
UP Congress Controversy: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बीच शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी से जुड़े विवाद के बाद पार्टी ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी करेंगे। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपनी है। रिपोर्ट आने के बाद विवाद में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
कांग्रेस मुख्यालय में 11 अक्टूबर को क्या हुआ था?
बताते चले कि, यह पूरा मामला 11 अक्टूबर को नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण समारोह से जुड़ा है। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई। मामला बढ़ने पर धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई। इस दौरान जूते-चप्पल फेंके जाने की खबरें भी सामने आईं।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान सार्वजनिक हो गई। नेतृत्व परिवर्तन के मौके पर हुए इस हंगामे ने कांग्रेस संगठन में अनुशासन और नेताओं के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
सात दिन में रिपोर्ट, इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मामले की पूरी जानकारी जुटाने के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में सह-प्रभारी अभिषेक दत्त और अब्दुल हन्नान, पूर्व सांसद रवि वर्मा तथा महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शमीना शफीक को शामिल किया गया है।
समिति घटना के समय मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज कर सकती है। साथ ही, विवाद की शुरुआत कैसे हुई और हाथापाई में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। पार्टी नेतृत्व यह जानना चाहता है कि वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में प्रदेश मुख्यालय का माहौल इतना खराब कैसे हुआ। जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
अजय राय और ममता चौधरी के बीच विवाद कैसे शुरू हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के प्रवेश द्वार और गलियारे में रास्ता देने को लेकर शुरू हुआ। कार्यक्रम के दौरान निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को नवनियुक्त अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ को कार्यभार सौंपना था। इसी बीच रास्ता खाली कराने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी होने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि अजय राय के समर्थकों ने रास्ता देने को कहा, जिस पर ममता चौधरी की ओर से कथित तौर पर सवाल उठाया गया। इसके बाद बहस बढ़ी और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। हालांकि, विवाद की शुरुआत को लेकर सामने आई जानकारी और आरोपों की पुष्टि जांच समिति करेगी।
ममता चौधरी और अजय राय पक्ष ने लगाए अलग-अलग आरोप
ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि अजय राय के समर्थकों ने उनके साथ मौजूद महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। वहीं, अजय राय के समर्थकों की ओर से निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष के साथ अपमानजनक व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं, इसलिए जांच में बयान और उपलब्ध साक्ष्य अहम होंगे।

ममता चौधरी कांग्रेस की महिला नेता हैं और लखनऊ नगर निगम में पार्षद भी हैं। वह महिला कांग्रेस के संगठनात्मक काम में सक्रिय रही हैं और सेंट्रल जोन की अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। इस विवाद के बाद महिला कार्यकर्ताओं के सम्मान और पार्टी के भीतर आपसी तालमेल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के सामने चुनौती
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच यह विवाद कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। पार्टी ने हाल ही में नेतृत्व में बदलाव किया है और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे समय में प्रदेश मुख्यालय में सार्वजनिक रूप से हुआ हंगामा संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।
नई प्रदेश अध्यक्ष के सामने संगठन को मजबूत करने, गुटबाजी पर नियंत्रण रखने और कार्यकर्ताओं में अनुशासन बनाए रखने की चुनौती है। अब सबकी नजर सात दिनों के भीतर आने वाली जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट से पता चलेगा कि पार्टी इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय करती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।











