UP Election 2027: UP Election 2027 में सेवता पर नजर, BJP की राह रोक पाएगी SP की चुनौती?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सीतापुर की सेवता सीट पर सियासी हलचल बढ़ गई है। 2022 में BJP के ज्ञान तिवारी ने जीत दर्ज की थी और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी BJP विधानसभा क्षेत्र में आगे रही। लेकिन SP की चुनौती और बदलते चुनावी समीकरण मुकाबले को दिलचस्प बना सकते हैं।

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 9, 2026

UP Election 2027:  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज करनी शुरू कर दी हैं। 403 विधानसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम राज्य है। राज्य की 80 लोकसभा सीटें होने के कारण यहां होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी असर डाल सकते हैं। इसी वजह से सीतापुर जिले की सेवता विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर बनी हुई है।

सेवता विधानसभा सीट
सेवता विधानसभा सीट

सेवता में BJP के सामने सीट बचाने की चुनौती

सेवता विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की है। 2022 में भाजपा के ज्ञान तिवारी ने समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह को 20,281 वोटों से हराया था। हालांकि, 2017 की तुलना में जीत का अंतर काफी कम हुआ। ऐसे में भाजपा के सामने 2027 में सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि समाजवादी पार्टी पिछले प्रदर्शन को आधार बनाकर सत्ता पक्ष को कड़ी टक्कर देने की कोशिश करेगी।

सेवता विधानसभा सीट का राजनीतिक और भौगोलिक महत्व

सेवता विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 150वें नंबर पर है। यह सामान्य विधानसभा सीट है और सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। परिसीमन के बाद 2008 में इस विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ था और 2012 में पहली बार यहां विधानसभा चुनाव कराया गया।

ग्रामीण इलाकों की भूमिका होगी अहम

सेवता विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की बड़ी भूमिका है। सेवता, रेउसा, शाहपुर, जहांगीराबाद और आसपास के क्षेत्रों में खेती, रोजगार, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्थिति और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर मतदाताओं का रुख उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

SIR 2026
SIR 2026

2026 की SIR के बाद बदली मतदाता संख्या

2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के मुताबिक सेवता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,97,182 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,64,439 पुरुष और 1,32,743 महिला मतदाता हैं। ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या दर्ज नहीं है।2022 के विधानसभा चुनाव में सेवता में कुल 3,14,101 निर्वाचक थे। इस लिहाज से 2026 की अंतिम सूची में करीब 28.5 हजार मतदाताओं की कमी हुई है। यह लगभग 8.76 प्रतिशत की गिरावट है। 2027 के चुनाव में यह बदलाव राजनीतिक दलों की बूथ स्तर की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका पर रहेगी नजर

सेवता के पुराने चुनावी आकलनों में ब्राह्मण मतदाताओं को प्रभावशाली सामाजिक समूह माना जाता रहा है। मौजूदा विधायक ज्ञान तिवारी भी ब्राह्मण समाज से आते हैं और 2017 तथा 2022 में लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं।हालांकि, निर्वाचन आयोग की मौजूदा मतदाता सूची में जाति के आधार पर ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, यादव या अन्य समुदायों की संख्या अलग-अलग उपलब्ध नहीं होती। इसलिए पुराने सामाजिक अनुमान को आधिकारिक वर्तमान आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा। फिर भी पिछले चुनावी नतीजे भाजपा के व्यापक सामाजिक समर्थन की ओर संकेत करते हैं।

ज्ञान तिवारी
ज्ञान तिवारी

ज्ञान तिवारी की लगातार दूसरी जीत

2017 के विधानसभा चुनाव में ज्ञान तिवारी ने सेवता सीट से पहली बार जीत हासिल की। उन्हें 94,697 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 43,659 वोटों के अंतर से हराया।2022 में भाजपा ने एक बार फिर ज्ञान तिवारी पर भरोसा जताया। उन्होंने 1,08,057 वोट हासिल किए और उनका वोट शेयर 48.43 प्रतिशत रहा। समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह को 87,776 वोट मिले और उनका वोट शेयर 39.34 प्रतिशत था। दोनों के बीच जीत का अंतर 20,281 वोट रहा।

