New UGC Guidelines: “गाइडलाइंस में ही भेदभाव निहित हो तो…” UGC बिल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई आपत्ति

UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में विरोध बढ़ रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि गाइडलाइंस में ही जातिगत भेदभाव निहित हो तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने या संशोधित करने की मांग की। छात्रों के भविष्य और समान अवसरों की सुरक्षा पर यह बड़ा सवाल उठाता है।

UGC बिल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई आपत्ति

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 27, 2026

New UGC Guidelines: UGC बिल का मामला सिर्फ आम लोगों में ही नहीं बल्कि राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बिल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन अगर गाइडलाइंस में ही भेदभाव हो तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि ऐसे गाइडलाइंस शोषण को खत्म करने के बजाय नए शोषण को जन्म दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस गाइडलाइन को या तो पूरी तरह वापस लिया जाए या इसमें जरूरी बदलाव किए जाएं।

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शोषित और शोषक की धारणा पर आपत्ति

प्रियंका चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया, “हां, मैं मानती हूं कि काफी समय से जातिगत भेदभाव होता रहा है। इस पर गाइडलाइंस भी बनती हैं। लेकिन अगर इन गाइडलाइंस में ही भेदभाव निहित हो और एक तरफ के लोगों को हमेशा शोषित माना जाए और दूसरी तरफ के लोगों को शोषक, तो यह न्यायसंगत नहीं है। यह जजमेंट बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय छात्रों के करियर को प्रभावित कर सकते हैं।

झूठे मामलों और पेनाल्टी की चिंता

झूठे मामलों और पेनाल्टी की चिंता
झूठे मामलों और पेनाल्टी की चिंता

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि झूठे मामलों की स्थिति में पेनाल्टी क्या होगी। उन्होंने कहा, “अगर सात केस एससी, एसटी, ओबीसी के हों और तीन, दो या एक केस जनरल कैटेगरी के हों, तो किस आधार पर यह तय किया जाएगा कि जातिगत भेदभाव हुआ है? क्या किसी छात्र के भविष्य और करियर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? ऐसे मामलों में पेनाल्टी का प्रावधान होना चाहिए। इस गाइडलाइन को बिना बदलाव के लागू करना उचित नहीं है। देशभर में इसी को लेकर विरोध हो रहा है और यही मांग है कि इसे वापस लिया जाए।”

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सरकार से आग्रह

प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से अपील की कि वे इस निर्णय पर दोबारा विचार करें। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री इस पर सोचेंगे कि यह फैसला किस आधार पर लिया गया। शिक्षा मंत्री से कहूंगी कि इसे जल्द से जल्द वापस लें या इसमें जरूरी बदलाव करें।”

देशभर में माहौल और मांग

प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि पूरे देश में इस बिल को लेकर भारी असंतोष है। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षक समुदाय ने गाइडलाइन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका मानना है कि इस गाइडलाइन में मौलिक सुधार किए बिना इसे लागू करना छात्र हित के खिलाफ होगा।

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