UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में निर्धारित समय के अनुसार होने की बात मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त होना है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। फिरोजाबाद जिले की टूंडला विधानसभा सीट इन्हीं सीटों में शामिल है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट पिछले कुछ चुनावों में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच बदलते सामाजिक समीकरणों की वजह से चर्चा में रही है।
टूंडला के बदलते चुनावी समीकरण पर नजर

बताते चले कि, साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रेमपाल सिंह धनगर ने बड़ी जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी फिरोजाबाद लोकसभा सीट के तहत आने वाले टूंडला विधानसभा खंड में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर बढ़त बनाई। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव की तुलना में 2024 में बीजेपी की बढ़त कम हुई। यही आंकड़ा 2027 की चुनावी लड़ाई को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
टूंडला विधानसभा सीट क्यों है खास?
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, टूंडला विधानसभा क्षेत्र संख्या 95 है और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यह फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 के परिसीमन के बाद सीट की सीमाओं में बदलाव हुआ और 2012 के विधानसभा चुनाव से इसे SC आरक्षित कर दिया गया। वर्तमान स्वरूप में इसमें पूरी टूंडला तहसील के अलावा फिरोजाबाद तहसील के नरखी, नगला बीच और पचोखरा क्षेत्र शामिल हैं।
टूंडला का राजनीतिक महत्व सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। यह शहर उत्तर भारत के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल रहा है और आगरा, फिरोजाबाद, एटा तथा आसपास के इलाकों के बीच परिवहन और व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
टूंडला विधानसभा सीट एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
| विधानसभा क्षेत्र | टूंडला |
| विधानसभा संख्या | 95 |
| जिला | फिरोजाबाद |
| लोकसभा क्षेत्र | फिरोजाबाद |
| आरक्षण | अनुसूचित जाति (SC) |
| वर्तमान विधायक | प्रेमपाल सिंह धनगर |
| वर्तमान पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| 2022 विजेता | प्रेमपाल सिंह धनगर |
| 2022 जीत का अंतर | 47,691 वोट |
| 2024 लोकसभा में BJP बढ़त | 17,196 वोट |
| प्रमुख राजनीतिक दल | BJP, SP, BSP |
2022 में बीजेपी के प्रेमपाल सिंह धनगर को 1,22,881 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के राकेश बाबू को 75,190 वोट मिले। बीजेपी की जीत का अंतर 47,691 वोट रहा।
2012 से बदला टूंडला का चुनावी समीकरण

टूंडला की चुनावी राजनीति को समझने के लिए 2012 का चुनाव महत्वपूर्ण है। परिसीमन के बाद पहली बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होकर विधानसभा चुनाव में गई। 2012 में BSP के राकेश बाबू ने 67,949 वोट हासिल करके चुनाव जीता था। समाजवादी पार्टी के अखिलेश कुमार को 60,003 वोट मिले, जबकि बीजेपी के शिव सिंह चक को 58,536 वोट मिले। यानी तीनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला काफी करीबी था और BSP ने SP को 7,946 वोट से हराया। इसके बाद 2017 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
बीजेपी के सत्य पाल सिंह बघेल ने मौजूदा BSP विधायक राकेश बाबू को 56,070 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इसी चुनाव से टूंडला में बीजेपी की मजबूत चुनावी उपस्थिति का दौर शुरू हुआ।
टूंडला के प्रमुख विधानसभा चुनाव
| वर्ष | विजेता | पार्टी | प्रमुख तथ्य |
| 2012 | राकेश बाबू | BSP | SP पर 7,946 वोट की जीत |
| 2017 | सत्य पाल सिंह बघेल | BJP | BSP पर 56,070 वोट की जीत |
| 2020 उपचुनाव | प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | SP पर 17,683 वोट की जीत |
| 2022 | प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | SP पर 47,691 वोट की जीत |
2019 में सत्य पाल सिंह बघेल के आगरा लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद टूंडला विधानसभा सीट खाली हुई और 2020 में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में बीजेपी ने प्रेमपाल सिंह धनगर को मैदान में उतारा और उन्होंने SP के महाराज सिंह धनगर को 17,683 वोट से हराया। 2022 में भी धनगर ने सीट बरकरार रखी और जीत का अंतर बढ़कर 47,691 वोट हो गया।
2022 में क्या हुआ था?

