UP Election 2027: यूपी में कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग तेज, लखनऊ में लगे पोस्टर, अनुप्रिया और पल्लवी पटेल से एकजुट होने की अपील

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग तेज होने लगी है। लखनऊ में लगाए गए पोस्टरों के जरिए अनुप्रिया पटेल, पल्लवी पटेल और डॉ. आरएस पटेल समेत समाज के नेताओं से एकजुट होने की अपील की गई है। कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति 2 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत आयोजित करने की तैयारी में है।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 19, 2026

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कुर्मी समाज के मुख्यमंत्री की मांग तेज होने लगी है। राजधानी लखनऊ में कई प्रमुख जगहों पर पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। इनके जरिए कुर्मी समाज के नेताओं से एकजुट होकर राजनीतिक ताकत दिखाने की अपील की गई है। अब 2 नवंबर को लखनऊ में कुर्मी समाज की महापंचायत कराने की तैयारी है।

यूपी में कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग, लखनऊ में लगे पोस्टर

बताते चले कि, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अभी से तेज होने लगी है। इसी बीच कुर्मी समाज से मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग भी जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। राजधानी लखनऊ में जगह-जगह लगाए गए पोस्टरों ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। इन पोस्टरों के जरिए समाज की एकता और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा है।

लखनऊ के कई प्रमुख स्थानों पर लगाए गए होर्डिंग में बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘2027 में कुर्मी मुख्यमंत्री की बात’। इन पोस्टरों के जरिए समाज के लोगों से एकजुट होने और अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठाने की अपील की गई है। अभियान का संदेश है कि अब समाज के नाम पर राजनीति करने के बजाय समाज के हित और एकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुर्मी समाज के नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश

आपको बता दे कि, ये पोस्टर कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति की ओर से लगाए गए हैं। समिति का मकसद अलग-अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय कुर्मी समाज के नेताओं को एक मंच पर लाना है। इसके लिए नेताओं से राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर समाज के हित में साथ आने की अपील की जा रही है। पोस्टरों में अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल, अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल और डॉ. आरएस पटेल समेत समाज के दूसरे नेताओं का जिक्र किया गया है। समिति चाहती है कि ये नेता आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर कुर्मी समाज की एकता और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर मिलकर काम करें।

अभियान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अगर समाज के नेता एकजुट होकर अपनी मांग उठाते हैं, तो चुनावी राजनीति में उनकी आवाज को ज्यादा मजबूती मिल सकती है। हालांकि, इन पोस्टरों और अपीलों के बीच संबंधित नेताओं की ओर से इस मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।

2 नवंबर को लखनऊ में कुर्मी समाज की महापंचायत की तैयारी

कुर्मी समाज की एकता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को आगे बढ़ाने के लिए अभियान समिति ने 2 नवंबर 2026 को लखनऊ में महापंचायत आयोजित करने की तैयारी की है। इस आयोजन में समाज के विभिन्न संगठनों, बुद्धिजीवियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने की पहल की जा रही है।

महापंचायत में 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान कुर्मी समाज की राजनीतिक भागीदारी और मुख्यमंत्री पद पर प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। इस आयोजन के जरिए समाज के लोगों को एक मंच पर लाने और आगे की रणनीति पर विचार करने की कोशिश की जाएगी।

समिति का मानना है कि समाज की एकता, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर संगठित होकर आवाज उठाना जरूरी है। महापंचायत में इन मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, इस पर भी चर्चा हो सकती है।

चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी हलचल

कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति के संयोजक पटेल अभिषेक चौधरी ने समाज के लोगों से एकजुट होकर आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि कुर्मी समाज को एकता, संगठन, संघर्ष और सम्मान के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की अहम भूमिका रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले कुर्मी समाज के मुख्यमंत्री की मांग को लेकर शुरू हुआ यह अभियान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लखनऊ में पोस्टर लगाने से लेकर महापंचायत की तैयारी तक, समिति इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश कर रही है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2 नवंबर को प्रस्तावित महापंचायत में कितने नेता और संगठन शामिल होते हैं और कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग को लेकर आगे क्या रणनीति बनाई जाती है। साथ ही, अलग-अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय कुर्मी समाज के नेताओं की इस अभियान पर प्रतिक्रिया भी अहम होगी।