Maharashtra Politics : पार्टी में टूट के बीच उद्धव ठाकरे का बड़ा ऐलान, इस्तीफे की दी पेशकश

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी में अंदरूनी टूट और बढ़ते असंतोष के बीच उद्धव ठाकरे ने इस्तीफे की पेशकश कर सभी को चौंका दिया। उनके इस कदम के पीछे क्या राजनीतिक रणनीति है और इसका पार्टी पर क्या असर पड़ेगा, जानिए पूरी कहानी।

Maharashtra Politics

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 20, 2026

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Maharashtra Politics : शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय होने का दावा किया जा रहा था। पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उद्धव ने स्पष्ट किया कि शिवसेना का अस्तित्व किसी अन्य राजनीतिक दल में समाहित होने के लिए नहीं बना है। उन्होंने कहा कि जो बागी सांसद पार्टी छोड़ने के पीछे कांग्रेस के साथ विलय की आशंका जता रहे हैं, वे केवल अपना बचाव करने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि जब 30 वर्षों तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद शिवसेना का भाजपा में विलय नहीं हुआ, तो कांग्रेस में विलय का सवाल ही पैदा नहीं होता।

कांग्रेस पर पुरानी कड़वाहट और बालासाहेब का संदर्भ

उद्धव ठाकरे ने स्वीकार किया कि कांग्रेस के साथ उनका राजनीतिक संघर्ष दशकों पुराना रहा है। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि कांग्रेस ने हमें कभी परेशान नहीं किया। हमारा आधा राजनीतिक जीवन कांग्रेस के विरोध में बीता है क्योंकि बालासाहेब ठाकरे उस समय भाजपा के साथ मजबूती से खड़े थे।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस ने भले ही पार्टी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन मातोश्री की ओर कभी लालच भरी नज़रों से नहीं देखा और न ही कभी शिवसेना के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर धोखा दिया। उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कम से कम अपने शब्दों का सम्मान तो किया।

पद छोड़ने को तैयार, लेकिन पार्टी ‘चोरों’ को नहीं सौंपेंगे

पार्टी के भीतर जारी संकट और बागी सांसदों के बगावती सुरों पर बोलते हुए उद्धव ठाकरे भावुक और आक्रामक दोनों नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगता है कि उन्हें पद छोड़ देना चाहिए, तो वे शिवसेना प्रमुख का पद त्यागने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर पार्टी का ही कोई निष्ठावान व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं किसी भी स्थिति में अपनी पार्टी को ‘चोरों’ या गद्दारों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।” यह बयान उन्होंने सीधे तौर पर उन लोगों को दिया जो शिवसेना के नाम और विरासत पर अपना दावा जता रहे हैं।

बागी सांसदों को निशाने पर लेते हुए शिंदे गुट पर तंज

ठाकरे ने मुंबई के षण्मुखानंद सभागृह में बागी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग कहते हैं कि उद्धव ठाकरे लोगों से मिलते नहीं, वे बताएं कि फिर वे चुनाव जीतकर कैसे आए? उन्होंने अपने साथ बचे चार सांसदों का सम्मान करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि अब वह समय आ गया है जब भाजपा खुद मिंधे (शिंदे) गुट में विलय हो जाएगी। उन्होंने भाजपा पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि उन्हें राजनीति में अपने लोग नहीं मिलते, तो उन्हें शिवसेना के नेताओं को तोड़ने के बजाय अपनी इस ‘बांझपन’ जैसी स्थिति का इलाज ढूंढना चाहिए।

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