UP Election 2027: स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सपा-कांग्रेस में खींचतान, 2027 से पहले टूटेगा गठबंधन का समीकरण?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर INDIA गठबंधन में सियासी खींचतान तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने सपा कोटे से उन्हें जगह देने से इनकार किया है, वहीं कांग्रेस नेताओं की उनसे मुलाकात ने नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल है कि इस दांव से किसे फायदा होगा?

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

नवम्बर 3, 2026

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले INDIA गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही खींचतान की चर्चा है। अब इस गठबंधन में स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री का मुद्दा भी गर्म हो गया है। कांग्रेस चाहती है कि स्वामी प्रसाद मौर्य गठबंधन के साथ आएं, लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं।

अखिलेश यादव साफ कह चुके हैं कि सपा के कोटे से स्वामी प्रसाद मौर्य को कोई सीट नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद 2 नवंबर को यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद सियासी चर्चाएं और तेज हो गईं।

राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात के बाद स्वामी मौर्य ने दिया बड़ा बयान

राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात के बाद स्वामी मौर्य ने दिया बड़ा बयान

स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात पर राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि क्या वह अपने दोस्तों से मिलना बंद कर दें? उनके मुताबिक, सामाजिक न्याय की लड़ाई में साथ रहने वाले लोग उनके दोस्त हैं और उनसे मिलना जारी रहेगा। सीट बंटवारे का फैसला चुनाव के समय और सही स्तर पर होगा। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी साफ कर दिया कि गठबंधन में शामिल होने के लिए उन्हें अखिलेश यादव से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में बना है और इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व करेगा।

अखिलेश यादव से क्यों नाराज हैं स्वामी प्रसाद मौर्य?

स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच तल्खी की कई वजहें बताई जा रही हैं। जनवरी 2023 में रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को लेकर स्वामी प्रसाद ने विवादित टिप्पणी की थी। अक्टूबर 2023 में भारत विभाजन के लिए हिंदू महासभा को जिम्मेदार ठहराने वाला बयान दिया। इसी साल दिवाली पर माता लक्ष्मी को लेकर उनकी टिप्पणी भी चर्चा में रही।

फरवरी 2026 में यूजीसी नियमों और ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयानों से भी विवाद हुआ। इसके बाद अक्टूबर 2026 में अखिलेश यादव के पूजा-पाठ को दिखावा और नौटंकी बताने के साथ डिंपल यादव पर टिप्पणी ने दोनों के रिश्तों में और कड़वाहट बढ़ा दी।

ऊंचाहार और बागी विधायकों की सीटों पर फंस सकता है पेंच

स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सपा की नाराजगी के पीछे सिर्फ उनके बयान ही नहीं, बल्कि चुनावी गणित भी अहम माना जा रहा है। चर्चा है कि अगर स्वामी INDIA गठबंधन में आते हैं तो वह कुछ ऐसी सीटों की मांग कर सकते हैं, जहां समाजवादी पार्टी अपने बागी नेताओं को हराने की तैयारी कर रही है।इनमें रायबरेली की ऊंचाहार सीट का नाम भी चर्चा में है, जहां मनोज पांडे को लेकर सपा की रणनीति अहम मानी जा रही है। इसके अलावा स्वामी अपनी बेटी और बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाने की कोशिश कर सकते हैं। उनके बेटे को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्वामी की एंट्री पर क्या कहा?

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्वामी की एंट्री पर क्या कहा?

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने स्वामी प्रसाद मौर्य के गठबंधन में शामिल होने के सवाल पर कहा कि फिलहाल पार्टी का ध्यान रैली और संगठनात्मक तैयारियों पर था। उन्होंने संकेत दिया कि सीटों के बंटवारे पर जल्द फैसला हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि INDIA गठबंधन का गठन देश के शीर्ष नेताओं ने मिलकर किया था। इसलिए इसमें कौन शामिल होगा और कौन नहीं, इसका फैसला भी गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। यानी कांग्रेस की तरफ से स्वामी की एंट्री पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी साधा निशाना

स्वामी प्रसाद के बयानों पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य छोटे मुंह बड़ी बात कर रहे हैं। उन्हें अखिलेश यादव के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। अवधेश प्रसाद के मुताबिक, स्वामी पहले अखिलेश यादव के नेतृत्व में काम कर चुके हैं और इस तरह के बयान उनकी छोटी मानसिकता दिखाते हैं।

स्वामी की एंट्री से बढ़ सकती है सीटों की लड़ाई

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर स्वामी प्रसाद मौर्य INDIA गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो सबसे बड़ी चुनौती सीट बंटवारे को लेकर होगी। समाजवादी पार्टी उन सीटों पर समझौता नहीं करना चाहेगी, जहां उसके बागी नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी है।

ऐसे में कांग्रेस के सामने भी मुश्किल होगी। एक तरफ उसे अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना है, तो दूसरी तरफ यूपी में सपा के साथ गठबंधन भी बनाए रखना है। फिलहाल स्वामी प्रसाद मौर्य की अगली राजनीतिक चाल पर सबकी नजर है। 2027 के चुनाव से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस उन्हें अपने साथ लाती है या अखिलेश यादव की नाराजगी INDIA गठबंधन में नई मुश्किल खड़ी करती है।

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