2022 के विधानसभा चुनाव में टूंडला में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला दिखाई दिया।
2022 टूंडला विधानसभा चुनाव
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | 1,22,881 |
| राकेश बाबू | SP | 75,190 |
| BSP | BSP | 40,977 |
| अन्य | विभिन्न | शेष |
बीजेपी को करीब 49.46 प्रतिशत वैध वोट मिले और उसने 47,691 वोटों के अंतर से चुनाव जीता। कुल मतदान प्रतिशत 66.74 प्रतिशत रहा। 2022 के नतीजे यह बताते हैं कि उस समय बीजेपी और SP के बीच बड़ा अंतर था, जबकि BSP भी करीब 41 हजार वोट जुटाने में सफल रही। यही वजह है कि टूंडला की राजनीति में BSP के वोट शेयर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
2024 लोकसभा चुनाव में बदला अंतर
2024 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अक्षय यादव ने बीजेपी के विश्वदीप सिंह को हराया। लेकिन जब इसी लोकसभा सीट के विधानसभा खंडों को अलग-अलग देखा गया, तो टूंडला में बीजेपी आगे रही।

टूंडला विधानसभा खंड में बीजेपी के विश्वदीप सिंह को 1,07,422 वोट, जबकि समाजवादी पार्टी के अक्षय यादव को 90,226 वोट मिले। BSP के चौधरी बशीर को 30,564 वोट मिले। इस तरह टूंडला में बीजेपी की बढ़त 17,196 वोट रही।
2024 लोकसभा चुनाव: टूंडला विधानसभा खंड
| पार्टी | उम्मीदवार | वोट |
| BJP | विश्वदीप सिंह | 1,07,422 |
| SP | अक्षय यादव | 90,226 |
| BSP | चौधरी बशीर | 30,564 |
| अन्य | — | शेष |
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़त 47,691 वोट थी, जो 2024 लोकसभा चुनाव में घटकर 17,196 वोट रह गई।
हालांकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मुद्दे, उम्मीदवार और मतदान व्यवहार अलग हो सकते हैं, इसलिए इन दोनों चुनावों की तुलना को 2027 का सीधा परिणाम नहीं माना जा सकता। लेकिन यह आंकड़ा टूंडला के बदलते चुनावी समीकरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
टूंडला में जातीय समीकरण कितना महत्वपूर्ण?
टूंडला SC आरक्षित विधानसभा सीट है। इसलिए यहां अनुसूचित जाति मतदाताओं की भूमिका चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्षेत्र में जाटव, बघेल और धनगर समुदायों के साथ ठाकुर, यादव, ब्राह्मण, जाट, निषाद, कुशवाहा और लोधी जैसे सामाजिक समूह भी मौजूद हैं। हालांकि निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर जातिवार आधिकारिक मतदाता आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अलग-अलग स्रोतों में बताए गए जातीय प्रतिशत को निश्चित चुनावी आंकड़ा मानने के बजाय इन्हें राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर देखना उचित होगा।
टूंडला की राजनीति में तीन बड़े सवाल यहां अहम हो जाते हैं—
- पहला, SC मतदाताओं का रुझान किस दिशा में जाता है?
- दूसरा, BJP और SP अपने-अपने सामाजिक गठबंधन को कितना मजबूत कर पाते हैं?
- तीसरा, BSP अपने पारंपरिक दलित समर्थन आधार में कितनी वापसी कर पाती है?
यही तीनों सवाल 2027 की चुनावी लड़ाई को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकते हैं।
बीजेपी के सामने 2027 में क्या चुनौती होगी?

