मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने खाड़ी देशों के सुरक्षा समीकरणों को हिला कर रख दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान की लावन तेल रिफाइनरी पर एक गुप्त लेकिन अत्यंत विनाशकारी हमला किया था। यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिका युद्धविराम (सीजफायर) की कोशिशें कर रहा था। इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण रिफाइनरी में भीषण आग लग गई, जिससे ईरान का तेल उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। शुरुआत में इसे एक अज्ञात हमला माना जा रहा था, लेकिन अब इस हमले के पीछे यूएई का नाम सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
ईरान का महा-पलटवार: यूएई पर बरसीं 2,800 मिसाइलें और ड्रोन
यूएई के इस उकसावे वाले कदम का जवाब देने में ईरान ने ज़रा भी देर नहीं की। अपनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली रिफाइनरी पर हुए हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने यूएई के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई का मोर्चा खोल दिया है। ईरान ने अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला करते हुए यूएई के विभिन्न सामरिक ठिकानों पर 2,800 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह हमला हाल ही में इजरायल पर किए गए हमलों से भी कहीं ज्यादा बड़ा और घातक है। ईरान का यह आक्रामक रुख साफ तौर पर यूएई को बड़ी चेतावनी देने के लिए है।
दुबई और अबू धाबी की अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट
ईरान द्वारा किए गए इन लगातार और विनाशकारी हमलों ने यूएई के बुनियादी ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है। दुनिया के सबसे सुरक्षित और विकसित शहरों में गिने जाने वाले दुबई और अबू धाबी में इन हमलों का सीधा असर देखा जा रहा है। वहां का अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बाधित हुआ है, पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया है और संपत्ति बाजार (Real Estate) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सुरक्षा के बढ़ते खतरों के कारण विदेशी निवेशकों में डर का माहौल है, जिससे यूएई की दशकों से बढ़ रही आर्थिक प्रगति पर अब काले बादल मंडराने लगे हैं।
पश्चिमी हथियारों और कूटनीति का बड़ा खेल
इस गंभीर सैन्य संघर्ष में अमेरिका ने पूरी तरह से यूएई की गुप्त कार्रवाई का मौन समर्थन किया है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई अपनी वायुसेना के अभियानों में पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और फ्रांस के घातक लड़ाकू विमानों का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। हमलों और निगरानी के लिए फ्रांसीसी मिराज विमानों के साथ-साथ चीनी ‘विंग लूंग’ ड्रोन का भी बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा रहा है। अमेरिका का समर्थन इस बात का संकेत है कि वह ईरान को घेरने के लिए अब खाड़ी देशों को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
आर्थिक प्रतिबंध और ईरानी नागरिकों पर सख्ती
सैन्य हमलों के साथ-साथ यूएई ने अब ईरान को आर्थिक मोर्चे पर भी कमजोर करने की रणनीति अपनाई है। दुबई, जो कभी ईरान के लिए एक बड़ा व्यापारिक केंद्र हुआ करता था, वहां अब ईरानी कंपनियों और आर्थिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, यूएई ने ईरानी नागरिकों के वीजा अधिकारों में भारी कटौती की है और वहां संचालित ईरानी स्कूलों व क्लबों को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। यूएई का लक्ष्य ईरान को वित्तीय रूप से अलग-थलग करना है।
खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव
प्रसिद्ध विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, किसी खाड़ी देश द्वारा ईरान पर ऐसा सीधा और गुप्त हमला करना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। अब यूएई अपनी पुरानी ‘तटस्थ कूटनीति’ को त्यागकर ईरान के विरोध में खुलकर खड़े होने वाले सबसे मुखर देश के रूप में उभरा है। इस भीषण युद्ध ने न केवल खाड़ी क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि आने वाले समय में यह पूरे मिडल ईस्ट के राजनीतिक भविष्य को एक नई और अनिश्चित दिशा की ओर ले जा सकता है।










