Ram Mandir Donation Case: महाराष्ट्र के परभणी में रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “राम मंदिर कम, एक दुकान ज्यादा हो गया है।” ठाकरे ने आगे कहा कि भाजपा का ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है, क्योंकि मंदिर के नाम पर भगवान राम का धंधा शुरू किया गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दान पेटियों में हुई यह चोरी महज धन की लूट नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और हिंदुत्व के साथ किया गया एक विश्वासघात है।
उद्धव ठाकरे ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया
बताते चले कि, अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पेपर लीक होने की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को राज्य के लिए अत्यंत शर्मनाक करार दिया। उद्धव ठाकरे ने सीधा आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले एक खास रसूखदार परिवार से जुड़े हैं, जिसके चलते उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और वे कानून की पकड़ से आसानी से बच निकलते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि ‘धोखे का कीड़ा’ आज पूरे महाराष्ट्र को खोखला कर रहा है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि यदि इस बुराई को समय रहते नहीं कुचला गया, तो यह न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए घातक साबित होगा।
गद्दारी और दल-बदल को लेकर बागी सांसद संजय देशमुख पर प्रहार
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने बागी सांसद संजय देशमुख और भाजपा पर सीधा निशाना साधा। अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से उस निर्णय के लिए माफी मांगी, जिसमें उन्होंने संजय देशमुख को चुनावी मैदान में उतारा था। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक दलबदल और गद्दारी करने वाली भाजपा को उनके किए की सजा दें और जवाबदेह ठहराएं। ठाकरे का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी अब निष्ठाहीन नेताओं के प्रति शून्य-सहिष्णुता (Zero-Tolerance) की नीति अपना रही है और जनता के बीच जाकर अपनी बात मजबूती से रख रही है।
सड़े हुए पत्तों को बताया राजनीतिक गंदगी
राजनीतिक माहौल को मानसून की बारिश से जोड़ते हुए उद्धव ठाकरे ने एक मार्मिक उदाहरण दिया। उन्होंने रैली में आए किसानों की निष्ठा को सराहा और कहा कि जिस तरह भारी बारिश में सड़े हुए पत्ते बह जाते हैं और नई कोपलें फूटती हैं, वैसे ही शिवसेना से ‘सड़े हुए पत्ते’ (गद्दार नेता) अलग हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके सामने बैठे निष्ठावान और कट्टर शिवसैनिक ही असली मानसून हैं, जो पार्टी में नई ऊर्जा और नई उम्मीदों का संचार कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं के दम पर ही पार्टी इस विपरीत दौर से बाहर निकलेगी और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से अपनी खोई हुई साख को पुनर्स्थापित करेगी।