बीजेपी के लिए टूंडला में सबसे बड़ा आधार पिछले लगातार चुनावों का प्रदर्शन है। 2017 में पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की, 2020 का उपचुनाव जीता और 2022 में भी सीट बरकरार रखी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी टूंडला विधानसभा खंड में पार्टी सबसे आगे रही। लेकिन 2024 के आंकड़े एक और तस्वीर दिखाते हैं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़त 17,196 वोट तक सीमित रही। इसलिए 2027 में बीजेपी के सामने सिर्फ सीट बचाने का सवाल नहीं होगा, बल्कि 2022 के विधानसभा चुनाव वाली बढ़त को बनाए रखने की चुनौती भी चर्चा में रहेगी।
समाजवादी पार्टी के लिए क्या मायने रखता है टूंडला?
समाजवादी पार्टी के लिए टूंडला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में पार्टी ने पूरे फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में जीत हासिल की, जबकि टूंडला विधानसभा खंड में बीजेपी आगे रही। इससे दोनों चुनावों के बीच क्षेत्रीय स्तर पर मतदान व्यवहार में अंतर दिखाई देता है। SP के लिए 2027 में मुख्य सवाल यह होगा कि क्या वह लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन को विधानसभा चुनाव में भी प्रभावी तरीके से बदल पाती है।

2022 में SP के राकेश बाबू को 75,190 वोट मिले थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में टूंडला खंड में SP के अक्षय यादव को 90,226 वोट मिले। हालांकि उम्मीदवार और चुनाव का स्तर अलग होने के कारण दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना सावधानी से करनी होगी।
BSP की भूमिका भी होगी महत्वपूर्ण
टूंडला SC आरक्षित सीट है, इसलिए BSP की स्थिति पर भी नजर रहेगी। 2022 विधानसभा चुनाव में BSP को करीब 40,977 वोट मिले थे। यानी बीजेपी और SP के बाद पार्टी ने एक महत्वपूर्ण वोट आधार बनाए रखा। 2024 के लोकसभा चुनाव में टूंडला विधानसभा खंड में BSP को 30,564 वोट मिले। ऐसे में 2027 में BSP का प्रदर्शन इस सीट के त्रिकोणीय समीकरण को प्रभावित कर सकता है। खास तौर पर यदि BSP अपने पारंपरिक SC वोट बैंक में मजबूत उपस्थिति दर्ज करती है, तो BJP और SP के बीच वोटों का अंतर प्रभावित हो सकता है।
टूंडला सिर्फ चुनावी सीट नहीं, रेलवे और कारोबार का भी केंद्र

टूंडला की पहचान सिर्फ विधानसभा सीट के तौर पर नहीं है। यह उत्तर भारत के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में से एक रहा है। 19वीं सदी में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के साथ टूंडला का महत्व बढ़ा। दिल्ली-आगरा-कानपुर रेल मार्ग पर इसकी स्थिति ने इसे व्यापार और परिवहन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया। रेलवे के आसपास विकसित हुई टाउनशिप, रेलवे कॉलोनी, वर्कशॉप, बाजार और परिवहन कारोबार ने शहर की अर्थव्यवस्था को अलग पहचान दी। आज भी रेलवे, परिवहन, व्यापार, वेयरहाउसिंग और छोटे कारोबार टूंडला की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शहर की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। आगरा और फिरोजाबाद के करीब होने के साथ-साथ यह क्षेत्र उत्तर भारत के बड़े सड़क और रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
गांव और शहर—दोनों का मिश्रण

