
UP Election 2027: सूबे की 403 विधानसभा सीटों पर मिलने वाली जीत-हार केवल राज्यों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहती। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। पूर्वांचल की सियासी जंग से लेकर पश्चिमी यूपी के जाटलैंड और बुंदेलखंड के बीहड़ तक—हर इलाके का अपना एक अनूठा चुनावी इतिहास और जटिल सामाजिक-जातीय गणित रहा है।
एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी अपने हिंदुत्व, सुशासन और गैर-यादव ओबीसी व गैर-जाटव दलितों के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के सहारे अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और ‘MY’ समीकरण के पारंपरिक जनाधार को विस्तार देकर सत्ता वापसी का दावा कर रही है। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी अपने कैडर वोट बैंक को सहेजने और कांग्रेस अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ नए समीकरणों के जरिए सेंधमारी करने की फिराक में है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की सरधना उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों में से एक है। ऐतिहासिक रूप से महाभारत कालीन मान्यताओं और बेगम समरू के चर्च के लिए प्रसिद्ध सरधना चुनावी समर में अपनी तीखी गोलबंदी और बड़े सियासी उलटफेरों के लिए जानी जाती है।
भौगोलिक क्षेत्र और प्रशासनिक रूपरेखा

सरधना विधानसभा क्षेत्र मेरठ जिले का हिस्सा है और यह मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
प्रमुख क्षेत्र: इसमें सरधना नगर पालिका परिषद, दौराला, हर्रा और खिवाई नगर पंचायतें तथा सरधना और दौराला विकासखंड के लगभग 135 गांव शामिल हैं।
मतदाताओं की कुल संख्या
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सरधना में मतदाताओं की स्थिति निम्न प्रकार है:
| वर्ग | मतदाताओं की संख्या |
| कुल मतदाता | ~3,61,816 |
| पुरुष मतदाता | ~1,97,169 |
| महिला मतदाता | ~1,64,588 |
| थर्ड जेंडर | 59 |
जातिगत समीकरण और वोट प्रतिशत
सरधना सीट पर किसी एक जाति का एकाधिकार नहीं है, बल्कि यह बहु-जातीय और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है।
मुस्लिम: ~75,000 से 80,000 (लगभग 21-22%)
दलित (जाटव व अन्य): ~65,000 (लगभग 18%)
ठाकुर (राजपूत): ~50,000 (लगभग 14%)
गुर्जर: ~35,000 (लगभग 10%)
सैनी/ओबीसी: ~30,000 (लगभग 8%)
जाट: ~15,000 से 25,000 (लगभग 5-7%)
ब्राह्मण व वैश्य: ~15,000 (लगभग 4%)
अन्य (कश्यप, प्रजापति आदि): शेष प्रतिशत
चुनावी इतिहास (2012 से 2022 तक): किसका कितना रहा दमखम
2012 विधानसभा चुनाव
विजेता: संगीत सिंह सोम (भाजपा) – 62,438 वोट

उपविजेता: हाजी मोहम्मद याकूब (RLD) – 50,164 वोट
तीसरा स्थान: अतुल प्रधान (सपा) – 48,023 वोट
जीत का अंतर: 12,274 वोट

2017 विधानसभा चुनाव
विजेता: संगीत सिंह सोम (भाजपा) – 97,921 वोट
उपविजेता: अतुल प्रधान (सपा) – 76,296 वोट
तीसरा स्थान: हाफिज इमरान याकूब (बसपा) – 57,239 वोट
जीत का अंतर: 21,625 वोट
2022 विधानसभा चुनाव
विजेता: अतुल प्रधान (सपा) – 1,18,573 वोट (48.75%)

