UP Brahmin Politics: शंकराचार्य विवाद के बीच ब्रजेश पाठक का बड़ा कदम, 101 बटुकों के सम्मान से सियासी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश की सियासत में जब शंकराचार्य विवाद ने तूल पकड़ा, तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चुप बैठने के बजाय एक ऐसी तस्वीर पेश की जिसने विरोधियों के होश उड़ा दिए। 101 बटुकों का पूजन और मंत्रोच्चार के बीच सम्मान—क्या यह यूपी के ब्राह्मणों को एकजुट करने का मास्टरस्ट्रोक है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

UP Brahmin Politics:  माघ मेले के दौरान Swami Avimukteshwaranand के साथ मौजूद बटुकों की शिखा खींचे जाने के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद राज्य सरकार स्पष्ट रूप से डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनाती नजर आई। आरोप सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर संतों के अपमान का मुद्दा उठाया, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया। इसी बीच सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने बयान देकर स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है।

ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का किया सम्मान

उपमुख्यमंत्री Brijesh Pathak ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। उन्होंने सभी को फूल-मालाएं पहनाईं, तिलक लगाया और उनकी शिखा का आदर करते हुए आशीर्वाद भी लिया। इस पहल को विवाद के बाद संत समाज को संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम के जरिए यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि सरकार सनातन परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान करती है।

‘शिखा खींचना महापाप’—पाठक का सख्त संदेश

ब्रजेश पाठक ने इस अवसर पर कहा कि ब्राह्मणों की शिखा खींचना महापाप के समान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को भी किसी अन्य व्यक्ति को छूने या अपमानित करने का अधिकार नहीं है। उनका यह बयान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के रुख से कुछ अलग माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल के भीतर एकरूपता पूरी तरह नहीं दिख रही है।

बटुकों की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग

उपमुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे बटुकों ने कहा कि शिखा सनातन धर्म की पहचान है और इसे खींचना आस्था का अपमान है। उन्होंने ब्रजेश पाठक की पहल को सराहनीय बताया और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बीजेपी के भीतर मतभेदों के संकेत

इस प्रकरण में पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और फिर ब्रजेश पाठक के बयान सामने आए, जिससे यह संकेत मिला कि सरकार के भीतर अलग-अलग मत हो सकते हैं। इस स्थिति ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का अवसर दिया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कहा कि अलग-अलग बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर विचारों में भिन्नता है और जनता को समझना चाहिए कि सनातन के करीब कौन है।

अखिलेश और शिवपाल का सरकार पर हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने ‘पाप’ शब्द को लेकर तंज कसा और कहा कि सब लोग आएं और अपने शब्दों व कर्मों के पाप मिटाएं। वहीं शिवपाल यादव ने कहा कि यदि यह घटना पाप है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विपक्ष इस विवाद को कानून-व्यवस्था और धार्मिक सम्मान से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटा है।

ओपी राजभर और कपिल देव अग्रवाल की सफाई

मंत्री Om Prakash Rajbhar ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है और इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। वहीं मंत्री Kapil Dev Agarwal ने दावा किया कि सरकार संतों का सम्मान करती है और विवाद अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति का अपमान जाति के आधार पर नहीं होना चाहिए।

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