UK Tilak Controversy: लंदन के स्कूल में हिंदू परंपरा पर पहरा, छात्र के माथे पर तिलक देख भड़के स्कूल टीचर

लंदन के एक प्रतिष्ठित स्कूल में उस वक्त तनाव फैल गया जब एक हिंदू छात्र को केवल 'तिलक' लगाने के कारण कैंपस से बाहर कर दिया गया। स्कूल का तर्क है कि यह यूनिफॉर्म पॉलिसी का उल्लंघन है, जबकि हिंदू समुदाय इसे धार्मिक भेदभाव बता रहा है। आखिर ब्रिटिश कानून क्या कहता है?

UK Tilak Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 20, 2026

UK  Tilak Controversy: ब्रिटेन की राजधानी लंदन से सामने आए एक मामले ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और समावेशिता की नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 8 वर्षीय हिंदू छात्र को कथित तौर पर उसकी धार्मिक पहचान के कारण मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जिसके बाद उसे मजबूरन स्कूल छोड़ना पड़ा। इस घटना ने न सिर्फ ब्रिटिश हिंदू समुदाय, बल्कि भारतीय प्रवासी समाज में भी गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।

तिलक बना उत्पीड़न की वजह

यह मामला लंदन के विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल से जुड़ा है। आरोप है कि छात्र जब अपने माथे पर हिंदू धर्म का पारंपरिक प्रतीक ‘तिलक’ लगाकर स्कूल गया, तो उसे बार-बार सवालों और टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बच्चे के परिजनों का कहना है कि स्कूल में तिलक को लेकर उसे अलग तरह से देखा गया, जिससे वह असहज और डरा हुआ महसूस करने लगा। धीरे-धीरे यह व्यवहार बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगा।

प्रधानाध्यापक के रवैये से बढ़ी परेशानी

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब स्कूल के प्रधानाध्यापक ने लंच ब्रेक और अवकाश के दौरान बच्चे पर विशेष निगरानी रखनी शुरू कर दी। बच्चे ने अपने माता-पिता को बताया कि यह व्यवहार उसे डराने और दबाव में लाने जैसा लगा। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसकी धार्मिक आस्था के कारण उसे स्कूल की जिम्मेदारी से जुड़े कुछ पदों और गतिविधियों से भी दूर रखा गया।

अभिभावकों की शिकायत और स्कूल का विवादित तर्क

छात्र के माता-पिता ने अन्य हिंदू अभिभावकों के साथ मिलकर स्कूल प्रशासन से बातचीत की। उन्होंने हिंदू धर्म में तिलक के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझाने की कोशिश की। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। स्कूल का तर्क था कि हिंदू धर्म में तिलक अनिवार्य धार्मिक प्रतीक नहीं है, इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पर अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब मुस्लिम छात्रों को हिजाब पहनने की छूट है, तो हिंदू छात्रों के साथ अलग व्यवहार क्यों।

धार्मिक भेदभाव का आरोप

इस पूरे मामले में सामाजिक संगठन INSIGHT UK ने खुलकर हस्तक्षेप किया है। संगठन ने इसे स्पष्ट रूप से धार्मिक भेदभाव का मामला बताया है। INSIGHT UK का कहना है कि किसी भी धर्म के प्रतीकों को लेकर इस तरह का रवैया अस्वीकार्य है और यह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। संस्था ने स्कूल प्रशासन के फैसले को पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण करार दिया है।

समानता अधिनियम 2010 के उल्लंघन की बात

INSIGHT UK के अनुसार, यह घटना ब्रिटेन के समानता अधिनियम 2010 का उल्लंघन है, जो धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। संगठन का कहना है कि कानून के तहत सभी धार्मिक पहचान को समान संरक्षण मिलना चाहिए, चाहे वह तिलक हो, हिजाब हो या कोई अन्य प्रतीक।

शिक्षा प्राधिकरण तक पहुंचा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए INSIGHT UK ने इसे स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण के समक्ष भी उठाया है। संगठन का दावा है कि इस कथित भेदभाव के कारण कम से कम चार हिंदू बच्चों को स्कूल से हटाया गया है। संस्था ने मांग की है कि स्कूलों में सभी बच्चों को बिना डर और भेदभाव के अपनी धार्मिक पहचान के साथ पढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए। यह मामला अब ब्रिटेन में बहुसंस्कृतिवाद की वास्तविक स्थिति पर एक बड़ी बहस का कारण बन गया है।

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