SP vs BJP
SP vs BJP

2022 में BJP और SP के बीच सीधा मुकाबला

2022 के चुनाव में सेवता सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। भाजपा को 1,08,057 और SP को 87,776 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी के आशीष प्रताप सिंह 17,054 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।अन्य उम्मीदवारों में विकासशील इंसान पार्टी की शांति देवी को 4,300 वोट मिले। कांग्रेस का प्रदर्शन भी सीमित रहा। इस चुनाव में भाजपा और SP को मिलाकर करीब 88 प्रतिशत वोट मिले, जिससे साफ हुआ कि मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े राजनीतिक विकल्पों के बीच केंद्रित हो गया था।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
ज्ञान तिवारीBJP1,08,05748.43%
महेंद्र कुमार सिंहSP87,77639.34%
आशीष प्रताप सिंहBSP17,0547.64%
शांति देवीVIP4,3001.93%
डॉ. विजयनाथ अवस्थीकांग्रेस2,9841.34%
NOTA1,9960.89%
BJP की जीत20,2819.09 प्रतिशत अंक
ज्ञान तिवारी विधायक
ज्ञान तिवारी विधायक

2017 में BJP की जीत का अंतर रहा था बड़ा

2017 के चुनाव में सेवता में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी। ज्ञान तिवारी को 94,697 वोट मिले, जबकि BSP के मोहम्मद नसीम 51,038 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। समाजवादी पार्टी के शिव कुमार गुप्ता को 43,488 वोट मिले।इस चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 43,659 वोट रहा। SP और BSP के अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में होने से विपक्षी वोटों का विभाजन हुआ, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
ज्ञान तिवारीBJP94,69744.86%
मोहम्मद नसीमBSP51,03824.18%
शिव कुमार गुप्ताSP43,48820.60%
रामपाल यादवलोकदल13,1306.22%
NOTA2,9901.42%
BJP की जीत43,659
BJP
BJP

2022 में BJP की बढ़त हुई कम

2017 और 2022 के नतीजों की तुलना करने पर सेवता की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। भाजपा के वोट 94,697 से बढ़कर 1,08,057 हो गए। यानी पार्टी को करीब 13,360 अतिरिक्त वोट मिले।इसके विपरीत समाजवादी पार्टी के वोट 43,488 से बढ़कर 87,776 हो गए। यानी SP ने करीब 44 हजार अतिरिक्त वोट हासिल किए। इसका सबसे बड़ा असर जीत के अंतर पर पड़ा, जो 43,659 से घटकर 20,281 रह गया।

Mayawati
Mayawati

BSP के कमजोर प्रदर्शन ने बदला समीकरण

2017 में BSP सेवता में मजबूत स्थिति में थी। उसके उम्मीदवार मोहम्मद नसीम को 51,038 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन 2022 में BSP के आशीष प्रताप सिंह को सिर्फ 17,054 वोट मिले।इस तरह पांच साल में BSP के वोट में करीब 34 हजार की कमी दर्ज हुई। BSP का कमजोर प्रदर्शन और SP के वोट में तेज वृद्धि 2022 में भाजपा बनाम SP के सीधे मुकाबले का प्रमुख कारण बनी।

मुस्लिम और OBC वोट भी होंगे महत्वपूर्ण

सेवता के पुराने सामाजिक आकलनों में मुस्लिम मतदाताओं को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि 2026 की आधिकारिक मतदाता सूची में धर्म या जाति के आधार पर मतदाताओं की अलग संख्या उपलब्ध नहीं है।2027 में किसी भी विपक्षी दल के लिए केवल मुस्लिम या यादव मतदाताओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। SP को OBC, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच भी अपना आधार मजबूत करना होगा। इसी तरह भाजपा के लिए गैर-यादव OBC और अन्य सामाजिक समूहों का समर्थन बनाए रखना अहम होगा।

ठाकुर मतदाताओं का रुख भी असर डालेगा

पुराने चुनावी आकलनों में ठाकुर मतदाताओं को भी सेवता में प्रभावशाली समूह माना जाता रहा है। 2027 में प्रत्याशी की सामाजिक पृष्ठभूमि और स्थानीय स्वीकार्यता इस वर्ग के रुख को प्रभावित कर सकती है।यदि विपक्ष किसी मजबूत स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारता है और उसे विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन मिलता है, तो भाजपा के पारंपरिक सामाजिक आधार पर असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा यदि अपने मौजूदा समर्थन को बनाए रखती है तो सीट पर उसकी स्थिति मजबूत रह सकती है।