टूंडला विधानसभा क्षेत्र की चुनावी तस्वीर को समझने के लिए ग्रामीण और शहरी हिस्से के अंतर को भी देखना जरूरी है।वर्तमान परिसीमन के बाद सीट में पूरी टूंडला तहसील के साथ फिरोजाबाद तहसील के कुछ ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं। इसलिए यह सीट केवल टूंडला शहर की राजनीति तक सीमित नहीं है।ग्रामीण इलाकों में खेती, रोजगार, सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जबकि टूंडला शहर में रेलवे, कारोबार, परिवहन, रोजगार और शहरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे ज्यादा प्रमुख हो सकते हैं। यही वजह है कि 2027 में उम्मीदवारों के सामने ग्रामीण और शहरी दोनों मतदाताओं तक अलग-अलग मुद्दों के साथ पहुंचने की चुनौती होगी।
2027 में टूंडला के सामने कौन-कौन से बड़े सवाल?
2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए टूंडला की राजनीति में कई सवाल अभी से चर्चा में हैं।
1. क्या बीजेपी 2022 का प्रदर्शन दोहरा पाएगी?
2022 में बीजेपी ने 47,691 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान टूंडला खंड में उसकी बढ़त 17,196 वोट रही। क्या विधानसभा चुनाव में बीजेपी फिर बड़ा अंतर बना पाएगी, यह देखने वाली बात होगी।
2. क्या SP लोकसभा की बढ़त को विधानसभा में बदल पाएगी?
2024 में SP ने फिरोजाबाद लोकसभा सीट जीती, लेकिन टूंडला विधानसभा खंड में BJP आगे रही। 2027 में SP के लिए इस अंतर को पाटना एक अहम चुनावी चुनौती होगी।
3. BSP कितनी मजबूत वापसी करेगी?
2022 में BSP के पास करीब 41 हजार वोट थे। 2024 में भी पार्टी को 30 हजार से ज्यादा वोट मिले। SC आरक्षित सीट होने के कारण BSP के वोट शेयर पर 2027 में विशेष नजर रहेगी।
4. उम्मीदवार कितना महत्वपूर्ण होगा?
टूंडला का पिछला चुनावी इतिहास बताता है कि उम्मीदवार बदलने के साथ समीकरण भी बदल सकते हैं। इसलिए 2027 में BJP, SP और BSP के उम्मीदवारों का चयन चुनावी चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।
5. क्या जातीय समीकरण फिर निर्णायक होंगे?
SC आरक्षित सीट होने के कारण दलित मतदाताओं के साथ-साथ अन्य सामाजिक समूहों का समर्थन भी महत्वपूर्ण होगा। अलग-अलग दल अपने सामाजिक गठबंधन को किस तरह मजबूत करते हैं, यह चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।
2027 से पहले टूंडला का चुनावी ट्रेंड
अगर पिछले चार महत्वपूर्ण चुनावों को एक साथ देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह सामने आती है—
| चुनाव | BJP का प्रदर्शन | SP का प्रदर्शन | BSP का प्रदर्शन |
| 2012 | तीसरे स्थान पर | दूसरे स्थान पर | जीत |
| 2017 | जीत | — | दूसरे स्थान पर |
| 2020 | जीत | दूसरे स्थान पर | — |
| 2022 | जीत | दूसरे स्थान पर | तीसरे स्थान पर |
| 2024 लोकसभा खंड | बढ़त | दूसरे स्थान पर | तीसरे स्थान पर |
यह आंकड़े बताते हैं कि 2017 के बाद टूंडला में बीजेपी लगातार विधानसभा चुनाव जीतती रही है, जबकि SP मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी के रूप में सामने रही है। BSP का वोट आधार भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
2027 में टूंडला पर क्यों रहेगी नजर?
टूंडला विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास एक सीधी कहानी नहीं बताता। 2012 में BSP ने करीबी मुकाबले में जीत हासिल की, 2017 में बीजेपी ने बड़े अंतर से वापसी की, 2020 के उपचुनाव में बीजेपी ने सीट बरकरार रखी और 2022 में जीत का अंतर फिर बढ़ गया। 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी टूंडला विधानसभा खंड में आगे रही, लेकिन उसका अंतर 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में कम रहा।

यही वजह है कि 2027 के चुनाव में टूंडला एक ऐसी सीट होगी जहां पिछले चुनावों के आंकड़े, SC मतदाताओं का रुझान, BJP-SP के बीच सीधा मुकाबला, BSP का वोट शेयर, उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और ग्रामीण-शहरी मुद्दे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल 2027 के उम्मीदवारों और अंतिम गठबंधनों को लेकर तस्वीर स्पष्ट नहीं है। इसलिए मौजूदा चुनावी आंकड़ों के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि टूंडला में पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में घटा अंतर यह भी दिखाता है कि 2027 की विधानसभा लड़ाई को केवल पिछले विधानसभा परिणामों के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होगा।
टूंडला की चुनावी कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—क्या बीजेपी अपनी लगातार जीत की लय बनाए रखेगी, या SP और BSP के सामाजिक समीकरण 2027 में सीट की तस्वीर बदल देंगे?










