
Tunisia Protests 2026 : ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में राष्ट्रपति कैस सईद के खिलाफ हजारों लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। शनिवार को आयोजित इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और देश की अर्थव्यवस्था को ठीक से नहीं संभाल पाने का आरोप लगाया। हाल के वर्षों में इसे राष्ट्रपति सईद के शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। प्रदर्शन में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों के साथ श्रमिक संगठनों, वकीलों, डॉक्टरों, पत्रकारों, बेरोजगार युवाओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
आर्थिक संकट और जरूरी सुविधाओं की कमी से नाराजगी
लंदन स्थित समाचार माध्यम द न्यू अरब की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्यूनीशिया के प्रमुख श्रमिक संगठन यूजीटीटी और विभिन्न नागरिक संगठनों ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। देश इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। सरकारी सेवाओं की बदहाल स्थिति, पानी और बिजली की आपूर्ति में रुकावट तथा दवाओं समेत जरूरी सामान की कमी ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। बढ़ती बेरोजगारी और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर भी नागरिकों में असंतोष है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।

संसद भंग करने के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
राष्ट्रपति कैस सईद ने 2021 और 2022 के दौरान संसद भंग करने, कई न्यायाधीशों को बर्खास्त करने और आदेशों के जरिए शासन चलाने जैसे कदम उठाए थे। विपक्ष ने इन फैसलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताते हुए तख्तापलट करार दिया था। आलोचकों का आरोप है कि इन कदमों से देश की सत्ता राष्ट्रपति के हाथों में केंद्रित हो गई। मानवाधिकार संगठनों का यह भी दावा है कि सईद के शासन में पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ी है।
राष्ट्रपति ने आरोपों को किया खारिज
कैस सईद ने खुद को तानाशाह मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक विरोधी देश में असंतोष फैलाने के लिए आर्थिक संकट को कृत्रिम रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आर्थिक समस्याओं का समाधान जरूरी है। लंबे समय से आपसी मतभेदों के कारण विपक्ष एकजुट होकर बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर पा रहा था, लेकिन इस बार विभिन्न समूहों की भागीदारी ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।

ऐतिहासिक हबीब बुर्गिबा एवेन्यू पर गूंजे नारे
प्रदर्शनकारियों ने राजधानी के ऐतिहासिक हबीब बुर्गिबा एवेन्यू पर मार्च किया। वर्ष 2011 में अरब स्प्रिंग आंदोलन के दौरान भी यह सड़क विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रही थी। रैली में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी जारी रखी। उन्होंने सत्ता जनता के हाथों में होने और भूख तथा जेलों में बंद लोगों की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान 2011 की क्रांति से जुड़ा शासन परिवर्तन का नारा भी दोहराया गया।
गिरफ्तार आलोचकों की रिहाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार किए गए सरकार के आलोचकों को तत्काल रिहा करने और ट्रेड यूनियनों के अधिकारों पर कथित हमले रोकने की मांग की। यूजीटीटी के प्रमुख सलाह एद्दीन सल्मी ने कहा कि अब चुप्पी स्वीकार नहीं की जाएगी और किसी एक व्यक्ति के हाथों में सारी सत्ता केंद्रित करके देश नहीं चलाया जा सकता।
दक्षिणी शहर से पहुंचे प्रदर्शनकारी ने जताई नाराजगी
राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित स्फैक्स शहर से आए प्रदर्शनकारी यासीन घारसेली ने पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देश विनाश की ओर बढ़ रहा है और अब बदलाव की जरूरत है। उनका कहना था कि स्वतंत्रता के समर्थन में आवाज उठाने के लिए वह राजधानी पहुंचे हैं और अकेले रह जाने पर भी संघर्ष जारी रखेंगे। इस व्यापक प्रदर्शन के बाद अब ट्यूनीशिया की राजनीतिक स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।











