संगठन की स्थिति, बूथ स्तर की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर फीडबैक लिया गया था। बताया जा रहा है कि बैठक में जातीय समीकरण को चुनावी तैयारियों की प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया गया।
जातीय समीकरण और पीडीए मुद्दे पर बीजेपी का फोकस

बैठक के दौरान पार्टी स्तर पर यह चर्चा भी हुई कि विपक्ष आगामी चुनाव में पीडीए, संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे सकता है। ऐसे में बीजेपी ने बूथ स्तर पर सभी सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बनाई है। पार्टी संगठन के जरिए अलग-अलग समुदायों से सीधे संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
इसके लिए स्थानीय सामाजिक समीकरण को समझते हुए बूथ कमेटियों का गठन और जिम्मेदारियों का निर्धारण करने पर जोर दिया जा रहा है। बीजेपी की रणनीति में यह माना जा रहा है कि संगठन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी बढ़ाने से स्थानीय स्तर पर संवाद का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
18 हजार से ज्यादा बूथों पर बीजेपी की खास नजर

बीजेपी के बूथवार अध्ययन में 18 हजार से अधिक ऐसे बूथ चिन्हित किए जाने की जानकारी है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति मजबूत थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बूथों में करीब 80 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में ऐसे बूथों की संख्या अधिक बताई जा रही है। यही वजह है कि पार्टी इन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इन बूथों पर सामाजिक संपर्क और संगठन की पकड़ को लेकर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
बूथ कमेटियों के जरिए सामाजिक संपर्क बढ़ाने की रणनीति
बीजेपी की मौजूदा चुनावी रणनीति में बूथ कमेटियों को सिर्फ चुनावी प्रबंधन तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक संपर्क का माध्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत बूथ पर मौजूद सामाजिक समूहों के प्रतिनिधियों को संगठन में जिम्मेदारी देकर उनके जरिए स्थानीय स्तर पर संवाद मजबूत करने की कोशिश होगी।
जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ बीजेपी पदाधिकारी भी स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय कर सकते हैं। पार्टी की पूरी कवायद का फोकस चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कमजोर माने जा रहे क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ संवाद स्थापित करने पर है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह रणनीति बीजेपी के संगठनात्मक अभियान का अहम हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।