लोकसभा
लोकसभा

2024 लोकसभा चुनाव ने दिया अहम संकेत

2024 के लोकसभा चुनाव में सीतापुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के राकेश राठौर ने भाजपा के राजेश वर्मा को 89,641 वोटों के अंतर से हराया था। लेकिन सेवता विधानसभा खंड में तस्वीर अलग रही।सेवता में भाजपा के राजेश वर्मा को 99,662 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के राकेश राठौर को 85,837 वोट मिले। यानी इस विधानसभा खंड में भाजपा को 13,825 वोटों की बढ़त मिली। पूरे सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में विपक्ष की जीत के बावजूद सेवता में भाजपा का आगे रहना उसके लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

सेवता में BJP की बढ़त विपक्ष के लिए चुनौती

2024 के लोकसभा चुनाव में सीतापुर की पांच विधानसभा सीटों में सेवता ऐसा विधानसभा खंड था जहां भाजपा को बढ़त मिली। सीतापुर सदर, लहरपुर, बिसवां और महमूदाबाद में कांग्रेस आगे रही।हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। दोनों चुनावों में मुद्दे, प्रत्याशी और गठबंधन की परिस्थितियां अलग होती हैं। फिर भी 2024 का प्रदर्शन भाजपा के लिए सेवता में संगठनात्मक मजबूती का संकेत देता है।

महिला मतदाता बन सकती हैं निर्णायक

2026 की अंतिम मतदाता सूची में सेवता में 1,32,743 महिला मतदाता हैं। ऐसे में महिला वोटरों का रुख 2027 के चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।महिलाओं के बीच सरकारी योजनाओं का लाभ, कानून व्यवस्था, महंगाई, राशन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रभाव डाल सकते हैं। करीबी मुकाबले में महिला मतदाताओं के वोट का छोटा बदलाव भी चुनाव परिणाम पर बड़ा असर डाल सकता है।

स्थानीय मुद्दे तय कर सकते हैं चुनावी दिशा

सेवता की ग्रामीण प्रकृति को देखते हुए स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसानों के लिए सिंचाई, फसल, खाद और बाजार से जुड़े सवाल अहम रहेंगे। इसके अलावा ग्रामीण सड़कें, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार भी मतदाताओं के बीच चर्चा में रह सकते हैं।बाढ़ और जलभराव से प्रभावित इलाकों में तटबंध, कटान, राहत और सड़क संपर्क जैसे विषय भी चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। उम्मीदवारों के लिए केवल जातीय समीकरण के बजाय स्थानीय समस्याओं पर स्पष्ट समाधान देना जरूरी होगा।

Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav

SP के सामने सामाजिक विस्तार की चुनौती

समाजवादी पार्टी के लिए 2022 का प्रदर्शन उत्साह बढ़ाने वाला रहा। पार्टी ने 2017 की तुलना में लगभग दोगुने वोट हासिल किए और भाजपा की जीत का अंतर काफी कम कर दिया।लेकिन 2027 में SP को अपने पुराने वोट बैंक को बनाए रखने के साथ नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ानी होगी। मुस्लिम और यादव आधार के अलावा OBC, दलित और अन्य मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाना पार्टी के लिए अहम चुनौती होगी।

कांग्रेस और BSP
कांग्रेस और BSP

कांग्रेस और BSP की भूमिका भी अहम

2024 में कांग्रेस को सेवता विधानसभा खंड में 85,837 वोट मिले थे, लेकिन इसे विधानसभा चुनाव में पार्टी का स्थायी वोट बैंक नहीं माना जा सकता। 2024 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन में थे।2027 में यदि दोनों दल गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हैं तो प्रत्याशी चयन और सीट बंटवारा महत्वपूर्ण होगा। वहीं अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में विपक्षी वोटों के विभाजन का खतरा बढ़ सकता है। BSP का प्रदर्शन भी भाजपा और SP के बीच मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

2012 से बदलता रहा सेवता का चुनावी इतिहास

सेवता में 2012 का चुनाव समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया था। महेंद्र कुमार सिंह ने 49,510 वोट हासिल कर कांग्रेस के अम्मार रिजवी को 2,447 वोटों के अंतर से हराया था। कांग्रेस को 47,063 और BSP की रंजना बाजपेयी को 39,208 वोट मिले थे।इसके बाद 2017 में भाजपा ने बड़ी वापसी की। ज्ञान तिवारी ने 43,659 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। 2022 में भी उन्होंने सीट बचाए रखी, हालांकि इस बार जीत का अंतर घटकर 20,281 वोट रह गया।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
महेंद्र कुमार सिंहSP49,51028.08%
अम्मार रिजवीकांग्रेस47,06326.69%
रंजना बाजपेयीBSP39,20822.24%
शिव कुमार गुप्ताजनवादी पार्टी (सोशलिस्ट)17,4739.91%
मो. सामी खाननिर्दलीय9,2285.23%
BJP2,5941.47%
SP की जीत2,447

