UP News: यूपी कांग्रेस कार्यालय में बवाल, कार्यकर्ताओं के बीच चले जूते-चप्पल

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय के अंदर उस समय भारी हंगामा मच गया, जब पार्टी के नए पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण का कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और मामला धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और जूते-चप्पल चलने तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि करीब 10 मिनट से ज्यादा समय तक कार्यालय में हंगामे की स्थिति बनी रही। इस घटना के बाद पार्टी के अंदर आपसी तालमेल और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अजय राय के समर्थकों की नारेबाजी

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 11, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय के अंदर उस समय भारी हंगामा मच गया, जब पार्टी के नए पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण का कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और मामला धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और जूते-चप्पल चलने तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि करीब 10 मिनट से ज्यादा समय तक कार्यालय में हंगामे की स्थिति बनी रही। इस घटना के बाद पार्टी के अंदर आपसी तालमेल और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अजय राय के समर्थकों की नारेबाजी से बढ़ा विवाद

अजय राय के समर्थकों की नारेबाजी से बढ़ा विवाद

बताया जा रहा है कि नए पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थक नारेबाजी करने लगे। फिर क्या था इस पर आराधना मिश्रा मोना के समर्थकों ने नाराजगी जताई। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि कार्यकर्ता एक-दूसरे से भिड़ गए। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के साथ भी बदसलूकी किए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वजह और जिम्मेदारी को लेकर सामने आ रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

महिला नेता और अजय राय के बीच क्या हुआ?

आपको बातते चले कि, हंगामे को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि एक महिला कांग्रेस नेता और अजय राय के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों में कहासुनी शुरू हो गई। धीरे-धीरे मामला बढ़ता गया और कांग्रेस कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति बिगड़ने पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव करने और नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम ने उस कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया, जिसका मकसद प्रदेश कांग्रेस में नई जिम्मेदारियों की औपचारिक शुरुआत करना था।

इमरान मसूद ने अजय राय की गैरमौजूदगी पर क्या कहा?

यूपी कांग्रेस के नए पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजय राय शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर जब कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व अध्यक्ष के शामिल होने की परंपरा नहीं रही है। उनके मुताबिक, पार्टी कार्यालय में अजय राय से कार्यभार ले लिया गया है।

इमरान मसूद ने अजय राय की गैरमौजूदगी पर क्या कहा?

इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है और उनकी कोशिश इस भरोसे पर खरा उतरने की होगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बदलाव लाने और कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की बात भी कही। साथ ही, उन्होंने इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि गठबंधन मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा।

आराधना मिश्रा मोना ने संभाली यूपी कांग्रेस की कमान

आराधना मिश्रा मोना ने संभाली यूपी कांग्रेस की कमान

हंगामे के बीच आराधना मिश्रा मोना ने रविवार को नवरात्र के पहले दिन औपचारिक रूप से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया। यानी कार्यक्रम में विवाद की खबरों के बावजूद पदभार हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई।

यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए प्रदेश संगठन में बदलाव किया है। आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले अजय राय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें 17 अगस्त 2023 को इस पद पर नियुक्त किया गया था। उनसे पहले बृजलाल खाबरी प्रदेश अध्यक्ष थे।

अब कांग्रेस के सामने नई टीम के साथ संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में पदभार ग्रहण के दौरान सामने आया विवाद पार्टी के लिए चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रदेश नेतृत्व आपसी मतभेदों को दूर कर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए क्या कदम उठाता है।