उपविजेता: संगीत सिंह सोम (भाजपा) – 1,00,373 वोट (41.27%)
तीसरा स्थान: संजीव धामा (बसपा) – 18,140 वोट
जीत का अंतर: 18,200 वोट
आगामी 2027 चुनाव: कौन–कौन ठोक सकता है ताल?
अतुल प्रधान (समाजवादी पार्टी): वर्तमान विधायक अतुल प्रधान अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में उतरेंगे। सपा-कांग्रेस गठबंधन की बदौलत मुस्लिम-गुर्जर-ओबीसी-दलित गठजोड़ के सहारे वह दोबारा जीत का दावा करेंगे।
संगीत सिंह सोम (भारतीय जनता पार्टी): भाजपा के पूर्व विधायक और फायरब्रांड नेता संगीत सोम एक बार फिर भाजपा के मुख्य दावेदार के रूप में सामने हैं। भाजपा-रालोद गठबंधन के बाद वह ठाकुर-जाट-ओबीसी वोटों को एकजुट कर सीट वापस छीनने की फिराक में हैं। (हालांकि भाजपा में अन्य स्थानीय दावेदारों के नाम भी चर्चा में रहते हैं)।
विनीत भराला / बसपा प्रत्याशी (बहुजन समाज पार्टी): बसपा इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बनाने के मूड में है। बसपा द्वारा जाट या मुस्लिम/दलित चेहरे पर दांव लगाए जाने की चर्चाएं हैं। विनीत भराला जैसे चेहरों को लेकर भी कयासबाजी जारी है।
सरधना विधानसभा सीट की प्रमुख स्थानीय समस्याएं
चुनाव भले ही बड़े राजनीतिक चेहरों और जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमता दिखता हो, लेकिन धरातल पर सरधना की जनता बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है:
बस अड्डे और सरकारी डिग्री कॉलेज का अभाव

सरधना एक बड़ा और ऐतिहासिक कस्बा है, लेकिन यहां सालों पुरानी बस अड्डे की मांग आज तक अधूरी है। यात्रियों को सड़कों के किनारे बस का इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा, युवाओं व छात्राओं के लिए एक राजकीय डिग्री कॉलेज न होने के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए मेरठ शहर या अन्य दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है।
जर्जर सड़कें और भीषण ट्रैफिक जाम
सरधना-बिनौली रोड सहित कई मुख्य और संपर्क सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कस्बे के मुख्य चौराहों और बाज़ारों में पार्किंग की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना लंबा ट्रैफिक जाम लगता है।
जलभराव और सीवरेज/जल निकासी की समस्या
सरधना कस्बे और लावड़ क्षेत्र में नालियों की सही सफाई न होने और जल निकासी का पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हल्की बारिश में भी गलियां और मुख्य सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। पानी लोगों के घरों तक में घुस जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों में स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा रोष है।
फायर स्टेशन की पुरानी मांग
व्यापारिक और घनी आबादी वाला क्षेत्र होने के बावजूद सरधना में अग्निशमन केंद्र (फायर स्टेशन) नहीं है। आपात स्थिति या आगजनी की घटना होने पर दमकल गाड़ियों को मेरठ से बुलाना पड़ता है, जिससे भारी नुकसान का अंदेशा बना रहता है।
गंगनहर के पास डंपिंग ग्राउंड व सफाई की अव्यवस्था
तहसील रोड और आबादी वाले इलाकों के पास अनियोजित तरीके से कचरा डंप किया जाता है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट या कूड़ा निस्तारण प्लांट न होने से स्थानीय अंसार नगर और आसपास के निवासियों को बदबू और बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
वकीलों व जन सामान्य की ‘हाईकोर्ट बेंच‘ की मांग
मेरठ समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग लंबे समय से चल रही है, जिसमें सरधना के अधिवक्ता और स्थानीय लोग भी लगातार आंदोलनरत रहे हैं।
सरधना विधानसभा क्षेत्र में विधायक अतुल प्रधान (सपा) और पूर्व विधायक संगीत सोम (भाजपा) के बीच का सियासी संघर्ष हमेशा सुर्खियों में रहता है। 2027 के चुनाव में जनता केवल पार्टी के सिंबल या बड़े वादों पर नहीं, बल्कि सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी अपना मत तय करेगी। भाजपा जहां कानून-व्यवस्था और डबल इंजन सरकार के विकास दावों के सहारे वापसी की उम्मीद कर रही है, वहीं सपा स्थानीय मुद्दों पर घेरकर अपनी सीट बचाने के प्रयास में है।