सेवता के तीन चुनावों का रिकॉर्ड

चुनाव वर्षविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012महेंद्र कुमार सिंहSP49,5102,447
2017ज्ञान तिवारीBJP94,69743,659
2022ज्ञान तिवारीBJP1,08,05720,281

इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2012 में मामूली जीत के बाद भाजपा ने 2017 में बड़ा उलटफेर किया। 2022 में पार्टी ने जीत तो दोहराई, लेकिन विपक्ष के मजबूत होने के कारण जीत का अंतर काफी कम हो गया।

प्रत्याशी चयन
प्रत्याशी चयन

2027 में प्रत्याशी चयन बदल सकता है समीकरण

सेवता में 2027 का चुनाव प्रत्याशी चयन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा। यदि भाजपा ज्ञान तिवारी को फिर टिकट देती है तो उनकी लगातार दो जीत और स्थानीय पहचान पार्टी के पक्ष में जा सकती है।वहीं विपक्ष यदि मजबूत स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारता है और विभिन्न सामाजिक समूहों को एक साथ जोड़ने में सफल रहता है, तो मुकाबला काफी कठिन हो सकता है। BSP का मजबूत उम्मीदवार चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की क्षमता भी रखता है।

BJP के लिए बढ़त के साथ सतर्क रहने की जरूरत

पिछले चुनावी आंकड़ों के आधार पर भाजपा सेवता में फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। 2017 और 2022 की लगातार जीत तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा खंड के भीतर बढ़त पार्टी के पक्ष में सकारात्मक संकेत हैं।हालांकि जीत का अंतर लगातार कम होना और SP के वोट में तेज वृद्धि भाजपा के लिए चेतावनी भी है। पार्टी को अपने मौजूदा सामाजिक आधार के साथ नए मतदाताओं और महिला वोटरों तक भी प्रभावी पहुंच बनानी होगी।

विपक्ष के पास भी वापसी का रास्ता

समाजवादी पार्टी के पास सेवता में वापसी की संभावनाएं मौजूद हैं। 2022 में पार्टी ने भाजपा के खिलाफ अपना प्रदर्शन काफी मजबूत किया था। यदि 2027 में विपक्षी वोटों का विभाजन कम होता है और SP विभिन्न सामाजिक समूहों को एकजुट करने में सफल रहती है, तो मुकाबला करीबी हो सकता है।कांग्रेस के साथ गठबंधन, BSP के प्रदर्शन और उम्मीदवार की स्थानीय स्वीकार्यता भी विपक्ष की रणनीति को प्रभावित करेगी। भाजपा के वोट आधार में मामूली सेंध भी करीबी मुकाबले में बड़ा अंतर पैदा कर सकती है।

2027 में इन मुद्दों पर रहेगी नजर

सेवता विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं का रुख, मुस्लिम और OBC वोटों का वितरण, दलित मतदाताओं की पसंद, महिला वोटर, उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और BJP-SP के बीच मुकाबले की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।इसके अलावा 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बदले बूथ समीकरण को भी राजनीतिक दलों को समझना होगा। ग्रामीण विकास, किसानों की समस्याएं, रोजगार, सड़क, बिजली और कानून व्यवस्था जैसे स्थानीय मुद्दे भी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।

सेवता में मुकाबला आसान नहीं

सेवता विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। 2012 में SP ने मामूली अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि 2017 में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा ने दोबारा सीट जीती, लेकिन जीत का अंतर घट गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सेवता विधानसभा खंड में भाजपा आगे रही।फिलहाल इन आंकड़ों के आधार पर भाजपा को शुरुआती बढ़त दिखाई देती है, लेकिन SP की बढ़ती ताकत और संभावित विपक्षी एकजुटता मुकाबले को रोचक बना सकती है। 2027 का अंतिम समीकरण उम्मीदवारों की घोषणा, गठबंधन की स्थिति और स्थानीय मुद्दों के स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में सेवता विधानसभा सीट पर BJP की राह फिलहाल मजबूत जरूर दिख रही है, लेकिन विपक्ष के पास मुकाबला कड़ा करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

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