UP Assembly Special Session: 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र, महिला आरक्षण पर होगा बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र आमंत्रित किया है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण बिल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना और विपक्षी दलों के कथित "नकारात्मक रवैये" की घेराबंदी करना है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 20, 2026

UP Assembly Special Session: उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक नया मोड़ लेने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने आगामी 30 अप्रैल को उत्तर प्रदेश विधानमंडल का एक विशेष सत्र आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। रविवार को ‘कैबिनेट बाई सर्कुलेशन’ के माध्यम से इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसे आज सोमवार को औपचारिक स्वीकृति के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास भेजा जाएगा।

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विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा और रणनीति

इस विशेष सत्र के आयोजन के पीछे सरकार की रणनीति बेहद स्पष्ट है। सत्र का प्राथमिक उद्देश्य महिला आरक्षण बिल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराना और इसके समर्थन में एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित करना है। हालांकि, इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद हिस्सा वह निंदा प्रस्ताव हो सकता है, जिसे विपक्षी दलों के “नकारात्मक रवैये” के खिलाफ पेश किए जाने की चर्चा है।

योगी सरकार सदन में यह स्पष्ट करना चाहती है कि भाजपा महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है, जबकि विपक्षी दल इसमें रोड़े अटका रहे हैं। सरकार इस मंच का उपयोग आगामी चुनावों से पहले विपक्ष की घेराबंदी करने और जनता के बीच उन्हें ‘महिला विरोधी’ साबित करने के लिए कर सकती है।

सीएम योगी का तीखा हमला

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर मचे घमासान के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमलावर हैं। उन्होंने विपक्षी गठबंधन (INDI Alliance) के आचरण की कड़ी आलोचना करते हुए इसकी तुलना महाभारत काल के ‘द्रौपदी चीरहरण’ से की है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन के भीतर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके का व्यवहार वैसा ही था जैसा भरी सभा में द्रौपदी के अपमान के समय कौरवों का था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने जिस तरह की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की हैं, वह उनके असली चेहरे को उजागर करता है। योगी आदित्यनाथ का यह कड़ा रुख संकेत दे रहा है कि 30 अप्रैल का सत्र केवल विधायी कार्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक राजनीतिक रणक्षेत्र बनेगा।

PDA कार्ड और हंगामे के आसार

दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) भी चुप बैठने के मूड में नहीं है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ने इस विशेष सत्र के दौरान सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। सपा का तर्क है कि महिला आरक्षण में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल चुनावी लाभ के लिए यह बिल लाई है और ‘परिसीमन’ जैसी शर्तों के जरिए लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि जब तक पिछड़ों और दलितों की भागीदारी तय नहीं होती, यह आरक्षण अधूरा है।

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