Ukraine Peace Resolution: UNGA में यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर वोटिंग से भारत ने बनाई दूरी, चीन और अमेरिका के रुख ने भी दुनिया को चौंकाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के लिए लाए गए शांति प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान भारत ने एक बार फिर तटस्थता अपनाई है। इस बीच, चीन की रहस्यमयी चुप्पी और अमेरिका के आक्रामक रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए समीकरण पैदा कर दिए हैं, जिससे पूरी दुनिया हैरान है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

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Ukraine Peace Resolution: रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष के चार साल पूरे होने के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक महत्वपूर्ण शांति प्रस्ताव पेश किया गया। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को हुए इस मतदान के दौरान भारत ने एक बार फिर अपनी तटस्थता की नीति को दोहराते हुए वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव में यूक्रेन में तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम (Ceasefire) की मांग की गई थी। हालांकि 193 सदस्यीय महासभा ने इस प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया, लेकिन भारत का मतदान से दूर रहना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली संघर्ष के समाधान के लिए केवल बातचीत और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानती है।

वोटों का समीकरण: 107 देशों ने किया समर्थन, 51 देशों ने बनाई दूरी

यूक्रेन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को ‘यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए समर्थन’ का नाम दिया गया था। मतदान के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय विभाजित नजर आया। कुल 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 12 देशों ने इसका कड़ा विरोध किया। भारत सहित 51 देशों ने वोटिंग प्रक्रिया से खुद को बाहर रखा। इस प्रस्ताव में न केवल शांति की मांग की गई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यूक्रेन की सीमाओं और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का भी पुरजोर समर्थन किया गया। यद्यपि ये प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन इनकी राजनीतिक अहमियत और प्रतीकात्मक शक्ति काफी अधिक होती है।

भारत और चीन का एक जैसा स्टैंड: ट्रंप प्रशासन के रुख ने चौंकाया

दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर दुनिया की दो उभरती शक्तियां, भारत और चीन, एक ही पाले में नजर आईं। दोनों देशों ने मतदान से अनुपस्थित रहकर रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों और संतुलित विदेश नीति का संकेत दिया। सबसे अधिक चर्चा अमेरिका के रुख की हो रही है; ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में अमेरिका का इस वोटिंग से दूरी बनाना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। भारत और चीन के अलावा ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लेकर शांति के लिए वैकल्पिक रास्तों की वकालत की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विफलता और महासचिव की चिंता

रूस-यूक्रेन युद्ध के चार वर्षों के दौरान, 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) पूरी तरह से पंगु साबित हुई है। रूस के पास वीटो पावर होने के कारण परिषद कोई भी ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “यूक्रेन युद्ध हमारे सामूहिक विवेक पर एक दाग बना हुआ है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चार्टर का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर तुरंत युद्ध रोकने की अपील की। महासचिव ने आगाह किया कि सुरक्षा परिषद का ‘डेडलॉक’ अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक गंभीर खतरा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति का आभार: अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए नई उम्मीद?

प्रस्ताव पारित होने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति ने उन 107 देशों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके पक्ष में मतदान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जो देश यूक्रेन के साथ खड़े हैं, वे वास्तव में ‘जिंदगी बचाने’ और न्याय के पक्ष में खड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि भारत और अमेरिका जैसे देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं। भारत का रुख हमेशा से यही रहा है कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार रूसी नेतृत्व से सीधे संवाद कर शांति की अपील की है।

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